-डबल मर्डर:नौकर मस्तराम समेत दो आरोपी गिरफ्तार

एक महिने पहले बना ली थी वारदात की योजना, हत्या के बाद संवेदना जताने भी पहुंचा था आरोपी

-पहले दुकान की रैकी की, ३७ लाख रुपए और जेवर लूटे थे

-जेवर बरामद, और बरामदगी के प्रयास जारी

नगर प्रतिनिधि

कोटा । भीमगंजमंडी थाना इलाके में गुरुवार रात को मां बेटी की हत्या कर लूट की वारदात का पर्दाफाश करते हुए पुलिस ने राजेन्द्र के नौकर समेत दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। लूट की वारदात के लिए हत्या की दोनों आरोपियों ने पंद्रह किलो सोने व चांदी के जेवर व ३७ लाख रुपए की नगदी की लूट की थी। पुलिस दोनों आरोपियों से पूछताछ में जुटी हुई है। आईजी बिपिन कुमार पाण्डेय ने बताया कि दोनों आरोपी तीरथ गांव के रहने वाले है। गौरतलब है कि जैन मंदिर के सामने रहने वाले चांदमल विजयवर्गीय के घर में घुसकर ३१ जनवरी को बदमाशों ने उनकी बहू गायत्री और पौत्री पलक की सरिये से हमला कर हत्या कर दी थी। इसके बाद बदमाशेां ने लूट की वारदात को अंजाम दिया था। वारदात के समय चांदमल मंदिर गए हुए थे और उनका बेटा सर्राफा व्यवसायी राजेन्द्र दुकान पर थे। घर से जेवरात व 37 लाख रुपए लूटे गए थे। मामले में पुलिस ने जांच शुरु कर दी। अलग अलग टीमों का गठन किया। मुखबिरों को सक्रिय किया गया। इसी दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि तीरथ निवासी मस्तराम राजेन्द्र के यहां काम करता था और डेढ़ साल से उसका संपर्क नही है। लेकिन अचानक ही उसके पास काफी रुपए आए हैं और वह उन रुपयों से मंहगे सामान खरीद रहा है। इस पर पुलिस ने मस्तराम के बारे में जानकारी जुटाई। संदिग्ध हरकतें लगने के बाद पुलिस टीम ने रविवार देर रात उसे तीरथ से हिरासत में लिया और थाने लाकर पूछताछ की। जिसमें उसने वारदात को अंजाम देना कबूल कर लिया। पूछताछ में आरोपी ने अपने ही गांव के लोकेश मीणा के साथ वारदात को अंजाम देना बताया। जिसके बाद पुलिस ने लोकेश को भी पकड़ा। दोनों से पूछताछ के बाद सोमवार सुबह गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपियेा को रिमांड पर लेकर पुलिस पूछताछ में जुटी है।

ढ़ाई महिने किया काम और लूट की रच दी साजिश

आईजी बिपिन कुमार पाण्डेय के अनुसार पूछताछ में सामने आया है कि आरोपी मस्तराम करीब डेढ़ साल पहले ज्वैलर राजेन्द्र विजय की स्टेशन रोड स्थित दुकान पर चौकीदार का काम करता था। उसने ढ़ाई महिने तक दुकान पर काम किया। इस दौरान उसका राजेन्द्र के घर भी आना जाना था। ऐसे में उसे इस बात की जानकारी थी कि राजेन्द्र दुकान पर कब जाता है और कब आता है। चांदमल मंदिर कब जाता है। सिक्योरिटी के लिए कैमरे कहां लगाए हुए है। सबसे खास बात कि वह यह जानता था कि घर में बड़ी मात्रा में रुपए और ज्वेलरी कहां रखी जाती है। उसे यह भी मालूम था कि आमतौर पर अलमारी का लॉक नही लगाया जाता है। ऐसे में उसने एक महिने पहले वारदात की योजना बनाई। इसके लिए उसने अपने गांव में ही पड़ोस में रहने वाले लोकेश को अपने साथ मिलाया।

पहले दुकान की रैकी की फिर पहुंचे घर

पुलिस ने बताया कि मस्तराम और उसका साथी लोकेश अपने गांव से ३१ जनवरी की शाम को सरिये लेकर कोटा पहुंच गए। सबसे पहले दोनों राजेन्द्र की दुकान पर पहुंचे। जहां राजेन्द्र बैठा नजर आया। इसके बाद दोनों राजेन्द्र के मकान के पास चले गए और चांदमल के

मंदिर जाने का इंतजार करने लगे। जैसे ही ७.४५ बजे चांदमल मंदिर के लिए निकला,दोनों आरोपी चांदमल के मकान में पहुंचे। उन्होंनें गायत्री को देखकर पूछा कि राजेन्द्र कहां है। इस पर जैसे ही उसने गायत्री ने दुकान पर होने की बात कही आरोपी मस्तराम ने सरिये से उसके सिर पर हमला कर दिया। चीख सुनकर गायत्री की बेटी पलक पहुंची तो उस पर भी हमला कर दोनों की हत्या कर दी। दोनों की लाश को ड्राईंग रूम में घसीट कर पटक दिया। इसके बाद आरोपियों ने घर की तिजोरी से करीब 37 लाख रुपए व जेवरात लूट लिए।

रविवार को संवेदना व्यक्त करने पहुंचा

पुलिस ने बताया कि आरोपी को हत्या के बाद भी यह लग रहा था कि उस पर किसी का शक नही जाएगा। राजेन्द्र और उसके परिवार ने भी आरोपी मस्तराम पर किसी तरह का कोई शक नही जताया। रविवार को वह राजेन्द्र के घर सांत्वना देने के लिए पहुंच गया। इस दौरान उसने रोने की नौटंकी भी की।