जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक

कोटा । जिला कलेक्टर मुक्तानन्द अग्रवाल ने टैगोर हॉल में जिला स्वास्थ्य समिति की मासिक समीक्षा बैठक लेकर विभागीय कार्यक्रमों के प्रगति की बिन्दुवार समीक्षा की। उन्होने मौसमी बीमारियों को लेकर डिप्टी सीएमएचओ डॉ रामजीलाल वर्मा को स्वाइन फ्लू से होने वाली मौतों की ऑडिट व एरियावाईज पोजिटिव पाए गए कैसेज की तुलनात्मक रिपोर्ट व रेलवे, बस स्टेण्ड पर स्क्रीनिंग की रिपोर्ट प्रतिदिन व्यक्तिशः उन्हे प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। जिला कलेक्टर ने विभागीय अधिकारियों से कहा कि वे स्वाइन फ्लू व डेंगू रोकथाम और उसकी रिपार्टिंग में गंभीरता दिखाएं। उन्होने बीसीएमओ एवं चिकित्सा अधिकारी प्रभारियों से कहा कि वे उप स्वास्थ्य केंद्र स्तर तक स्वाइन फ्लू के बेनर व पोस्टर्स प्रदर्शित कराना सुनिश्चत करें। बैठक में सीएमएचओ डॉ बीएस तंवर समेत अन्य जिला स्तरीय विभागीय अधिकारी, बीसीएमओ, सीएचसी प्रभारी आदि मौजूद थे। जिला कलेक्टर ने पीएचसी वाईज डिलेवरी प्रगति की समीक्षा के दौरान जिले के 19 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर वर्ष 2018-19 में अब तक शून्य प्रसव के लिए संबधित ब्लॉक के बीसीएमओ से जवाब तलब कर इन केंद्रो पर भी प्रसव सुविधा के प्रयास करने करने के निर्देश दिए। साथ ही इस वित्तीय वर्ष के दौरान ही पीएचसी लुहावद, खेड़ारसूलपुर और दीगोद मंे 3 तथा मानसगांव और चारचौमा में केवल दो ही डिलेवरी रिपोर्ट होने पर वहां प्रसव भार बढ़ाने के लिए संबधित एएनएम को टारगेट देने के निर्देश संबधित बीसीएमओ को दिए। जिला कलेक्टर ने आगामी दिनों में होने वाली 104/108 एम्बूलैंस चालकों के हड़ताल की संभावना के मद्येनजर विभागीय वाहन चालकों एवं प्राइवेट वाहन चालकों को हायर कर वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चत करने के निर्देश दिए। इसके अतिरिक्त जिला कलेक्टर ने एनसीडी, ड्रग डिस्ट्रीब्यूशन, आरबीएसके, वेलनेस सेंटर, नियमित टीकाकरण, ऑजस, परिवार कल्याण कार्यक्रम की भी प्रगति की समीक्षा की। इस दौरान ही डीटीएफआई की भी बैठक हुई जिसमें आरसीएचओ डॉ एमके त्रिपाठी ने बताया कि जिले में 10 मार्च को पल्स पोलियो अभियान आयोजित किया जाएगा जिसमें 5 साल तक के बच्चों को पालियो बूथों पर पोलियो रोधी खुराक पिलाई जाएगी। इस संबध मंे चिकित्सा अधिकारियों और शिक्षा विभाग व महिला एवं बाल विकास विभाग को आवश्यक तैयारियां सुनश्चित करने के निर्देश दिए गए। बैठक में आरसीएचओ ने प्रसव सखी कॉन्सेप्ट के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि प्रसव के दौरान प्रसूता को भावनात्मक संबल प्रदान करने के उद्धेश्य से सभी मेड़िकल कॉलेज अस्पताल तथा जिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों तथा उप स्वास्थ्य केन्द्रांे के लैबर रुम मंे प्रसव सखी के रूप में प्रसूता की कोई महिला परिजन या संबधी साथ रह सकेगी जो प्रसव पीडा आरम्भ से लेकर प्रसव पूर्ण होने तक प्रसव सखी के तौर पर सहयोग करेगी। उन्होने बताया कि प्रसव सखी की उपस्थिति मंे प्रसूता को सुरक्षा का अहसास तथा हाथांे से छुने सहलाने से प्रसूता को भावनात्मक सहारा, खाने पीने मंे सहयोग, प्रसव के बाद तुरन्त पश्चात स्तनपान आदि जिससे माता एवं शिशु को लाभ होगा।