आतंकियों से मुठभेड़ में जवान शहीद

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आतंकियों से मुठभेड़ में जवान शहीद

अभी 2 महीने पहले ही पुलवामा में हुए आतंकी हमले में डेरापुर के श्यामबाबू शहीद हो गए जिसे लोग भुला भी नही पाये थे कि आज फिर पुलवामा में आतंकियों से मुठभेड़ में 2 आतंकियों को मार गिराने के बाद कानपुर देहात के कस्बा डेरापुर का रहने वाला जवान रोहित यादव की शहादत ने आज फिर से पुलवामा हमले की यादें ताजा कर दी ,

कानपुर देहात की तहसील डेरापुर के कस्बा डेरापुर का रहने वाला जवान रोहित यादव 44 वी राष्ट्रीय रायफल में 17 राजपूताना रेजिमेंट तैनात था, रोहित यादव आतंकियों से लड़ते हुए देश के लिए शहीद हो गया, रोहित की शहादत की खबर आते ही कस्बे में मातम छा गया और शहीद के घर में चीख-पुकार मच गई , वही शहीद के घर पर क्षेत्रीय लोगों का तांता लग गया और लोगों ने शहीद के परिजनों को ढांढस बंधाया,
वही शहीद के परिजनों ने बताया कि शहीद रोहित यादव 1 माह की छुट्टी लेकर घर आया था और हाल ही में 16 मई को ड्यूटी पर पहुंचा था ,शहीद रोहित यादव वर्ष 2011 में सेना में भर्ती हुआ था और वर्ष 2016 में शहीद रोहित यादव की वैष्णवी से शादी हुई थी, शहीद रोहित यादव खेलकूद में निपुण था शहीद रोहित सरल स्वभाव का था अपने पिता के कार्यों में सहयोग करता था,
वही शहीद के पिता ने बताया की मेरे बेटी की यूनिट से फोन आया कि रोहित को आतंकियों से मुठभेड़ करते समय गोली लग गई है जिसे हॉस्पिटल ले जाया गया है लेकिन थोड़ी देर बाद फोन द्वारा बताया गया कि आपका बेटा रोहित शहीद हो गया है, हमको गर्व है कि मेरा बेटा देश के लिए शहीद हुआ और एक पिता होने के नाते गम भी है कि मेरा बेटा अब मेरे साथ नही हैं, मेरा बेटा खेलकूद में ज्यादा रुचि रखता था और हमारे कार्यों में आप पता कर सहयोग करता था यहां तक कि वह अपनी पूरी तनख्वाह मुझे सौप देता था, वही शहीद के पिता ने सेना पर आरोप लगाते हुए बताया की पुलवामा में 2 साल के लिए तैयारी के लिए भेजा गया  था 2 साल पूरे हो गए थे जिसका रिलीज ऑर्डर  करीब 1 हफ्ते पहले रिलीज हो गया था लेकिन व रिलीज ऑर्डर बटालियन तक नहीं पहुंच सका जिसके कारण मेरा बेटा वहीं तैनात बना रहा अगर रिलीज ऑर्डर समय से पहुंच जाता है तो आज मेरा बेटा जीवित होता , सेना के सिस्टम में सुधार होना चाहिए और शहीद जवानों का पार्थिव शरीर 24 घण्टे के समय से घर पहुंचा देना चाहिए जो अभी नहीं हो पा रहा है शहीद का पार्थिव शरीर घर तक आते-आते हफ्तों लग जाते हैं जिसके कारण परिजनों का हाल बेहाल हो जाता है
वही शहीद के चचेरे भाई ने बताया की हम लोग भाई कम दोस्त ज्यादा थी और रोहित का नेचर बहुत ही अच्छा था हमेशा हम लोग एक दूसरे के सुख दुख के साथी थे हमारे सेना में भर्ती होने के एक वर्ष बाद रोहित भी सेना में भर्ती हो गया था हम लोग एक साथ ही छुट्टी प्लान करके घर आया करते थे हमें गर्व है कि हमारा भाई हमारा दोस्त देश के लिए शहीद हुआ है