असम (गुवाहाटी)-इसी साल फरवरी में असम समझौते के खंड 6 को लागू करने के लिए गठित एक उच्चस्तरीय समिति ने अपनी रिपोर्ट सौंपी थी जो सरकार ने रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया

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गुवाहाटी- इसी साल फरवरी में असम समझौते के खंड 6 को लागू करने के लिए गठित एक उच्चस्तरीय समिति ने अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। तब से सरकार ने रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया था। अब 6 महीने बीतने के बाद मंगलवार को पैनल के कुछ सदस्यों ने स्वतंत्र रूप से रिपोर्ट जारी कर दी। रिपोर्ट जारी करने वालों में अरुणाचल प्रदेश के ऐडवोकेट जनरल निलय दत्ता और ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (AASU) के तीन सदस्य शामिल हैं। 1985 में हुए असम समझौते की यह प्रमुख प्रावधान दशकों से विवादास्पद रहा है और अभी तक लागू नहीं हो सका है। असम समझौते का खंड 6 क्या है?
असम में जब बांग्लादेशी नागरिकों के खिलाफ आंदोलन अपने चरम पर था तब तत्कालीन राजीव गांधी सरकार को AASU के साथ समझौता करना पड़ा था। इस असम समझौते की खंड 6 कहती हैं, असम के लोगों की सांस्‍कृतिक, सामाजिक, भाषायी पहचान व विरासत का संरक्षण और उसे प्रोत्‍साहित करने के लिए उचित संवै‍धानिक, विधायी और प्रशासनिक उपाय किए जाएंगे। समझौते के अनुसार, 24 मार्च 1971 की तारीख को नागरिकता देने के लिए कटऑफ के रूप में निर्धारित किया गया था। असम के पूर्व मुख्यमंत्री प्रफुल महंता जिन्होंने तत्कालीन AASU अध्यक्ष के रूप में समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। समझौते के अनुसार, यह तय हुआ था कि कटऑफ की तारीख तक के अप्रवासियों को भारतीय नागरिकों के रूप में सभी अधिकार प्राप्त होंगे। यह भी कहा गया था कि खंड 6 को असम के स्वदेशी जातियों की संस्कृति और सामाजिक-राजनीतिक अधिकारों को सुरक्षित रखने के लिए जोड़ा गया है।
असम समझौते के खंड 6 को लागू करने की सिफारिशें तैयार करने के लिए इतने साल में कई बार कमिटी गठित हुईं लेकिन 2019 में गृह मंत्रालय द्वारा गठित कमिटी के अलावा किसी ने भी प्रावधान के विवादास्पद मुद्दे पर आगे की कार्यवाही नहीं की। असम में दिसंबर और जनवरी में नागरिक संशोधन बिल को लेकर हुए विरोध-प्रदर्शन के चलते सरकार ने असमिया समुदाय को शांत करने के लिए खंड 6 पर तत्काल रूप से काम करने को कहा था।
इस कमिटी का नेतृत्व हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज बिप्लब कुमार शर्मा ने किया जिसमें कई लीगल एक्सपर्ट्स के अलावा, रिटायर्ड नौकरशाह, स्कॉलर, पत्रकार और AASUके पदाधिकारी शामिल थे।
इस कमिटी ने अपनी रिपोर्ट सौंपी थी उसमें असम के लोगों की परिभाषा और उनके अधिकारों के सुरक्षा के लिए उपाय बताए गए थे। कमिटी के अनुसार, खंड 6 के उद्देश्य से असमिया लोगों पर विचार किया जाना चाहिए-
वे सभी भारत के नागरिक हैं-
-जो असम के समुदाय का हिस्सा हैं और 1 जनवरी 1951 से या इससे पहले से असम में निवास कर रहे हों
-असम का कोई भी स्वदेशी आदिवासी समुदाय जो 1 जनवरी 1951 से या इससे पहले से यहां रह रहा हो
-असम का कोई दूसरी स्वदेशी समुदाय तो यहां 1 जनवरी 1951 या पहले से रह रहा हो
-भारत के सभी नागरिक जो यहां 1जनवरी 1951 या इसके पहले से रह रहे हों
-इनके वशंजों को भी भारत का नागरिक कहलाने का अधिकार है
1951 कटऑफ वर्ष क्यों तय किया गया?
