कैमूर के कुछ प्राइवेट स्कूलों ऊंची और सुंदर बिल्डिंग दिखाकर लेते हैं मोटी रकम शिक्षा कुछ नहीं

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(कैमूर ब्यूरो चीफ )आरएन सिंह
कैमूर जिला के कई ऐसे विद्यालय जो भव्य भवन और अंदर से भी शांत बताबरण और अनुशासित दिख रहा था। वहां के शिक्षक ने कहा कक्षा 6 में जिला का अंग्रेजी distrik ब्लैक बोर्ड पर लिखा था ,जबकि इसका सही स्पेलिंग district है उसी ब्लैक बोर्ड पर पुलिस का स्पेलिंग pulish लिखा है जो पूरी तरह से गलत है गरीब या अमीर शिक्षित या अशिक्षित सभी अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूल में भेजते हैं यह सोच कर कि वहां सरकारी विद्यालयों से बेहतर  कल्चर और शिक्षा मिलता है l जो बच्चे के भविष्य को संवारने और माता पिता के सपनों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाता है lइसी खातिर अपनी मेहनत की कमाई को अपनी इच्छाओं को मारकर बच्चे की पढ़ाई की फीस पर खर्च करते हैं lसभी अभिभावक या माता-पिता सी बी एस ई बोड  लिखा स्कूल और अच्छी बिल्डिंग देखकर यही समझते हैंl कि इसमें  अच्छी पढ़ाई होती है lआज के दिनों में कैमूर जिला में कई विद्यालय सीबीएसई बोर्ड के नियमानुसार अपनी व्यवस्था के साथ स्थापित हैl
लेकिन हकीकत कुछ और है कैमूर जिला के अच्छे विद्यालयों जिनकी व्यवस्था बाहर से अच्छी दिखी और अंदर का भी व्यवस्था सब कुछ ठीक दिखा। लेकिन जब शिक्षा की गुणवत्ता के लिए कक्षा में जाकर जांच किया गया तो पता चला कि कई विद्यालय के शिक्षक बच्चे को गलत पढ़ ही रहे हैं।
और ब्लैक बोर्ड पर गलत लिख कर बच्चे को होमवर्क भी दे रहे हैं ।बच्चे वैसा ही लिख रहे हैं जैसा कि शिक्षक ने ब्लैक बोर्ड पर लिखा है। एक विद्यालय जो काफी भव्य और अंदर से भी शांत वातावरण और अनुशासित दिख रहा था। वहां के शिक्षक ने कक्षा 6 में जिला का अंग्रेजी distrik ब्लैक बोर्ड पर लिखा था lजबकि इसका सही स्पेलिंग district है lउसी ब्लैक बोर्ड पर पुलिस का स्पेलिंग pulish लिखा हैl जो पूरी तरह से गलत है लेकिन बच्चों ने भी वही लिखा। आइसक्रीम का अंग्रेजी स्पेलिंग पूरी तरह से गलत बच्चे की कापी पर लिखा है जिसे शिक्षक सही का निशान लगाते हैं और अपना हस्ताक्षर भी बना देते हैं handस्पेलिंग बच्चा hanb लिखा है ।
उसे भी शिक्षक सही का निशान लगा कर बच्चे की कॉपी पर हस्ताक्षर बना देते हैं। जबकि उसे गलत बताकर वहां बच्चे को सुधारने का काम करना चाहिए लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
जिन विद्यालयों का निरीक्षण किया गया सभी बाहर से अच्छे और हाई-फाई दिखते हैं लेकिन हकीकत यही है कि उनके शिक्षक हमारे बच्चों की भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं क्या हर बाप या मां अपने बच्चे को पढ़ाने की क्षमता रखते हैं। यदि नहीं तो क्या उनके बच्चे की दुनिया अंधेरी कोठरी में रखने वाला बनाएंगे। विद्यालय और  पैसा भी लेंगे ,।ऐसे विद्यालयों पर अंकुश लगाना चाहिए या नहीं ,प्रशासन को और सरकार को प्राइवेट विद्यालयों की गुणवत्ता पूर्वक शिक्षा पर भी निगाह रखनी चाहिए या नहीं।क्योंकि वहां पर सिर्फ गैरों के बच्चे ही नही बुद्धिजीवियों, अधिकारी और नेता के भी‌‍ बच्चे पढ़ते हैं।
इससे गंभीरता से नहीं लिया गया तो दौलत लुटा कर भी हम अपने बच्चों की पूरी दुनिया ही बर्बाद कर देंगे। समय रहते हमने इस पर ध्यान नहीं दिया तो हमारे ही आंखों के सामने हमारी पीढ़ी इंसान की जगह में हैवान की जिंदगी गुजारे गी।
इस लेख का उद्देश्य किसी विशेष विद्यालय का नाम लेकर उसे बदनाम करना नहीं इसका एकमात्र लक्ष्य
बच्चों की पढ़ाई के प्रति विद्यालय संचालक को सचेत और सतर्क करना है