कोटा

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नगर निगम ने 2 अवैध व्यवसायिक भवनों को किया सीज

आवासीय निर्माण की स्वीकृति थी हो रहा था व्यावसायिक निर्माण

कोटा । नगर निगम प्रशासन द्वारा सोमवार को रामपुरा लिंक रोड क्षेत्र मे व रामपुरा गांधी चौक मे निर्माणाधीन दो अवैध व्यवसायिक भवनों की सीजिंग की कार्यवाही उपायुक्त प्रेम शंकर शर्मा की अगुवाई में अधिशाषी अभियंता प्रशांत भारद्वाज, सहायक अभियंता अजय बब्बर, मुख्य स्वास्थ्य निरीक्षक हरीश घोष व निर्माण विभाग के अभियंताओं तथा अतिक्रमण निरोधक अनुभाग के कर्मचारियों की टीम द्वारा की गई।

उपायुक्त प्रेम शंकर शर्मा ने बताया कि इन दोनो अवैध निर्माणों के संबंध मे निगम मे शिकायत प्राप्त हुई थीं। उन्होने बताया कि निगम की टीम द्वारा सर्वप्रथम रामपुरा लिंक रोड पर सत्यम् अग्रवाल व हुसैन अली रंग वाला द्वारा किये जा रहे अवैध निर्माण को सीज किया गया। इन दोनो पार्टनरों को निगम से आवासीय निर्माण की स्वीकृति प्राप्त थी, किन्तु इनके द्वारा दुकाने बनाकर अवैध व्यवसायिक निर्माण किया जा रहा था। 4 व्यवसायिक दुकाने निर्मित की जा चुकी थीं, जिनके दरवाजे लगना शेष थें। निगम टीम द्वारा सोमवार को मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्य रूकवा दिया गया और निर्माण स्थल के गली के मोड पर दरवाजा लगाकर व सीजिंग नोटिस चस्पा कर परिसर को सीज कर दिया गया।उपायुक्त शर्मा ने बताया कि निगम की टीम द्वारा सीजिंग की दूसरी कार्यवाही रामपुरा गांधी चौक में की गई। यहां पर राजमणि देवी पत्नि कैलाश वासवानी द्वारा नगर निगम से स्वीकृति लिये बिना ही एक व्यवसायिक परिसर का निर्माण किया जा रहा था। तकरीबन 7 व्यवसायिक दुकानें निर्मित की जा चुकी थी और निर्माण कार्य जारी था। निगम दल के सदस्यों द्वारा सोमवार को मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्य रूकवा दिया गया और परिसर के द्वार को बन्द कर ताला लगा दिया गया तथा दरवाजे पर सीजिंग नोटिस लगाकर अवैध व्यवसायिक परिसर को सीज कर दिया गया।

जेईई-एडवांस्ड विदेशी विद्यार्थियों के लिए आवेदन प्रारंभ

5 जून तक अपलोड कर सकेंगे ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र

कोटा. देश की सबसे प्रतिष्ठित इंजिनियरिंग प्रवेश परीक्षा जेईई एडवान्स्ड जिसके माध्यम से देश की 23 आईआईटी की लगभग 11 हजार 279  सीटों पर प्रवेश मिलता है, यह परीक्षा पूर्णतः कम्प्यूटर बेस्ड 27 मई को देश के 155 परीक्षा शहरों में सुबह 9 से 12 एवं दोपहर 2 से 5 के मध्य संपन्न होगी। जनवरी व अप्रेल जेईई मेन परीक्षाओं द्वारा चुने हुए शीर्ष 2 लाख 45 हजार विद्यार्थी जो जेईई एडवान्स्ड परीक्षा देने के लिए पात्र घोषित किये जायेंगे जिसमें सामान्य श्रेणी के 1,13,925, सामान्य ईडब्ल्यूएस श्रेणी के 9800, ओबीसी के 66,150,एससी के 36,750 एवं एसटी के18,375 विद्यार्थी शामिल हैं। पिछले वर्ष की भांति इस वर्ष भी विदेशो में जेईई एडवान्स्ड परीक्षा के केन्द्र बनाये गये हैं जिनमें इथोपिया, नेपाल, सिंगापुर, बांग्लादेश, दुबई, श्रीलंका शामिल हैं। विदेशी नागरिकता वाले विद्यार्थियों के लिए आॅनलाइन आवेदन 22 अप्रेल से प्रारंभ हो चुकी है, आवेदन करने की अंतिम तिथि 9 मई तक है। इन विद्यार्थियों को जेईई-एडवांस्ड परीक्षा देने के लिए जेईई-मेन परीक्षा देने की आवश्यकता नहीं है। ये विद्यार्थी सीधे ही जेईई-एडवांस्ड परीक्षा में शामिल हो सकते हैं। इन विद्यार्थियों के लिए जेईई-एडवांस्ड परीक्षा का आवेदन शुल्क सार्क देशों के लिए 75 डाॅलर तथा अन्य देशों के लिए 150 डाॅलर रखा गया है। जेईई-मेन के आधार पर जेईई-एडवांस्ड देने की पात्रता रखने वाले विद्यार्थियों के लिए ऑनलाईन रजिस्ट्रेशन 3 से 9 मई के मध्य करवाया जायेगा। इन विद्यार्थियों के लिए आवेदन शुल्क सामान्य व ओबीसी श्रेणी के छात्रों के लिए 2600 रूपये, एससी, एसटी, शारीरिक विकलांग छात्रों एवं सभी वर्गों की छात्राओं के लिए 1300ध्- रूपये रखा गया है। प्रवेश पत्र 20  मई को जारी कर दिये जायेंगे। जेईई एडवान्स्ड का परीक्षा परिणाम 14  जून को घोषित किया जायेगा।

