कोलकाता पश्चिम बंगाल:- ममता को सता रहा ABVP की जीत का डर’और ABVP को सता रहा NOTA का डर

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कोलकाता पश्चिम बंगाल में 5 चरणों का मतदान हो चुका है, वहीं 22 अप्रैल को होने वाले छठे चरण की तैयारी भी पूरी हो गई है। इसबीच आरएसएस से जुड़ा छात्र संगठन एबीवीपी लोगों से एक खास तरह की अपील कर रहा है। हैरान करने वाली बात ये है कि ये अपील किसी प्रत्याशी या राजनीतिक दल को वोट करने या न करने को लेकर नहीं है।
पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में एबीवीपी जहां लोगों से 100 प्रतिशत मतदान की अपील कर रही है, वहीं परिषद के कार्यकर्ता मतदाताओं से यह भी अपील कर रहे हैं कि वे ‘NOTA’ का बटन न दबाएं।
कोलकाता विश्वविद्यालय के छात्रनेता और एबीवीपी के प्रदेश सहमंत्री शनि सिंह के मुताबिक, पश्चिम बंगाल में एबीवीपी 100% वोटिंग के लिए लोगों को जागरूक कर रही है। उन्होंने कहा, ‘इसके साथ ही हम लोगों से कह रहे हैं कि वो NOTA को वोट न दें। क्योंकि इससे लोगों का वोट बर्बाद होगा। अगर कहीं 70-80% वोटिंग होती है, और उसमें 20% भी NOTA को चला जाएगा तो 50-60% में से एक प्रत्याशी जीतेगा। मान लीजिए उसे 30 प्रतिशत भी वोट मिल रहा है तो किसी क्षेत्र में 30% वोट पाया हुआ प्रत्याशी वास्तविक प्रतिनिधि कैसे हो सकता है। इसीलिए एबीवीपी लोगों से 100% वोटिंग और नोटा को वोट न देने की अपील कर रही है, ताकि सभी वोट व्यावहारिक तौर पर वैध रहें और बेहतर व्यक्ति समाज का नेतृत्व कर सके।’
पश्चिम बंगाल में छात्रसंघ चुनाव को लेकर शनि ने कहा कि ममता बनर्जी की सरकार घबराती है, उसे डर है कि अगर पश्चिम बंगाल में छात्रसंघ चुनाव हुए तो एबीवीपी बड़े मार्जिन के साथ जीत जाएगी। इसी वजह से ममता बनर्जी ने सरकार आने के बाद राज्य में छात्रसंघ चुनाव पर रोक लगा दी। उन्होंने कहा, ‘ममता बनर्जी ने सरकार आने के बाद एक बार चुनाव कराया। दरअसल वो भी एक तरह से कैंपसों पर कब्जा करने का प्लान था। किसी तरह से टीएमसीपी ने जीत हासिल की और फिर वहीं से चुनाव पर रोक लगाकर कैंपसों पर कब्जा कर लिया।’
कॉलजों में चल रहे TMC के पार्टी ऑफिस: ABVP
शनि के मुताबिक, टीएमसीपी ने कैंपसों को नसेड़ियों का अड्डा बना दिया है। उन्होंने कहा, ‘टीएमसीपी के छात्रनेता और कॉलेजों के प्रिंसिपल ऑफिस मिलकर कैंपसों में टीएमसी का पार्टी ऑफिस चला रहे हैं।’ उन्होंने कहा कि बीते साल ममता बनर्जी ने युवा वोटर्स का रुख लेने के लिए प्रेसिडेंसी यूनिवर्सिटी और जाधवपुर यूनिवर्सिटी में दो चुनाव कराए, दोनों जगह एबीवीपी का प्रदर्शन काफी अच्छा रहा और टीएमसीपी को मुंह की खानी पड़ी। शनि के कहा कि कैंपसों में अब टीएमसी का झंडा उठाने वाला भी कोई नहीं बचा है।