KND POLICE KA KARNAMA
 
जहां एक तरफ पूरा देश पुलवामा के आतंकी हमले में शहीद जवानों का बदला लेने की बात कर रहा है। हर किसी की आँख नम है, आज हर कोई रो रहा है पूरा देश सदमे में है। क्योंकि न जाने कितनों की गोद और कितनो की मांग उजड़ गई। कितने बच्चो के सिर से बाप का साया छिन गया। वहीं कानपुर देहात में ऐसी घटना सामने आई, जिसमें पुलिस एक फौजी को घसीटकर थाने ले जा रही है, जिसका वीडियो वायरल होने पर हडकंप मच गया। जिले के डेरापुर पुलिस का अमानवीय चेहरा सामने आया। कानपुर देहात जिले के डेरापुर नगर पंचायत के कृष्णा नगर मोहल्ले से सटे गांव पलिया की घटना है।
 दरअसल कानपुर देहात के डेरापुर थाना पुलिस कोतवाल राम बहादुर पाल के साथ  पलिया गांव पहुंचती है। मामला गांव के ही युवक धर्मेंद्र यादव का था, डेरापुर थाना पुलिस को किसी मामले में उसकी तलाश थी, लेकिन वह अपने घर में नहीं मिला। जिसके चलते पड़ोस में रहने वाले फौजी सर्वेश यादव से डेरापुर एसओ राम बहादुर पाल ने पूछा कि धर्मेंद्र को देखा है। वहीं सर्वेश ने अपनी फौजी वाली भाषा में बोलते हुए कहा कि मेरे को क्या मालूम, मैं थोड़ी ना उसके घर में रहता हूं। यह बात थानाध्यक्ष डेरापुर को नागवार गुजरी। इस पर वहां पर फौजी के साथ कहासुनी हो गई। बताया गया कि मामला बिगड़ते देख थानाध्यक्ष डेरापुर ने अतिरिक्त पुलिस फोर्स गांव बुला लिया और फौजी के साथ मारपीट करते हुए उसे जबरन अपनी गाड़ी में बिठाकर गांव से ले जाने लगे।
इस पूरी घटना को गांव के एक शख्स द्वारा वीडियो बनाकर वायरल कर दिया गया। वहीं अब सर्वेश यादव की बात करें तो इस समय वह हैदराबाद में इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट में तैनात है, जो कि एक माह की छुट्टी पर घर आया था। पूरे मामले में प्रत्यक्ष दर्शियों की बात की जाये तो लोगो ने इस घटना की दबी जुबान से निन्दा की है। लोगों में चर्चा रही कि पूरे देश में जहां एक ओर मातम का माहौल है। फौजियों के सम्मान में सभी लोग बढ़ चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। अभी तक शहीद जवानों की चिता ठंडी भी नहीं हुई थी कि जनपद की डेरापुर पुलिस का यह कारनामा पूरे पुलिस महकमे को आईना दिखाता नजर आ रहा है। जिसके चलते एसओ डेरापुर रामबहादुर पाल पर प्रश्न चिन्ह लगा हुआ है।
वही इस मामले में जिले के बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने जिले के पुलिस आलाधिकारियों से वार्ता कर दोषी कोतवाल और पुलिस कर्मियों के खिलाफ कार्यवाही की मांग की है। साथ ही वकीलों ने फौजी के साथ पुलिस की इस करतूत की निंदा की है।
वही बीजेपी विधायक प्रतिभा शुक्ला ने पुलिस का बचाव करते हुए कहा की यूपी पुलिस ऐसा नहीं कर सकती है।  सोशल मिडिया में अधिकांश वीडियो फेक होते है।  वीडियो की जाँच के बाद कार्यवाही की जाएगी
 वहीं इस मामले में पुलिस अधीक्षक राधेश्याम की माने तो  डेरापुर पुलिस एक प्रार्थना पत्र की जाँच करने पहुंची थी। वहीं फौजी सर्वेश से धर्मेन्द्र को पूछने की बात को लेकर बहस हो गई, जिसमें पुलिस फौजी सर्वेश को लेकर थाने आई और 151 में चालान कर 2 घंटे बाद ही थाने से ही छोड़ दिया गया। फौजी सर्वेश के साथ मारपीट के मामले की क्षेत्राधिकारी को जाँच करने के आदेश भी दिए गए है। जाँच रिपोर्ट आने के बाद वैधानिक कार्यवाही की जाएगी।
जहां एक और प्रशासनिक अधिकारी और सत्तापक्ष विधायक सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो की एक बात और झूठ होने की बात कह रहे हैं वहीं पर पत्रकार द्वारा फोन करके डेरापुर थाना अध्यक्ष एसएचओ से जब इस मामले की पूछताछ की तो उन्होंने खुद  सही है  और यह घटना  14 फरवरी की है  जिस दिन भारत राष्ट्र को  एक बड़ी हानि हुई थी सीआरपीएफ के 44 जवान शहीद हुए थे  तब जनपद कानपुर देहात की पुलिस एक फौजी के साथ  इस तरह की घटना को अंजाम दे रही थी किया कि यह घटना सत्य है और उस वीडियो में वह खुद इस वीडियो में दिख रहे हैं  फौजी  के साथ अभद्रता करते हुए जबरन खरीद कर अपनी गाड़ी में डाल रहे हैं