कोटा

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15 किलोमीटर सफर में लग रहे दो घंटे

रामगढ़ क्षेत्र की सड़कों की हालत खस्ता

किशनगंज। पर्यटन एवं धार्मिक आस्था से महत्वपूर्ण रामगढ़ की ओर जाने वाले सभी सड़क मार्ग क्षतिग्रस्त हो रहे हैं। जिसके कारण यहां आने वाले श्रद्धालुओं को भारी परेशानी उठानी पड़ रही हंै। रामपुरिया तिराहे से गरड़ा जाने वाली सड़क की भी हालत बहुत खराब हैं। तुलसीराम बसवाल ने बताया कीरामगढ़ को बारां से जोडऩे वाली मुख्य सड़क सहित मध्यप्रदेश व मांगरोल कस्बे को जोडऩे वाली सभी सड़कों की हालत खराब हो गई हैं। रामपुरिया तिराहे से गरड़ा तक पन्द्रह किलोमीटर की सड़क की स्थिति भी बहुत ही विकट होनें के कारण वाहन चालकों को इस दूरी को तय करने में दो घंटे लग रहे हैं। वहीं वाहनों के रखरखाव एवं ईंधन का अतिरिक्त भार झेलना पड़ रहा हंै। रामगढ़ कस्बे को श्योपुर, मध्य प्रदेश से जोडऩे वाली सड़क पर काला पट्टा तक और अर्जुनपुरा-मांगरोल सड़क पर पार्वती नदी तक पूरी सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे हो रहे हैं।

रामगढ़ को जोडऩे वाली सभी सड़कों को लेकर पूर्व में कई बार जिला प्रशासन व विभागीय अधिकारियों को अवगत करवाया जा चुका हैं। इन सड़कों के निर्माण को स्वीकृत हुए एक वर्ष से अधिक का समय हो गया हैं और वर्कऑर्डर भी जारी कर दिए गए हैं, परन्तु इन पर कार्य अभी तक शुरु नहीं हुआ हैं।

हाइवे निर्माण के चलते मार्ग को वन-वे बना डाला

कोटा। जयपुर-जबलपुर नेशनल हाईवे 12 पर जारी सड़क निर्माण में कोटा से झालावाड़ के मध्य फोरलेन निर्माण में मनमानी व कई स्थानों पर वन-वे जैसे हालात होने के कारण लोगों को अकाल मौत का ग्रास बनना पड़ रहा है। जो फोरलेन निर्माण कार्य करवाया जा रहा है उसके तहत आरटीओ कार्यालय से जगपुरा तक एक तरफ से मार्ग को जगह-जगह से बन्द कर रखा है व दोनों तरफ के वाहनों की आवाजाही के लिए एक तरफ का मार्ग ही खुला हुआ है। इस मार्ग पर हादसों की आशंका बनी रहती है।

आरटीओ कार्यालय से जगपुरा के आगे केवलनगर तक फोरलेन पर आने व जाने के लिए केवल एक ही साईड को खुला छोड़ा हुआ है। जगपुरा गांव के उपर से निकल रहे हाइवे पर तो वर्तमान समय में काम चलने के कारण गांव से मुख्य सड़क की और आने वाले रास्ते पर मिट्टी डाल मार्ग को अवरूद्ध कर दिया गया है। मार्ग अवरूद्ध होने के बाद भी दुपहिया वाहन चालक वहीं से रास्ता बना हाइवे पर चढ़ाई करते है व भारी वाहनों के बीच से जान जोखिम में डाल दूसरी और पहुंचते हैं। आगे की और दोनों साइड़े तैयार हो चुकी है लेकिन रोशनी के लिए पोल लगाए जाने के कारण यहां भी मिट्टी के टीले बना मार्ग अवरूद्ध किया हुआ है जिससे आने जाने वाले वाहन चालकों को एक साइड में ही चलना पड़ रहा है।

