आगरा के डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय ने मंगलवार को पहली पाली में हुई बीए तृतीय वर्ष की हिंदी साहित्य द्वितीय प्रश्नपत्र की परीक्षा निरस्त कर दी है। प्रश्नपत्र में हिंदी भाषा के प्रश्न पूछे गए थे।

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आगरा के डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय ने मंगलवार को पहली पाली में हुई बीए तृतीय वर्ष की हिंदी साहित्य द्वितीय प्रश्नपत्र की परीक्षा निरस्त कर दी है। प्रश्नपत्र में हिंदी भाषा के प्रश्न पूछे गए थे। परीक्षा समिति की बैठक में बुधवार को निर्णय लिया गया कि गलत प्रश्नपत्र तैयार करने वाले शिक्षकों को काली सूची में डाला जाएगा।

हिंदी साहित्य द्वितीय प्रश्नपत्र की परीक्षा में करीब 11,500 परीक्षार्थी शामिल हुए थे। परीक्षार्थियों ने हिंदी भाषा के प्रश्न पूछे जाने पर आपत्ति दर्ज कराई थी। परीक्षा समिति की बैठक में औटा के अध्यक्ष डॉ. मुकेश भारद्वाज व महामंत्री डॉ. निशांत चौहान की ओर से परीक्षा को निरस्त करने की मांग की गई। इसे सर्वसम्मति से पास कर दिया गया। परीक्षा की दूसरी तिथि जल्द घोषित की जानी है।

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21 सितंबर की निरस्त परीक्षा छह अक्तूबर को
प्रश्नपत्र कम पड़ने की वजह से 21 सितंबर की पर्यावरण अध्ययन की परीक्षा स्थगित कर दी गई थी। परीक्षा समिति में इसे भी रखा गया। निर्णय लिया गया कि परीक्षा छह अक्तूबर को तीसरी पाली में कराई जाएगी।

एमए अंतिम वर्ष इतिहास की परीक्षा छह अक्तूबर को
उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की ओर से पीसीएस की मुख्य परीक्षा 26 सितंबर 2020 को होने के कारण इसी दिन होने वाली एमए अंतिम वर्ष इतिहास विषय की परीक्षा स्थगित कर दी गई है।

इस संबंध में एक परीक्षार्थी ने प्रार्थनापत्र भी दिया है। छात्रहित में परीक्षा को स्थगित किया गया है। यह परीक्षा अब छह अक्तूबर को तृतीय पाली में कराई जाएगी। मुख्य परीक्षा 2020 की अंतिम वर्ष की बाकी परीक्षाओं के लिए नोडल केंद्रों और परीक्षा केंद्रों का परीक्षा समिति ने अनुमोदन प्रदान किया।

निर्धारित समय में पाठ्यक्रम पूरा न कर पाने वाले छात्रों को एक और मौका
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय प्रशासन ने निर्धारित समय में पाठ्यक्रमों को पूरा न कर पाने वाले छात्र-छात्राओं को एक और मौका दिया है। बुधवार को पालीवाल पार्क परिसर के गुरुवार को भवन में परीक्षा समिति की बैठक हुई। इसमें एलएलबी, बीएड, बीबीए, बीसीए और अन्य पाठ्यक्रमों की परीक्षाओं को उत्तीर्ण न कर पाने वाले छात्र-छात्राओं को पुनर्परीक्षा में शामिल होने का अवसर दिया जाएगा।

कुलपति प्रो. अशोक मित्तल की अध्यक्षता में हुई बैठक में तय किया गया कि एलएलबी पाठ्यक्रम उत्तीर्ण करने की अधिकतम समय सीमा छह वर्ष है और बीएएलएलबी पाठ्यक्रम उत्तीर्ण करने की अधिकतम समय सीमा आठ वर्ष है। दोनों पाठ्यक्रमों के वे छात्र जिनके पाठ्यक्रम की अधिकतम सीमा समाप्त हो चुकी है या वर्ष 2020 में पूरी हो रही है, लेकिन उनकी डिग्री अधिकतम तीन प्रश्नपत्रों में अनुत्तीर्ण होने से अपूर्ण है, ऐसे सभी छात्रों को पुनर्परीक्षा का एक विशेष अवसर दिया जाएगा।

वर्ष-2015 से दो वर्षीय बीएड पाठ्यक्रम शुरू किया गया था, इसे उत्तीर्ण करने की अधिकतम समय सीमा तीन वर्ष है। तमाम ऐसे विद्यार्थी हैं, जिनकी यह समय सीमा समाप्त हो चुकी है।

बीएड प्रथम वर्ष और बीएड द्वितीय वर्ष की पुनर्परीक्षा या भूतपूर्व छात्र के रूप में अधिकतम दो प्रश्नपत्रों में अनुत्तीर्ण होने की वजह उनकी डिग्री अपूर्ण रह गई है। ऐसे छात्रों को भी पुनर्परीक्षा का एक मौका दिया जाएगा और वर्ष 2020 में ही द्वितीय वर्ष की परीक्षा के लिए उनके फॉर्म भरवाए जाएंगे।