कोलकाता, पश्चिम बंगाल में इस बार कोरोना महामारी के चलते दुर्गा पूजा की रौनक फीकी रहेगी लेकिन इस पर होने वाली सियासत के रंग पर कोई असर नहीं पड़ता दिख रहा

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कोलकाता, पश्चिम बंगाल में इस बार कोरोना महामारी के चलते दुर्गा पूजा की रौनक फीकी रहेगी लेकिन इस पर होने वाली सियासत के रंग पर कोई असर नहीं पड़ता दिख रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पश्चिम बंगाल की दुर्गा पूजा में शामिल होंगे। इसी के साथ बीजेपी राज्य में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए अभियान की शुरुआत करेगी। हर साल बंगाल की सियासत में दुर्गा पूजा का विशेष प्रभाव रहा है।
पीएम मोदी दुर्गा पूजा में होंगे शामिल
पिछले साल ही राज्य में दुर्गा पंडाल के उद्घाटन को लेकर सीएम ममता बनर्जी और केंद्रीय मंत्री अमित शाह में खींचतान देखने को मिली थी। ऐसे में इस बार भी सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस और मुख्य विपक्षी दल बीजेपी के बीच दुर्गा पूजा को लेकर जंग छिड़ गई है। बीजेपी के लिए इस दुर्गा पूजा के कई मायने हैं। फिर चुनाव से पहले जनसंपर्क के लिए राजनीतिक दलों को इससे बेहतर मौका भी नहीं मिलेगा।
लोकसभा चुनाव में सत्तारूढ़ टीएमसी को कड़ी चुनौती देने वाली बीजेपी ने बंगाल पूजा के बहाने राजनीति चमकाने के लिए अपनी कमर कस ली है। बंगाल के राजनीतिक इतिहास में पहली बार कोई दल यहां दुर्गा पूजा का आयोजन करने जा रहा है। इस पूजा का उद्घाटन पीएम मोदी वर्चुअल तरीके से करेंगे। पीएम मोदी के इस कार्यक्रम के सभी 294 सीटों पर प्रसारण के लिए व्यापक तैयारियां की गई हैं। इस दौरान पीएम मोदी दुर्गा पूजा उत्सव की शुरुआत के मौके पर ‘पूजोर शुभेच्छा’ कार्यक्रम के तहत एक विशेष संदेश भी जारी करेंगे।
संकेत साफ है कि इस बार दुर्गा पूजा में टीएमसी के मुकाबले बीजेपी भी अपनी राजनीति चमकाने का कोई मौका नहीं छोड़ना चाहती। पिछले दिनों बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा उत्तर बंगाल के सिलीगुड़ी आए थे और सबसे पहले उन्होंने कालीबाड़ी मंदिर में पूजा अर्चना की। इस दौरान उन्होंने पार्टी की चुनावी तैयारियों का जायजा लिया।
नड्डा की जगह पहले केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को भी बंगाल में पूजा के मौके पर कोलकाता आना था। हालांकि कुछ कारणों से शाह ने यह दौरा टाल दिया था। पिछली बार अमित शाह ने बंगाल में एक पूजा पंडाल का उद्घाटन भी किया था। बीजेपी ने बंगाल चुनाव से पहले प्रचार की धार तेज कर दी है और दुर्गा पूजा का इस्तेमाल वह हथियार के रूप में करेगी। पार्टी इस साल भी दुर्गा पंडालों में सदस्यता अभियान चलाएगी और केंद्र सरकार की नीतियों व उपलब्धियों के प्रचार के लिए जगह-जगह स्टॉल लगाएगी। बीजेपी इस बार साल्टलेक में दुर्गा पूजा का आयोजन कर रही है।
दूसरी ओर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पहली बार डिजिटल तरीके से उत्तर बंगाल में होने वाली पूजा पंडालों का उद्घाटन कर रही हैं। अब तक वह 70 से ज्यादा पंडालों का उद्घाटन कर चुकी हैं। इससे पहले ममता सरकार ने अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए दुर्गा पूजा समितियों के लिए कई राहत का ऐलान भी किया।
दुर्गा पूजा के जरिए अपनी सियासी जमीन बरकार रखने के लिए पिछले दिनों ममता सरकार ने आयोजन समितियों को कई तरह की छूट दी। करीब 3700 आयोजन समितियों को 50-50 हजार रुपए के आर्थिक अनुदान के अलावा बिजली में 50 फीसदी तक की छूट और फायरब्रिगेड की सुविधा मुफ्त देने का ऐलान किया था।
राजनीतिक विश्लेषक बताते हैं कि साल 2011 में टीएमसी की भारी बहुमत के साथ जीत से दुर्गाउत्सव पर सियासत का रंग चढ़ने लगा। धीरे-धीरे राज्य की तमाम आयोन समितियों से टीएमसी के नेता जुड़ते गए। आज की तारीख में बंगाल में करोड़ों के बजट में दुर्गा पूजा हो रही है जिनके अध्यक्ष या संरक्षक टीएमसी से जुड़े नेता या मंत्री हैं। टीएमसी मानती है कि दुर्गा पूजा बंगाल की संस्कृति और विरासत का हिस्सा है लेकिन बीजेपी धर्म के आधार पर लोगों को बांटने का प्रयास कर रही है।(UNA)