किसानों के क्लेम आवेदन पत्रों की प्रगति की समीक्षा

कलक्टर ने कृषि अधिकारियों एवं बैंकर्स की बैठक

कोटा। जिला कलक्टर मुक्तानन्द अग्रवाल ने कृषि विभाग, राजस्व विभाग एवं बैंकर्स की बैठक लेकर लेकर बेमौसम वर्षा से प्रभावित किसानों के क्लेम आवेदन पत्रों की प्रगति की समीक्षा की।

जिला कलक्टर ने कहा कि बेमौसम वर्षा से प्रभावित किसानों के क्लेम आवेदनों को समय पर प्राप्त कर आवश्यक पूर्ति के साथ बीमा कम्पनी को प्रेषित किये जायें। इसमें सभी विभाग आपसी समन्वय एवं संवेदनशीलता के साथ कार्य कर किसानों को राहत प्रदान करने में स्वप्रेरित होकर कार्य करें। उन्होंने बैठक के दौरान फसल बीमा कम्पनी के प्रतिनिधि शुभम पटियाल को निर्देशित किया कि आगामी दिवसों में मौसम खराब होने की सम्भावना को मध्यनजर व किसानों की स्थिति को देखते हुये सर्वेयर की संख्या बढावे तथा सर्वे का कार्य तीव्रता के साथ पूर्ण कर आवेदित किसानों को अवलिम्ब लाभांश दिलवायें।

उन्होंने बैंक के अधिकारियों को निर्देशित किया कि बैंकों में जितने भी क्लेम फार्म आये हों उनका तत्काल सत्यापन करवाकर बीमा कम्पनी को अग्रेसित करें। उप निदेशक कृषि (विस्तार) कोटा को संबंधित अधिकारियों से समन्वय स्थापित कर प्रभावित किसानों को समय पर लाभान्वित किया जाये।

जिले में आये 633 आवेदन

उपनिदेशक कृषि कैलाश चंद मीणा ने बताया कि तहसील कार्यालयों से प्राप्त जानकारी के अनुसार जिले में अब तक 633 किसानों द्वारा फसल खराबे के क्लेम पत्र प्रस्तुत किये हैं। जिनमें लाड़पुरा में 103, दीगोद में 215,़ कनवास में 151, पीपल्दा में 53, रामगंजमण्डी में 09, सांगोद में 102 क्लेम आवेदन पत्र प्राप्त हुए हैं। बैठक में एलडीएम केएस कुम्पावत सहित बैंकर्स व तहसीलदार उपस्थित रहे।

सब इन्सपेक्टर सुगना वर्मा की  जमानत अर्जी खारिज

कोटा। न्यायालय विशिष्ठ न्यायाधीश सेंशन न्यायालय भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के न्यायाधीश प्रमोद कुमार मलिक ने रिश्वत लेने की आरोपी जवाहर नगर थाने की सब इन्सपेक्टर सुगना वर्मा की जमानत का प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया।

प्रकरण के अनुसार परिवादी मुकेश अरोड़ा निवासी जवाहर नगर की शिकायत पर सब इन्सपेक्टर सुगना वर्मा को 30 हजार रूपए की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार कर लिया।

आरोपी सुगना वर्मा के अधिवक्ता ने न्यायालय में उसकी जमानत का प्रार्थना पत्र पेश किया। उसके अधिवक्ता ने जमानत के प्रार्थना पत्र में कहा कि उसे झूठा फंसाया गया हैं। मामला अनुसंधान की स्टेज में हैं। उसे जमानत दी जाए। लोक अभियोजक ने कहा कि आरोपियां के विरूद्ध गंभीर प्रकृति के अपराध का आरोप हैं। अभी प्रकरण अनुसंधान की स्टेज पर हैं। अत: अपराध की गंभीरता को देखते हुए आरोपिया की जमानत का प्रार्थना पत्र खारिज किया जाए।  न्यायालय ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद कहा कि अभियुक्ता की और से प्रस्तुत जमानत का प्रार्थना पत्र अन्तर्गत धारा 439 का स्वीकार किया जाना न्यायोचित नही पाया जाता है। अत: अभियुक्त का जमानत का प्रार्थना पत्र खारिज किया जाता हैं।

