कृषकों को बताए कीट प्रबंधन के उपाय

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विकासखण्ड घोड़ाडोंगरी के ग्राम रानीपुर एवं कुही के आसपास के खेतों में 05 सितंबर गुरूवार को उप संचालक कृषि श्री केपी भगत, पौध संरक्षण वैज्ञानिक श्री आरडी बारपेटे तथा अनुविभागीय अधिकारी कृषि श्री रामवीर सिंह राजपूत ने मक्का फसल का निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान पाया गया कि इन ग्रामों में मक्का फसल लगभग 65-70 दिन की हुई है। कुछ खेतों में फॉल आर्मी वर्म कीट का प्रकोप देखा गया। ये इल्लियां भुट्टों के अंदर प्रवेश कर हानि पहुंचा रही है।
उक्त कीट के अलावा मक्का फसल में फफूंद जन्य रोग शीथ ब्लाइट के संक्रमण की आरंभिक अवस्था में भी देखा गया है। इस रोग में मक्के का तना भुट्टा निकलने वाली पत्ती के पूर्णवृत्त से सूखना आरंभ होता है। सूखे हुए स्थान से सफेद रंग के फफूंद बीजाणु स्पष्ट देखे जा सकते हैं। यह रोग अधिक नमी एवं उच्च ताप रहने पर तेजी से फैलता है।
प्रबंधन के उपाय
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कृषकों को सलाह दी गई है कि मक्का फसल में फफूंद जन्य रोग ‘शीथ ब्लाइट’ के संक्रमण ग्रस्त पौधों को आरंभिक अवस्था में ही नष्ट करे। यूरिया उर्वरक का उपयोग इस अवस्था में बिल्कुल न करे। तत्पश्चात् फ्लूबेडामाइट 250 ग्राम या थायोडीकार्ब 250 ग्राम या राइनाक्सीपायर 125 मिली दवाई को 450 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टर छिडक़ाव करे।
‘शीथ ब्लाइट’ के संक्रमण ग्रस्त पौधों के प्रबंधन हेतु कीटनाशक के साथ ताम्रयुक्त कवकनाशी (कॉपर आक्सीफ्लोराइड) 750 ग्राम प्रति हेक्टेयर का छिडक़ाव करे।
अधिक जानकारी के लिए कृषक स्थानीय कृषि अधिकारी या कृषि वैज्ञानिक से संपर्क कर सकते हैं।