कहीं चली न जाए CM की कुर्सी…ममता की टेंशन कम करने को आज फिर EC से मिलेगा TMC का डेलिगेशन

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कोलकाता; कहीं कोरोना के मामले न बढ़ने लगे और इसके चक्कर में मुख्यमंत्री की कुर्सी न गंवानी पड़े, इसे लेकर ममता बनर्जी की टेंशन बढ़ती ही जा रही है। जैसे-जैसे 6 महीने वाली मियाद नजदीक आती जा रही है, ममता बनर्जी की धड़कनें बढ़ती ही जा रही हैं। यही वजह है कि टीएमसी जल्द से जल्द राज्य में उपचुनाव चाहती है। तृणमूल कांग्रेस यानी टीएमसी का एक प्रतिनिधिमंडल राज्य में उपचुनाव कराने की मांग को लेकर आज यानी गुरुवार को निर्वाचन आयोग से मुलाकात करेगा। बता दें कि पश्चिम बंगाल में उपचुनाव कराने के लिए इससे पहले भी तृणमूल कांग्रेस के नेताओं का दल चुनाव आयोग की दौड़ लगा चुका है। राज्य में सात सीटों पर उपचुनाव होने हैं और माना जा रहा है कि ममता बनर्जी खुद भवानीपुर सीट से चुनाव लड़ेंगी। चुनाव आयोग से मिलने वाले टीएमसी प्रतिनिधिमंडल में सौगत रॉय, सुखेंदु शेखर रे, जवाहर सरकार, सजदा अहमद और मोहुआ मोइत्रा सहित पांच सांसद होंगे। प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयोग से राज्य में जल्द से जल्द उपचुनाव कराने का अनुरोध करेगा। वे चुनाव कराने पर पार्टियों के विचार जानने के लिए चुनाव आयोग के पहले के पत्र का लिखित जवाब भी देंगे।
ममता बनर्जी ने नंदीग्राम सीट से सहयोगी से प्रतिद्वंद्वी बने भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी के खिलाफ चुनाव लड़ा था, जिसमें उनकी मामूली अंतर से हार हुई थी। हार के बाद भी वह मुख्यमंत्री बनी थीं। ऐसे में उन्हें मुख्यमंत्री पद पर बने रहने के लिए उन्हें नियुक्ति के छह महीने (जो नवंबर है) के भीतर लोगों द्वारा चुने जाने की आवश्यकता है। बता दें कि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी ने 294 सदस्यीय पश्चिम बंगाल विधानसभा में 213 सीटें जीतकर भारी जीत दर्ज की। आक्रामक प्रचार के बावजूद भाजपा चुनाव हार गई लेकिन 77 सीटों के साथ दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। दरअसल, संविधान के आर्टिकल 164 (4) के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति विधायक या सांसद नहीं है और वह मंत्रिपद पर आसीन होता है तो उसके लिए छह महीने में विधानसभा या विधानपरिषद या संसद के दोनों सदनों में से किसी एक सदन का सदस्य बनना अनिवार्य है। अगर मंत्री ऐसा नहीं कर पाता है तो छह महीने बाद वह पद पर नहीं बना रह सकता। ममता बनर्जी को मुख्यमंत्री पद पर बने रहने के लिए चार नवंबर तक विधायक बनना होगा।