गुजरात में पूर्व गृह राज्य मंत्री गोरधन झड़फिया की हत्या की साजिश को क्या हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण का राजनीतिक रंग देना शुरू कर दिया गया

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गुजरात में पूर्व गृह राज्य मंत्री गोरधन झड़फिया की हत्या की साजिश को क्या हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण का राजनीतिक रंग देना शुरू कर दिया गया है और इसकी शुरुआत खुद गुजरात पुलिस ने अपने पहले ट्वीट से की है। बुधवार को गुजरात पुलिस ने अहमदाबाद के एक होटल से दाउद इब्राहिम के दाहिने हाथ छोटा शकील के शार्प शूटर इरफान को गिरफ्तार करके जो खुलासा किया वह डराने वाला है।

पुलिस के मुताबिक इरफान और उसका एक साथी राज्य के पूर्व गृह राज्य मंत्री और भाजपा नेता गोरधन झड़फिया की हत्या करने वाले थे, लेकिन पुलिस को यह जानकारी मिल गई और इस साजिश को विफल कर दिया गया। लेकिन इस मामले की जानकारी देने के लिए पुलिस ने जो पहला ट्वीट किया उसमें झड़फिया का परिचय राज्य के पूर्व गृह मंत्री और भाजपा नेता के रूप में न देकर हिंदू नेता के रूप में दिया है।

इस मामले का एक सियासी पहलू भी है। गोरधन झड़फिया पटेलों के बेहद लोकप्रिय नेता हैं। अगर उन पर किसी पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवादी संगठन या दाउद और छोटा शकील जैसे अपराधी गिरोह हमला करते हैं, तो इससे गुजरात में मुसलमानों के खिलाफ पटेलों में जबर्दस्त गुस्सा पैदा होगा। साथ ही क्योंकि झड़फिया 2002 में गृह राज्य मंत्री थे, जब गोधरा कांड के बाद हिंदुत्व का ज्वार फूटा था। उनकी विश्व हिंदू परिषद और प्रवीण तोगड़िया से नजदीकी भी जगजाहिर रही है। इसलिए उनकी एक हिंदू नेता की पुरानी छवि को फिर से पेश करके हिंदुत्व का ज्वार भी फिर पैदा हो सकता है। क्या इसीलिए गुजरात पुलिस ने अपने पहले ट्वीट में उन्हें हिंदू नेता बताया। जबकि उनकी पहचान हिंदू नेता से ज्यादा पूर्व गृह राज्य मंत्री और पाटीदार नेता की ज्यादा है।

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक गोरधन झड़फिया को मारने आए छोटा शकील के शूटर की गिरफ्तारी से भाजपा को एक बड़ा राजनीतिक हथियार हाथ लग गया है। पार्टी इसे जितना मुद्दा बनाएगी उसका नुकसान सीधे कांग्रेस को होगा, जो हार्दिक पटेल के जरिए पटेलों को अपनी ओर लाने की पुरजोर कोशिश में है। राज्य में कई विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने हैं। साथ ही बिहार विधानसभा चुनाव और मध्य प्रदेश विधानसभा उपचुनावों में भी झड़फिया का मुद्दा हिंदू ध्रुवीकरण में मदद कर सकता है।

गुजरात पुलिस जब इस साजिश की जानकारी मीडिया को दे रही थी, उस समय गोरधन झड़फिया प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सीआर पाटिल के साथ सौराष्ट्र के दौरे पर थे। उन्होंने फोन पर अमर उजाला को बताया कि यह मामला उन्हें भी चौंकाता है, क्योंकि इसके पहले उन्हें कभी कोई धमकी नहीं मिली। लेकिन अगर पुलिस ने किसी को गिरफ्तार किया है, तो जरूर उसका आधार होगा। सवाल है कि झड़फिया आखिर दाउद गिरोह के निशाने पर क्यों हैं। कहा जा रहा है कि वह तब राज्य के गृह मंत्री थे, उसी समय गोधरा कांड हुआ और उसके बाद मुसलमानों के खिलाफ राज्यव्यापी हिंसा हुई।

लेकिन इतने लंबे अंतराल के बाद झड़फिया की हत्या की साजिश थोड़ा इसलिए भी चौंकाती है कि 2002 के विधानसभा चुनावों के बाद से ही गोरधन झड़फिया राज्य भाजपा में तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के विरोध के प्रतीक बन गए थे। उन्होंने न सिर्फ राजभवन में मंत्रिमंडल के शपथ ग्रहण में अपना नाम पुकारे जाने पर वहीं खड़े होकर शपथ लेने से इंकार कर दिया, बल्कि उसके बाद भाजपा के भीतर मोदी विरोधियों को गोलबंद करने में जुट गए।