अपर्णा यादव का बीजेपी में रेड कारपेट स्वागत, क्या इसका राजनीतिक असर होगा

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लखनऊ। मुलायम सिंह यादव उत्तर प्रदेश की राजनीति के एक बहुत वरिष्ठ और कद्दावर नेता हैं जिन्होंने जमीनी राजनीति से संघर्ष करते हुए राजनीतिक फलक पर एक ऊंचा मकाम हासिल किया। राजनीति की शुरुआत में से ही बहुत हद तक उनके परिवार ने उनका साथ दिया और उन्होंने भी परिवार को राजनीति में समझदारी के साथ बनाए रखा। इसलिए जब उनके छोटे बेटे की पत्नी अपर्णा सिंह बिष्ट से विवाह के बाद अपर्णा यादव ने भाजपा का दामन थामा तो भाजपा ने इसे एक हाई प्रोफाइल एंट्री मांगते हुए मीडिया में और पार्टी में भी एक बड़ी घटना बना दिया। यह इसी से जाहिर है कि दिल्ली में अपर्णा यादव के स्वागत में पार्टी सदस्यता लेते समय पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री दोनों उपमुख्यमंत्री पार्टी अध्यक्ष समेत सैकड़ों भाजपा नेता वहां पर थे। इसके राजनीतिक प्रभाव को लेकर कुछ लोग खास करके भाजपा के नेता अखिलेश यादव को निशाना बना रहे हैं और यही इस घटना का राजनीतिक महत्व है जहां तक अपर्णा यादव की राजनीति का सवाल है तो उनकी ना तो राजनीतिक सोच है और ना ही अभी तक उन्होंने राजनीतिक क्षेत्र में उपस्थिति शून्य है । 2017 के चुनाव में लखनऊ कैंट सीट से कांग्रेस से आयातित उम्मीदवार रीता बहुगुणा जोशी से लगभग 32000 वोटों से हारी थी उनका चुनाव प्रचार करने के लिए अखिलेश यादव स्वयं भी गए थे।
अपर्णा यादव के भाजपा में जाने से भाजपा नेताओं को अखिलेश पर निशाना साधने का एक बहाना मिल गया है कि अखिलेश से अपना घर नहीं संभल रहा प्रदेश क्या संभालेंगे । जहां तक परिवार का सवाल है यह मुद्दा 2017 में उठा था और हल भी हो गया था । परिवार ने मुलायम सिंह यादव का राजनीतिक वारिस अखिलेश को ही माना है। मुलायम सिंह यादव के छोटे पुत्र प्रतीक यादव की भी कभी इस मुद्दे को नहीं उठाया वह जिम चलाते हैं और उनकी कई कंपनियां है और बिजनेस है।
मुलायम सिंह यादव की दो शादी हुई इनकी पहली पत्नी मालती यादव जिनके पुत्र अखिलेश यादव हैं। मुलायम सिंह यादव की पत्नी जीवित थी तभी इनकी दूसरी पत्नी साधना के साथ इनके संबंध थे लेकिन मुलायम सिंह यादव ने पहली पत्नी के निधन के बाद ही 2003 में साधना यादव को पत्नी का कानूनी दर्जा दिया था। साधना यादव पहले से विवाहित थी 1986 में इनकी शादी चंद्र प्रकाश गुप्ता से हुई थी और इसी शादी से इनके पुत्र प्रतीक यादव का जन्म हुआ था। पहले पति से यह अलग हो गई थी और उसके बाद यह मुलायम सिंह के संपर्क में आई थी इस तरह प्रतीक यादव मुलायम सिंह के बायोलॉजिकल पुत्र नहीं बल्कि गोद लिए हुए पुत्र हैं। इसलिए पारिवारिक विरासत और राजनीतिक विरासत को लेकर कोई विवाद नहीं है।
भारतीय जनता पार्टी के बहुत से बड़े नेता समाजवादी पार्टी में चले गए हैं और इसी खीझ को उतारने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने अपर्णा यादव का इतना शानदार स्वागत भाजपा में किया है। मुलायम सिंह की दूसरी पत्नी साधना यादव के भाई भी भाजपा में शामिल हुए हैं जो समाजवादी पार्टी से पूर्व विधायक थे। वैसे अपर्णा यादव के भाजपा में जाने से समाजवादी पार्टी ने तो चैन की सांस ही ली है क्योंकि उन्हें एक अति महत्वाकांक्षी परिवार के सदस्य से अपने आप ही छुटकारा मिल गया। ये देखना दिलचस्प है कि बीजेपी आईटी सेल और गोदी मीडिया इस मुद्दे को कब तक हवा देता रहेगा।
अरुणिमा