गोदल्याहेडी

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पुराने टैंट फट चुके हैं, नए आए तो हो छाया की व्यवस्था

– मनरेगा में छाया के अभाव में श्रमिक हो रहे बीमार

– कार्य का समय 6 से 11 करने की मांग

गोदल्याहेडी । भीषण गर्मी को लेकर सरकार ने भले ही मनरेगा कार्य स्थलों पर छाया, पानी, दवा और पालने जैसी सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दे रखे हों, लेकिन कार्यस्थलों पर स्थिति इसके उलट है। गोदल्याहेडी, मोरपा, डाहरा गांवों में मनरेगा कार्य पर श्रमिक सुविधाओं के अभाव में कार्य कर रहे हैं। गांव में खेतों के रास्ते पर चल रहे कार्य पर छाया की व्यवस्था नहीं है।

श्रमिक पेड़ों की छाया में बैठने के लिए इधर-उधर भटकते रहते हैं। काम में लगी महिलाओं ने बताया कि धूप में बैठकर भोजन करना पड़ता है। तेज गर्मी में कड़ी मेहनत करते हैं। कई बार श्रमिकों की तबीयत खराब हो जाती है। लेकिन मौके पर दवाओं का इंतजाम नहीं है। श्रमिकों ने बताया कि कार्य स्थल पर छाया की कोई व्यवस्था नहीं है। पेड़ की छाया में दोपहरी काटनी पड़ती है। श्रमिकों ने बताया कि कार्य स्थल पर पेट दर्द, उल्टी, दस्त, बुखार की गोलियां मेडिकल किट के साथ में रहनी चाहिए। कई बार अधिकारियों को बोलने के बाद भी कार्य स्थल पर श्रमिकों के लिए कोई सुविधा नहीं दी जा रही है।

नरेगा श्रमिकों ने कहा कि सरकार को गर्मी को देखते हुए मनरेगा श्रमिकों के समय में बदलाव करना चाहिए। वर्तमान में श्रमिकों को सुबह 6 से दोपहर 2 बजे तक कार्य करना पड़ता है। तेज गर्मी में सुबह 6 से 11 बजे तक का समय होना चाहिए है। वहीं इस बारे में लाडपुरा विकास अधिकारी जितेंद्र सिंह ने बताया कि कुछ सालों पहले मनरेगा स्थलों पर छाया के लिए टैंट दिए गए थे जो फट चुके है। अब जैसे ही नए टैंट मिलेंगे हम उपलब्ध करा देंगे।