आईएएस अधिकारी कन्नन गोपीनाथन का बिहार के उत्तर बिहार में व्यस्त कार्यक्रम

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किशनगंज,5 दिसम्बर।अपने पद से इस्तीफा देने वाले केरल के आईएएस अधिकारी कन्नन गोपीनाथन बिहार में है। उनका उत्तर बिहार में व्यस्त कार्यक्रम है। जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले आर्टिकल 370 निरस्त करने को लेकर चिंतित रहने वाले गोपीनाथन
आज 5 दिसम्बर की शाम किशनगंज में, 6 दिसम्बर
को  सुबह मधेपुरा में और शाम में सुपौल में,7 दिसम्बर
को सुबह व दोपहर में पूर्णिया में तो शाम में कटिहार में जनसंवाद करेंगे। अंतिम दिन 8 दिसम्बर को अररिया में जनसंवाद करेंगे।

सामाजिक कार्यकर्ता महेन्द्र यादव ने 6 दिसम्बर के कार्यक्रम के बारे बताया कि 10 से 1 बजे तक कला भवन, कलेक्ट्रेट के सामने मधेपुरा में और 3 बजे शाम से पब्लिक लाइब्रेरी क्लब,महावीर चौक सुपौल में जनसंवाद करेंगे।मधेपुरा में होने वाले कार्यक्रम में विभिन्न जन संगठन जैसे कोसी नव निर्माण मंच, जन आंदोलनों के राष्ट्रीय समन्वय,जन जागरण शक्ति संगठन,इप्टा,एआईएसएफ,बिहार राज्य किसान सभा,बिहार राज्य खेत मजदूर सभा,एआईपीएफ, अंबेडकर छात्र संगठन,भारत ज्ञान विज्ञान समिति,ट्रेड यूनियन के अलावा मधेपुरा के नागरिक व प्रबुद्ध लोग भाग लेंगे।

बताते चले कि केरल के आईएएस अधिकारी कन्नन गोपीनाथन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया । वह जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले आर्टिकल 370 निरस्त करने को लेकर चिंतित थे। उनका कहना है कि आर्टिकल 370 का खत्म करके कश्मीर के लोगों से ‘मूलभूत अधिकार’ छीन लिए गए। उन्होंने कहा कि मेरे इस्तीफा देने से कोई फर्क नहीं पड़ेगा लेकिन हर किसी को अंतर्रात्मा को आवाज देना होता है। उन्होंने आगे कहा कि 5 अगस्त को जम्मू-कश्मीर के लोगों के मूलभूत अधिकारों को छीन लिया गया है। इससे यह प्रतीत होता है भारत के वाकी लोग भी इससे सहमत हैं।

मालूम रहे कि भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के 33 वर्षीय अधिकारी कन्नन गोपीनाथन ने जम्मू-कश्मीर में लगाए गए प्रतिबंध और मौलिक अधिकारों के हनन के विरोध में 21 अगस्त को इस्तीफा दे दिया था। केरल में 2018 में आई बाढ़ के दौरान उनके काम की काफी सराहना हुई थी। कन्नन ने कहा कि पद छोड़ने का निर्णय एमएचए के नोटिस के आधार पर नहीं था, बल्कि कश्मीर के मौलिक अधिकारों के लिए उनका निर्णय था। गोपीनाथन की फैमिली ने उनके फैसले का समर्थन किया है।

आईएएस अधिकारी को गृह मंत्रालय (एमएचए) के अंडर सेक्रटरी राकेश कुमार सिंह की ओर से जुलाई में ‘एक्ट ऑफ ऑमिशन एंड कमीशन’ को लेकर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था।दो पेज के इस नोटिस में बड़े पैमाने पर बाढ़ के मद्देनजर अपने गृह राज्य केरल का दौरा करना भी शामिल है।इसके अलावा नोटिस में विभिन्न श्रेणियों के तहत प्रधानमंत्री पुरस्कार के लिए नामांकित व्यक्तियों की तैयारी के संबंध में था, जिसमें यह आरोप लगाया गया था कि कन्नन दिए गए निर्देशों का पालन करने में विफल रहे थे।

आईएएस अधिकारी को अगले दस दिनों में सलाहकार को जवाब देने के लिए कहा गया था, जबकि दस्तावेज में यह भी कहा गया है कि उक्त मामले पर निर्णय अगले 15 दिनों में UT के सलाहकार द्वारा लिया जाएगा।इस संबंध में कन्नन गोपीनाथन ने 31 जुलाई को विस्तार से जवाब दे दिया था. वहीं, केंद्र ने आरोप लगाया कि अधिकारी रिपोर्ट देने में विफल रहे।

बता दें कि गोपीनाथन दादरा और नगर हवेली में बिजली और गैर-पारंपरिक ऊर्जा सचिव के रूप में तैनात थे. केरल के 2012 बैच के आईएएस अधिकारी कन्नन गोपीनाथन ने इससे पहले कहा था कि जम्मू-कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा छीने जाने के बाद से हफ्तों से वहां के लाखों लोगों के मौलिक अधिकारों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है.  उन्होंने कहा, ‘मैंने प्रशासनिक सेवा इसलिए ज्वाइन की, क्योंकि मुझे लगा कि मैं उन लोगों की आवाज बन सकता हूं, जिनकी आवाज को बंद कर दिया जाता है. लेकिन यहां, मैंने खुद अपनी आवाज खो दी।’

गोपीनाथन ने 20 अगस्त को ट्वीट कर लिखा था ‘मैंने एक बार सोचा था कि सिविल सेवाओं में होने का मतलब साथी नागरिकों के अधिकारों और स्वतंत्रता का विस्तार करना है.’ उन्होंने कहा ‘कश्मीर में 20 दिनों से लाखों लोगों के मौलिक अधिकारों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है और भारत में कई लोगों को यह ठीक लग रहा है।यह सब भारत में 2019 में हो रहा है।’