क्या भाजपा को मिला स्वामी प्रसाद का विकल्प?

0
61

लखनऊ ब्यूरो,
यूएनए
25 जनवरी 22,

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के सियासी समर में नेताओं का पार्टी बदलना आम होता जा रहा है और इसमें नया नाम है कल तक कांग्रेस के स्टार प्रचारक रहे और पूर्व केंद्रीय मंत्री आरपीएन सिंह का जिन्होंने आज भाजपा ज्वाइन कर ली। भाजपा ने इनका भी गर्मजोशी से स्वागत किया है जैसे अपर्णा यादव का किया और इसे मास्टर स्टॉक बता रही है। जहां एक तरफ आरपीएन सिंह के भाजपा में जाने के नफे और नुकसान पर बात हो रही है वहीं दूसरी तरफ यह सच्चाई फिर सबके सामने आ रही है की पिता की विरासत के बल पर राजनीति में आए युवा नेताओं के लिए विचारधारा और संघर्ष कोई मुद्दा नहीं है। सिर्फ राजनीतिक लाभ, चमक दमक, निजी हित, आर्थिक लाभ, सामाजिक लाभ, सियासी रुतबा और सामाजिक प्रतिष्ठा ही उनके लिए प्रमुख है। चाहे उसके लिए मूल्यों का ही त्याग क्यों ना करना पड़े। पिता की विरासत के बल पर राजनीति में रहे यह युवा नेता मेहनत नहीं करना चाहते। जनता के साथ संपर्क, मुद्दा आधारित, जन आधारित राजनीति में कष्ट ना उठाकर तुरंत लाभ पाने के लिए किसी भी दल में जा सकते हैं। ऐसे और भी नाम है जिसमें जितिन प्रसाद, ज्योतिरादित्य सिंधिया, संजय सिंह, रीता बहुगुणा जोशी, विजय बहुगुणा, अदिति सिंह। इन नेताओं को लग रहा है कि कांग्रेस में सरकार बनने की संभावना नहीं है और पार्टी को खड़ा करने के लिए मेहनत करनी पड़ेगी। इसलिए यह नेता जमीन पर उतर कर मेहनत नहीं करना चाहते। जब सामने दूसरी पार्टी इनका रेड कारपेट बिछाकर स्वागत करने को तैयार हो तो फिर इन्हें मेहनत करने की भी क्या आवश्यकता है। भले ही भाजपा में जाने से कोई बड़ा सियासी फायदा हो ना हो लेकिन एक तो स्वामी प्रसाद मौर्य के जाने से हुए डैमेज कंट्रोल को पूरा करने दूसरे यदि पडरौना से टिकट दिया जाता है तो स्वामी प्रसाद मौर्य के सामने एक चर्चित चेहरा भाजपा को मिल गया है। लेकिन अभी तक यह भी साफ नहीं है की स्वामी प्रसाद मौर्य पडरौना से लड़ेंगे या नहीं।

आरपीएन सिंह का राजनीतिक सफर…
* 1996 से 2009 तक पडरौना से कांग्रेस के विधायक रहे।
* 2009 से 2014 तक सांसद रहे।
* 2009-2011 तक केंद्रीय सड़क, परिवहन और राजमार्ग राज्य मंत्री रहे।
* 2011-2013 तक केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस और कॉर्पोरेट मामले के राज्य मंत्री रहे।
* आरपीएन सिंह के पिता कुंवर सीपीएन सिंह इंदिरा गांधी के समय रक्षा राज्यमंत्री थे।
* 1997 से 1999 तक आरपीएन सिंह युवा कांग्रेस उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष थे।
* 2003 से 2006 तक ऑल इंडिया कांग्रेस के सचिव रहे।
2017 में मोदी लहर से पहले भाजपा को 1991 की राम लहर में पडरौना से जीत मिली थी। 1993 में इस सीट पर समाजवादी पार्टी के बालेश्वर यादव ने जीत हासिल की। 1996 से यहां कांग्रेस नेता आरपीएन सिंह का वर्चस्व कायम हो गया। 2009 तक वह इस सीट से विधायक रहे। आरपीएन के लोकसभा का चुनाव जीतने के बाद से कांग्रेस ने यह सीट नहीं जीती। 2017 के चुनाव में भाजपा के स्वामी प्रसाद मौर्य को 93649 वोट मिले थे। उन्होंने बसपा के जावेद इकबाल को 40552 वोट से हराया था। 41162 वोट लेकर कांग्रेस की शिवकुमारी देवी तीसरे नंबर पर थीं।

अरुणिमा प्रियदर्शिनी की रिपोर्ट