केंद्र एवं राज्य सरकार की गलत नीतियों के कारण भाकपा माले लिबरेशन किया धरना प्रदर्शन

0
54

भभुआ( कैमूर )– संविधान दिवस है इसी दिन अगले साल 26 नवंबर 2020 को किसानो ने दिल्ली चलो का नारा दिया था जिसका एक साल पूरा हो गया । ऐतिहासिक
किसान आन्दोलन एक साल पूरा कर लिया आन्दोलन के दबाव मे प्रधानमंत्री मोदी को किसान बिरोधी तीनो कृषि कानून वापस लेना पड़ा है एक साल के किसान आन्दोलन मे 683 किसानो ने अपने जान की आहूति दी लेकिन प्रधान मंत्री मोदी ने संवेदना तक भी व्यक्त नही किया । किसान आन्दोलन के और भी मांग बाकी है जिसपर सरकार बात नही कर रही है । जिसके लिए संयुक्त किसान मोर्चा ने शहीद किसानो के परिवार के लिए मुआवजा और पुनर्वास की मांग की है सभी कृषि उत्पादो पर एम एस पी का कानून बनाने, बिजली संशोधन बिधेयक वापस लेने किसानो को वायु प्रदूषण कानून से मुक्त करने हजारो किसानो के खिलाफ किये गये मुकदमा वापस लेने । केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी को बर्खास्त कर गिरफ्तार करने एम एस पी के तहत किसान की धान की खरीद की गराटी करने यूरिया खाद की कालाबाजारी पर रोक लगाने तथा रवी फसल की बुआई के लिए किसानो को खाद की बयवसथा करने । बिजली बिल दो हजार बीस वापस लेने । किसान बिरोधी तीनो कृषि कानून संसद मे रद्द करने की ।
तथा कैमूर जिला मे समर्थन मूल्य पर किसानो के धान की फसल खरीद के लिए अविलम्ब दुकान खोलने की गारंटी करने की मांग की गई ।भाकपा माले कैमूर जिला कार्यालय से अखिल भारतीय किसान महासभा और भाकपा माले जिला कमेटी कैमूर के द्वारा प्रतिरोध मार्च निकाला गया जो कि पुराना बाजार चौक से होते पूरे बाजार मे भ्रमण किया गया तथा एकता चौक पर सभा किया गया । मार्च मे भाकपा माले कैमूर जिला कमेटी के सचिव कामरेड विजय यादव, अखिल भारतीय किसान महासभा के जिला अध्यक्ष कामरेड बबन सिंह, जिला कार्यालय सचिव मोरधवज सिंह, सिगासन राम ,महेंद्र सिंह, महेश, पिंटू राम , अफसार खान, मेराज आलम, सियाराम, सतवंती देवी, शकुंतला देवी, बसंती देवी ,लुटावन प्रसाद, भूपेंद्र लाल, ब्रह्मा सिंह यादव, बजरंगी बिन्द आदि नेताओ ने भाग लिया ।