किसान सुशील काजल की मौत से गरमाने लगी है सियासत

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हरियाणा; 28 सितंबर को हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर का करनाल जिले के घरौंदा टोल प्लाज़ा पर विरोध कर रहे किसानों पर बार्बर पुलिस लाठी चार्ज से दर्जनों किसान घायल हो गए थे। इन्हीं किसानों मे से एक सुशील काजल की मौत देर रात में हो गई। बताया जा रहा है कि अंदरूनी चोट की वजह से सुशील की मौत हुई है। सुशील की मौत से जहां किसान आंदोलनकारियों के बीच रोष व्याप्त है, वहीं सरकार और प्रशासन इसकी लीपापोती करने में जुटी हुई है। पुलिस का दावा है कि सुशील काजल की मौत हृदय की गति रुकने से हुई है जबकि परिजनों और अन्य किसान सहयोगियों का कहना है कि पुलिस द्वारा की गई बर्बरता में सुशील मानव बुरी तरह से घायल हो गए थे और बाद में उन्होने दम तोड़ दिया,
ज्ञातव्य हो कि एसडीएम आयुष सिन्हा का एक विवादास्पद विडियो के वायरल होने और पुलिस की बर्बरता के बीच सीधा रिस्ता सामने आया है। सिन्हा द्वारा पुलिस अधिकारियों को यह निर्देश देते हुए विडियो में सुना जा सकता है कि “किसानों पर कोई हमदर्दी नहीं करना है, लट्ठ से उनकी खोपड़ी तोड़ देना, यह मेरा लिखित आदेश है’। हालांकि राज्य के उपख्यमंत्री ने इसपर संगयान लेते हुए कार्रवाई करने का आश्वासन तो दिया है, लेकिन किसी एसडीएम की सत्ता के प्रति स्वामीभक्ति और राजनीतिक संरक्षण का भी पोल खुल जाता है।
इधर संयुक्त किसान मोर्चा और तमाम किसान संगठनों ने किसान सुशील काजल की शहादत पर हरियाणा सरकार की तीव्र आलोचना की और पुलिस पर कत्ल का इलजाम लगाया और मुवावजे की मांग की। दोषी एसडीएम को गिरफ्तार करने और उसपर हत्या का मुकदमा चलाये जाने की मांग की,