कोलकाता। : बंगाल सरकार ने गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (जेएमएम) नेता बिमल गुरुंग के खिलाफ दर्ज मुकदमा वापस लेने का आदेश जारी कर दिया।

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कोलकाता। : बंगाल सरकार ने गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (जेएमएम) नेता बिमल गुरुंग के खिलाफ दर्ज मुकदमा वापस लेने का आदेश जारी कर दिया। यह आदेश शनिवार को राज्य सचिवालय नवान्न से दार्जिलिंग के पुलिस अधीक्षक को भेज दिया गया। पहले से ही प्रत्याशित था कि देशद्रोह, हत्या, अवैध हथियार व बम-गोली रखने के सौ से अधिक मामलों में तीन वर्षों तक फरार रहे बिमल गुरुंग ने यूं ही तृणमूल कांग्रेस से हाथ नहीं मिला है। 2017 में जब पहाड़ पर अलग राज्य की मांग को लेकर आंदोलन शुरू हुआ तो राज्य पुलिस ने बिमल गुरुंग और रोशन गिरि के खिलाफ एक के बाद एक मामला दर्ज किया। उसके खिलाफ हिंसा फैलाने और सरकारी संपत्ति को नष्ट करने सहित कई गैरकानूनी गतिविधिया निरोधी अधिनियम (यूएपीए) के तहत भी मामले दर्ज हैं।

पता चला है कि राज्य सरकार ने उन मामलों को वापस लेने का आदेश दिया है। हालांकि, सरकार गुरुंग के खिलाफ हत्या और देशद्रोह का मुकदमा वापस नहीं ले रही है। परंतु, यहां कहा जा रहा है कि जब तक वह भाजपा के समर्थन में थे तो पुलिस उसे गिरफ्तार करने के लिए तलाश रही थी, लेकिन जैसे भी पिछले वर्ष दुर्गापूजा के दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का समर्थन देने की बात कही उसके बाद से वह आराम से कोलकाता से लेकर दार्जिलिंग तक आना जाना कर रहे हैं। नवान्न ने दार्जिलिंग पुलिस से कानूनी तरीकों के जरिए गुरुंग के खिलाफ मुकदमा वापस लेने की प्रक्रिया शुरू करने को कहा है।

अधिवक्ताओं के मुताबिक सरकारी वकील को केस वापस लेने के लिए कोर्ट में अर्जी देनी होगी। जज जानना चाहेंगे कि सरकार केस क्यों वापस लेना चाहती है। यदि वह तर्क स्वीकार्य होगा तभी मुकदमा वापस लेने के लिए आवेदन स्वीकारा जाएगा। राज्य के पर्यटन मंत्री गौतम देब ने गुरुंग के खिलाफ मुकदमा वापस लेने के राज्य सरकार के फैसले पर कोई टिप्पणी नहीं की है। गुरुंग के सहयोगी रोशन गिरि का दावा है कि उन्हें इस बारे में कुछ नहीं पता है। भाजपा के प्रवक्ता शामिक भट्टाचार्य ने कहा कि यह नहीं पता है कि बिमल गुरुंग के साथ उनका क्या समझौता है। क्या ममता बनर्जी ने पहाड़ियों की तीन सीटों के लिए अलग राज्य का वादा तो नहीं कर दिया है?