असम में प्रदर्शन के दौरान 1951 के बाद असम में अवैध रूप से प्रवेश करने वाले अप्रवासियों का पता लगाने और निर्वासन की मांग की गई थी। हालांकि असम समझौते के अनुसार, कटऑफ की तारीख 24 मार्च 1971 रखी गई थी। एनआरसी को भी इसी कटऑफ के आधार पर अपडेट किया गया है।
खंड 6 का मुख्य उद्देश्य असम के लोगों को कुछ सुरक्षा उपायों को उपलब्ध कराना है जो 1951 से 1971 के बीच के प्रवासियों को नहीं दिए जाएंगे। अगर यह सिफारिश स्वीकार कर ली जाती है तो 1951 से 1971 के बीच जो प्रवासी थे उन्हें असम समझौते और एनआरसी के तहत भारत के नागरिक कहलाएंगे लेकिन वे उन सुरक्षा उपायों के योग्य नहीं होंगे जो असम के लोगों के लिए हैं।
असम के लोगों के लिए सुरक्षा उपाय क्या हैं?
कई सिफारिशों के बीच संसद, विधानसभा और नगर निकायों में आरक्षित सीट, नौकरी में आरक्षण और जमीन का अधिकार शामिल है। पैनल द्वारा सुझाए गए सिफारिशों के अनुसार, असम के लोगों को-
-असम की संसदीय सीटों, विधानसभा सीटों और नगर निकायों में 80 से 100 फीसदी तक आरक्षण मिलेगा।
-असम केंद्र सरकार/अर्ध केंद्र सरकार/पीएसयू/प्राइवेट सेक्टर में ग्रुप सी और डी स्तर के पोस्ट पर 80 से 100 फीसदी आरक्षण
-असम सरकार में नौकरी के पदों पर 80 से 100 फीसदी आरक्षण
-जमीन का अधिकार हालांकि इसमें असम के लोगों के अलावा किसी अन्य को किसी भी तरीके से जमीन ट्रांसफर करने का अधिकार नहीं होगा।
क्यों हुआ असम समझौता?
असम में बांग्लादेशी नागरिकों के खिलाफ प्रदर्शनों ने हिंसा का रूप ले लिया था। तत्कालीन राजीव गांधी की केंद्र सरकार को AASU के साथ समझौता करना पड़ा। ये समझौता 15 अगस्त 1985 को हुआ था। इसके बाद विधानसभा को 1985 में भंग करके चुनाव कराए गए जिसमें नई बनी असम गणपरिषद की सरकार को बहुमत मिला। राज्य में असम समझौते से शांति बहाली तो हुई लेकिन नवनिर्वाचित राज्य सरकार खुद भी इसे लागू नहीं करा पाई।
क्या था 1985 का समझौता?
– भारत और पूर्वी पाकिस्तान विभाजन के बाद (1951 से 1961 के बीच) असम आए सभी लोगों को पूर्ण नागरिकता और वोट का अधिकार दिया जाएगा।
– 1961 से 1971 के बीच असम आने वालों को नागरिकता और अन्य अधिकार दिए जाएंगे लेकिन उन्हें वोट देने का अधिकार नहीं होगा।
-असम को आर्थिक विकास के लिए विशेष पैकेज भी दिया जाएगा।
– असमिया भाषी लोगों के सांस्कृतिक, सामाजिक और भाषाई पहचान की सुरक्षा के लिए विशेष कानून और प्रशासनिक उपाय किए जाएंगे।
– 1971 के बाद असम में आने वाले विदेशियों को वहां का नागरिक नहीं माना जाएगा, उन्हें वापस भेजा जाएगा।(UNA)