उड़ीसा ⁄ भुवनेश्वर जब वेंटिलेटर हो जाता है फेल तो काम आती है Ecmo Machine, विदेश से मंगवाने की प्रक्रिया शुरू

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भुवनेश्वर, कोरोना से गम्भीर होने वाले मरीजों के इलाज के लिए इकमो मशीन (Ecmo Machine) की जरूरत पड़ रही है। इसे लेकर डीएमइटी सीबीके महांति ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। भारत में इकमो उत्पादन नहीं होता है। यह मशीन विदेश से लाने की प्रक्रिया चल रही है। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया खत्म हो जाने की बात डीएमइटी डा.सीबीके. महान्ति ने कही है।
कैसे काम करती है इकमो मशीन
मरीज का खून बाहर निकलकर इस यंत्र के माध्यम से आक्सीजेनेशन कर वह खून पुन: शरीर के अन्दर लौट जाता है। यह एक कृत्रिम प्रक्रिया है जिसमें शरीर के आक्सीजन को सामयिक तौर पर मेंटेन किया जा सकेगा। इस तरह के सामयिक तौर पर कुछ दिन टाला जा सकता है। यह इलाज काफी महंगा है। पहले इसका प्रयोग करने के लिए 4 से 5 लाख रुपये की जरूरत पड़ती है। बाद में इलाज जारी रखने के लिए प्रत्येक दिन 2 लाख रुपये की जरूरत होती है। इससे पहले फुसफुस प्रतिरोपण के समय इसका प्रयोग किया जाता था।
वेंटिलेटर भी हो रहा है फेल
कोविड परिस्थिति में अति गम्भीर निमोनिया (Pneumoniae) होने पर वेंटिलेटर (Ventilator) भी फेल हो रहा है, उस समय इकमो की जरूरत होती है। वर्तमान समय में इसकी जरूरत है। प्रचार प्रसार के कारण लोगों के मन में उत्सुकता बढ़ गयी है। इकमो लगा देने से मरीज के बच जाने की लोगों में उम्मीद है सामयिक तौर पर यह मशीन मरीज को कुछ दिन तक बचा सकती है।
लाइफ सेविंग मशीन
डीएमइटी डा. सीबीके. महान्ति ने कहा है कि यह निश्चित रूप से लाइफ सेविंग मशीन है। जीवन बचाने के लिए इकमो अंतिम आशा है। किन्तु इकमो के लिए जरूरी मानव संसाधन नहीं होने से मशीन आकर रख देने मात्र से कुछ नहीं होगा। इसके लिए मानव संसाधन जुटाना बहुत कष्टकर है। नॉन कोविड के समय में इसकी उपयोगिता बहुत कम थी। इकमो मशीन लाने के लिए सरकार ने सभी प्रकार का प्रयास शुरू कर दिया है।