एलेन के केरियर काउंसलिंग एक्सपर्ट अमित आहुजा ने बताया कि इडब्ल्यूएस कैटेगिरी के विद्यार्थियों को चुनाव के चलते प्रमाण पत्र बनाने में आ रही परेशानियों को देखते हुए जेईई एडवांस्ड आवेदन के दौरान संबंधित प्रमाण पत्र अपलोड करवाने की तिथि अब 5 जून तक कर दी गई है। विद्यार्थी वेबसाइट पर उपलब्ध ईडब्ल्यूएस कैटेगिरी से संबंधित डिक्लेरेशन को भरकर अपलोड कर सकता है। यह प्रमाण पत्र 1 अप्रेल के बाद का होना अनिवार्य है। इससे पूर्व ओबीसी के विद्यार्थियों को भी आवेदन के दौरान सर्टिफिकेट उपलब्ध ना होने पर 5 जून तक दस्तावेज अपलोड करने का समय दिया गया है। पीडब्ल्यूडी के विद्यार्थियों के लिए भी स्क्राइब एवं परीक्षा समय में एक घंटा अतिरिक्त देने के लिए दिशा निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

लू-तापघात के रोगियों के उपचार की व्यवस्था के दिये निर्देश

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ0 जी0एल0मीणा ने अधिक गर्मी के कारण लू तापघात की संभावना को मध्य नजर रखते हुए जन साधारण को लू तापघात से बचाव एवं उपचार हेतु जानकारी प्रसारित करने एवं लू तापघात के रोगियों को समुचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक व्यवस्था करने के निर्देश दियें है। डॉ0 मीणा ने कहा की लू तापघात से बचने के लिए जनजाग्रति आवश्यक है। उन्होंने चिकित्सा संस्थानों के वार्ड में कुछ बेड लू-तापघात के रोगियों के उपचार हेतु आरक्षित रखने, वार्डो के कूलर व पंखों को ठीक रखने , मरीज तथा परिजनों के लिए शुद्ध तथा ठंण्डे पेयजल की व्यवस्था रखने, संस्थान में रोगी के उपचार हेतु आपात कालीन किट में ओआरएस एवं आवश्यक दवांईया तैयार रखने। चिकित्सक एवं नर्सिग स्टॉफ को इस दौरान डुयुटी के प्रति सर्तक रहने के लिए निर्देश दिये।

उपमुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ0 अविनाश शर्मा ने बताया कि लू-तापघात के लक्षणों में सिर का भारीपन व सिरदर्द, अधिक प्यास लगना और थकावट रहना, जी मचलाना, सिर चकराना व शरीर का तापमान अत्याधिक 105 एफ या अधिक हो जाना व पसीना आना बंद होना, मुह का लाल हो जाना व त्वचा का सूूखा होना, बेहोशी जैसी स्थिति का होना आदि शामिल है। उन्होंने बताया कि लू-तापघात से कुपोषित बच्चें, वृद्ध, गर्भवती महिलाएं, श्रमिक आदि शीघ्र प्रभावित हो सकते है। अतः इन्हें प्रायः 10 बजे से सायः 6 बजे तक तेज गर्मी से बचाने हेतु छायादार ठण्डे स्थान पर रखना उचित है। तेज धूप में निकलना आवश्यक हो तो ताजा भोजन करके उचित मात्रा में ठण्डे जल का सेवन करके बाहर निकलना चाहिएं। थोडे अन्तराल के पश्चात ठण्डे पानी, शीतल पेय, छाछ, ताजे फलों को रस का सेवन करना चाहिएं। तेज धूप में छाते अथवा कपडे से सिर और बदन को ढककर बाहर निकलना चाहिएं। डॉ0 शर्मा ने बताया कि लू-तापघात से प्रभावित रोगी का तुरंत छायादार ठण्डे स्थान पर लेटाया जाएं एवं रोगी की त्वचा को गीले कपडे से पोछा जाएं। साथ ही रोगी के कपडों को ढीेला कर दिया जाएं। रोगी को ठण्डे पेय पदार्थ दिये जाएं एवं रोगी को तत्काल नजदीक के चिकित्सा संस्थान में ले जाया जाएं।