“असली आज़ादी का आत्मज्ञान!!

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व्यंग्य
“बही खाता”

सुल्तान भारती

अब जाकर घर बैठे मुझे काफ़ी बढ़िया नस्ल का ज्ञान प्राप्त हुआ है ! धन्य हैं कंगना जैसी विदुषी का, जिन्होंने इस घनघोर कलिकाल में अवतार लेकर हमें बौद्धिक रूप से दिवालिया होने से बचा लिया ! इस खोज के उपहार में आपको पद्मश्री सम्मान दिया गया , ये हमारे लिए कम मगर विश्व के लिए गौरव की बात है ! पता नहीं आप को इस खोज की प्रेरणा कहां से मिली ! कुछ लोग तुम्हारी इस दुर्लभ खोज से इतने सदमे में आ गये गोया उनकी जानकारी को लकवा मार गया हो। जो नई खोज के पक्ष में हैं, वो भक्ति में ओतप्रोत होकर गा रहे हैं – ‘ आप जैसा कोई इतिहासकार आए,,,, तो बात बन जाए -‘!! लेकिन बात बनने की जगह बिगड़ रही है ! आजादी मिलने की नई तारीख़ को लेकर समर्थक और विरोधी ताल ठोकने लगे हैं ! जैसे ही नई जानकारी का छींटा जनता के मुंह पर पड़ा,, जनता और कथित बुद्धिजीवियों के बीच खाडी युद्ध शुरू हो गया! विद्वान भक्त वत्सल नई स्वतंत्रता दिवस के पक्ष में फतवा देते हुए कह रहे हैं कि 1947 के मुकाबले 2014 की आजादी में ज़्यादा फाइबर है ! हम पुरानी तारीख़ में मिली आजादी का बॉयकॉट करते हैं,क्योंकि उस आजादी से अचानक हमे गुलामी की बदबू आने लगी है ! नई तारीख़ में मिली आजादी ज़्यादा पोटेंशियल है,क्योंकि ये आजादी हमने रामराज विरोधिओ से अहिंसा के बल पर हासिल की है! वैसे 2014 के स्वतन्तता संग्राम में हासिल आजादी में ” मिनरल्स” भी ज़्यादा है !

वैसे तो इतिहास में खुदाई का कार्य पिछले कई सालों से प्रगति पर है, फिर भी 2016 के बाद से इसमें बहुत बड़ी बड़ी कामयाबी हासिल होने लगी है ! खोज के इसी कालखंड में देश को पता चला कि ताजमहल दरअसल “तेजोमहल” है ! इस ख़बर से कई लोग शेयर बाजार की तरह औंधे मुंह गिर पड़े ! उन्होंने समझ लिया कि अब तक जो पढ़ा था, – सब धन धूल समान -‘! उत्साही इतिहासकार फावड़ा उठाए ऐलान कर रहे थे, – सारे घर के बदल डालूंगा ! कई अंधों को अचानक आंख वालों से ज़्यादा नज़र आने लगा ! जिनके सिलेबस में कभी इतिहास था ही नहीं, वो इतिहास के कोलंबस बन बैठे ! ये खोज करने और कोमा से बाहर आने का स्वर्ण काल था ! इसी दौर में पता चला कि लाल क़िला, जामा मस्जिद दोनो के नीचे मंदिर है ! यही नहीं कुतुबमीनार का कुतुबुद्दीन ऐबक से कोई लेना देना नहीं है ! सैकड़ों लोग हथौड़ा उठाए ‘गुलामी के प्रतीक ‘ ढूंढ रहे हैं !

जनता पाषाण युग से निकल कर विकास उत्सव के मंडप में आ गई है ! ज्ञान चक्षु खुल चुके हैं और जाम ख़त्म हो चुका था ! सतयुग क्वालीफाई करने के लिए चरित्र निर्माण ज़रूरी है ! कांग्रेसियों के तमाम आराध्यदेव जांच के दायरे में आए तो बड़े चौंकाने वाले खुलासे हुए ! पता लगा लिया कि देश को रसातल में ले जानें में ” बापू” सबसे आगे थे ! ( आसाराम बापू नहीं, देश के बापू ! ) वैज्ञानिकों की ऐसी टीम आई है जो स्वर्गवासी नेताओं के चरित्र का डीएनए टटोल रही है ! विपक्षी पार्टियों के मर चुके कई राष्ट्रीय नेताओं का नया चरित्र प्रमाण पत्र सामने आया, जिसका पता खुद “स्वर्गीय” हो चुके नेता को भी नहीं था ! इस नई खोज के बाद कई देवदूतो को स्वर्ग से निष्कासित कर दिया गया !

देश की आजादी के नए खुलासे के बाद मैं बड़ा धर्मसंकट में हूं! धर्मसंकट ये है कि – 1947 और 2014 दोऊ खड़े , काके लागूं पांय -! अज्ञानियों को जानें कैसे उन्नीस सौ सैंतालीस में आजादी नज़र आ गई थी , जबकि 2014 वाली आजादी के ज्यादातर फ्रीडम फाइटर 1950 के बाद में पैदा हुए ! इतिहास और विकास के साथ इतनी बड़ी छेड़खानी पहले कभी नहीं हुई थी !. हमारे जैसे अवसरवादी सन सैंतालीस को आजादी का वर्ष समझ कर 1960 के अंदर ही पैदा हो गए ! अब दो हजार इक्कीस में जब मोहन जो दारो और हड़प्पा से भी गहरी खुदाई हुई तो आजादी को नई तारीख़ बरामद हो गई ! तब से करोड़ों सीनियर सिटीजन अंगारों पर लोट रहे हैं ! वामपंथी इतिहासकारों ने इतनी गलत तारीख़ क्यों डाल दी !! उन्हें तो ये लिखना था कि वगैर आजादी दिए अंग्रेज, सवेरे वाली गाड़ी से चले जायेंगे ! जनता हॉर्न बजाती रहे, जगह मिलने पर
आजादी दी जाएगी ! आखिरकार २०१४ में प्रचंड आजादी मिल गई ! ( अभी गिनती चल रही है कि 2014 वाले इस ” स्वतंत्रता संग्राम” में कितने शहीद हुए हैं ! (शहीदों से बायोडाटा मांगना बाकी है ! )

हंगामा है क्यूं बरपा., तारीख़ ही बदली है। अभी तो बहुत कुछ बदला जाएगा ! परिवर्तन की लहर शीत लहर से ज़्यादा कष्ट दे रही है ! मगर विरोधी कितना भी आर्तनाद करें, खुदाई बंद नहीं होगी ! देश की जनता को सच से रूबरू कराने का वक्त आ चुका है ! सबसे पहले इतिहास को गर्म पानी में उबाल कर कीटाणु रहित किया जाएगा ! राष्ट्रभक्त इतिहासकार ” कुल्हाड़ी और फावड़ा लेकर तैयार बैठे हैं। सोशल मीडिया के “घटोत्कच” योद्धा हर नई खोज को सत्यापित करने में ‘खून पसीना’ ( खून तुम्हारा पसीना उनका) बहाने में देर नहीं करेंगे! इसलिए आजादी की नई तारीख़ पर बहस करने से – बच के रहना रे बाबा ! बच के रहना रे ,,,,,!!!