कोविड-19 से निपटने के लिए लागू किए लॉकडाउन से पर्यावरण को लाभ हुआ

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कोविड-19 से निपटने के लिए लागू किए लॉकडाउन से पर्यावरण को लाभ हुआ है। पर्यावरण मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक इसके चलते इस साल देशभर में कार्बन उत्सर्जन में 8 फीसदी की गिरावट दर्ज होने की उम्मीद है। बुधवार को पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स और उद्योग के एक वर्चुअल सत्र में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के संयुक्त सचिव सुजीत कुमार बाजपेयी ने कहा कि महामारी ने कई चुनौतियों के साथ ही अर्थव्यवस्था को दोबारा से शुरू करने, रिकवरी योजनाओं द्वारा दोबारा से समाज को बनाने और जलवायु परिवर्तन एवं पर्यावरण संरक्षण पर ध्यान केंद्रित करने का अवसर दिया है। कहा, जलवायु परिवर्तन एवं पर्यावरण संरक्षण पर ध्यान देने की जरूरत
उन्होंने पर्यावरण के महत्व और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण देने के साथ ही हुए जैव-विविधता के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा, हमें यह महसूस करने की आवश्यकता है कि हमारा जीवन और आजीविका प्रकृति और पर्यावरण के चारों ओर घूमती है। प्रकृति कई दवाओं और उद्योगों का एक अनिवार्य स्रोत है। निर्माण, कृषि, खाद्य और पेय पदार्थ जैसे उद्योग इस पर अत्यधिक निर्भर हैं। ऐसे उद्योगों को जंगल से संसाधनों के प्रत्यक्ष दोहन की आवश्यकता होती है, या फिर स्वस्थ मिट्टी, स्वच्छ पानी और एक स्थिर जलवायु जैसी पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं पर निर्भर करते हैं। कई कारणों से हम प्रजातियों को खो रहे हैं और कई विलुप्त हो गए हैं, जिसने पर्यावरण-प्रणाली को बाधित कर दिया है। उन्होंने कहा कि महामारी का असर काफी जटिल है और आने वाले कई सालों तक इसका आंकलन किया जाएगा। जलवायु परिवर्तन और महामारी मानव जनित गतिविधियों से संबंधित हैं। महामारी के कारण, कई व्यवसायों को स्थिरता के अपने मॉडल को बदलने और यह समझने की आवश्यकता है कि।(UNA)