भविष्य निधि अधिकारियों के खिलाफ चालान पेश

विज्ञान नगर स्थित भविष्य निधि कार्यालय के तत्कालीन दो प्रवर्तन अधिकारियों के खिलाफ एसीबी बारां ने अनुसंधान पूर्ण होने पर न्यायालय विशिष्ठ न्यायाधीश सेंशन न्यायालय भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में चालान पेश कर दिया। दोनों आरोपियों को एसीबी ब्यूरों कोटा की टीम ने 25 हजार रूपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया था।  ब्यूरों की टीम ने परिवादी को 18 नवम्बर को 25 हजार रूपए देकर दोनों के पास भेजा। दोनों ने परिवादी से रिश्वत की राशि ले ली। इस पर ब्यूरों की टीम ने दोनों को रिश्वत की राशि लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। इस प्रकरण की जांच एसीबी बारां को सौपी गई। एसीबी बारां ने अनुसंधान पूर्ण होने के बाद मंगलवार को न्यायालय में दोनों के खिलाफ चालान पेश कर दिया।

थर्मल की बॉटम ऐश नही देने का मामला न्यायालय पहुंचा

कोटा । कोटा थर्मल प्रशासन की और से कुम्हार समाज को बॉटम एश नि:शुल्क नही देने का मामला स्थाई लोक अदालत में पहुंच गया हैं। न्यायालय ने जनहित याचिका को स्वीकार करते हुए थर्मल के मुख्य अभियंता समेत पांच अधिकारियों को नोटिस जारी कर 29 मई को जवाब पेश करने के लिए तलब किया हैं।

परिवादी हाडौती प्रजापति कुम्हार संघर्ष समिति मालवीय नगर बून्दी ने मुख्य अभियंता कोटा थर्मल पॉवर प्लांट सकतपुरा कोटा, जिला कलेक्टर, संभागीय आयुक्त कोटा, पुलिस अधीक्षक कोटा व थानाधिकारी कुन्हाड़ी के विरूद्ध एक याचिका पेश कर कहा हैं कि कुम्हार समाज के लोग अपना मिट्टी के बर्तन, खिलौने, ईटे आदि बनाने का व्यवसाय करते हैं और ईटे बनाने के लिए कोटा थर्मल पॉवर में से निकलने वाली बॉटम एश की भी आवश्यकता पड़ती हैं। ऐश उत्पादन होने के बाद रिजेक्ट के रूप मे निकलती हैं। जिसे थर्मल प्रशासन को डेस्ट्राय भी करना होता हैं।

ऐश का उपयोग सम्पूर्ण कुम्हार समाज काफी समय से करते चले आ रहे हैं। जिससे पूरे हाड़ौती संभाग का कुम्हार समाज रोजगार कर जीवन यापन कर रहे हैं। विधिक अनुसार उपरोक्त बॉटम ऐश को कुम्हार समाज जो कि ईट का उत्पादन करता हंै। उनके गंतव्य स्थान पर पहुंचाने की जिम्मेदारी थर्मल प्रशासन की बनती हैं।

याचिका में कहा गया कि लेकिन थर्मल प्रशासन के मुख्य अभियंता यहां पड़ी हुई बॉटम ऐश को अकर्मणयता के कारण तथा राजनीतिक दबाव के चलते अपने चहेते व्यक्तियों को लाभ पहुंचाने की गरज से ग्रीन ट्रिब्यूनल भोपाल तथा गजट नोटिफिकेशन तथा राज्य सरकार के निर्देशों के विपरित जाकर हाड़ौती के कुम्हार समाज के लोगों को बॉटम ऐश का उपयोग नही करने दिया जा रहा हैं। जबकि विधि का यह स्पष्ट प्रावधान है कि हाड़ौती के कुम्हार समाज जो तीन सौ किमी के दायरे में अपना ईट बनाने का व्यवसाय कर रहे हैं। वह बॉटम एश अपने ईट व्यवसाय के लिए मिट्टी के बर्तन व खिलौने बनाने कर सकते हैं। लेकिन जनवरी 2019 से थर्मल प्रशासन ने एश देने से मना कर दिया हैं।