जम्मू-कश्मीर के हंदवाड़ा में मुठभेड़ में कर्नल सहित पांच जवान शहीद, 2 आतंकवादी मारे गए।

0
90
जम्मू-कश्मीर के हंदवाड़ा में मुठभेड़ में कर्नल सहित पांच जवान शहीद, 2 आतंकवादी मारे गए।
   जम्मू-कश्मीर हंदवाड़ा में आतंकियों के खिलाफ अभियान में कर्नल और मेजर समेत भारतीय सेना के चार जवान शहीद हो गए हैं। कश्मीर घाटी के हंदवाड़ा में चल रही इस मुठभेड़ में दो आतंकी मार गिराए गए हैं। वहीं जम्मू-कश्मीर पुलिस के एक जवान ने भी आतंकियों से मुठभेड़ में शहीद हो गया। अधिकारियों ने रविवार को बताया कि हंदवाड़ा के चांजमुल्ला इलाके में हुई मुठभेड़ में दो आतंकवादी भी मारे गए हैं। यह इलाका उत्तर कश्मीर के कुपवाड़ा जिले का हिस्सा है। उन्होंने बताया कि सेना ने बंधक बनाए गए नागरिकों को बचाने के लिए अभियान चलाया। शहीद हुए सैन्य अफसर सुरक्षाकर्मियों की टीम का नेतृत्व कर रहे थे।
भारतीय सेना के सूत्रों के मुताबिक हंदवाड़ा में आतंकियों के छिपे होने की सूचना के बाद ऑपरेशन चलाया गया। इस दौरान छिपे हुए आतंकियों ने फायरिंग की, जिसमें 21 राष्ट्रीय रायफल्स के कर्नल, मेजर और दो जवान शहीद हो गए। जम्मू-कश्मीर पुलिस के एक सब-इंस्पेक्टर भी मुठभेड़ में शहीद हुए हैं।मुठभेड़ में जांबाज कर्नल आशुतोष भी शहीद
शहीद जवानों में 21 राष्ट्रीय रायफल्स के कर्नल आशुतोष, मेजर अनुज सूद, नायक राजेश और लांस नायक दिनेश शामिल हैं। कर्नल आशुतोष को कश्मीर में बहादुरी के लिए दो बार वीरता पदक मिल चुका था। कश्मीर में जांबाजी दिखाने वाले श्रेष्ठ कमांडिंग ऑफिसर्स में उनकी गिनती होती थी।
यह मुठभेड़ हंदवाड़ा के छंजमुला गांव में चल रही थी । संबंधित अधिकारियों ने बताया कि लश्कर के आतंकियों का एक दल बीते कुछ दिनों से राजवार के जंगलों में देखा जा रहा था। इनमें लश्कर का नामी डिवीजनल कमांडर हैदर भी बताया जा रहा है। सूत्रों की मानें तो हैदर एलओसी पार से आने वाले आतंकियों के एक नए दस्ते को लेने अपने साथियों संग आया था। हालांकि सुरक्षा एजेंसियों ने इस तथ्य की पुष्टि नहीं की है।
आतंकियों को पकड़ने के लिए शुक्रवार को सुरक्षाबलों ने अभियान चलाया था। नागनी जंगल में शुक्रवार रात आतंकियों और जवानों के बीच संक्षिप्त मुठभेड़ भी हुई, लेकिन आतंकी घेराबंदी तोड़ भाग निकले। जवानों ने आतंकियों का पीछा जारी रखा और शनिवार दोपहर को छंजमुला गांव में उन्होंने आतंकियों को फिर घेर लिया। आतंकियों की संख्या चार से पांच बताई जाती है। दोपहर बाद करीब तीन बजे मुठभेड़ शुरू हुई। आतंकी एक मकान में छिपे हुए थे।
बताया जाता है कि शाम करीब साढ़े पांच बजे आतंकियों की तरफ से गोलीबारी बंद हो गई। एक आतंकी का शव मकान के बाहर जमीन पर पड़ा देखा गया है। इस दौरान एक जवान भी हाथ में गोली लगने से जख्मी हुआ है। फ‍िलहाल सुरक्षा बल के जवान पूरी ताकत के साथ आतंकियों से लोहा ले रहे हैं। गौर करने वाली बात यह है कि हाल के दिनों में जम्‍मू-कश्‍मीर में आतंकी गतिविधियां बढ़ गई हैं।
करीब एक घंटे तक आतंकियों की तरफ से जब कोई गोली नहीं चली तो उन्हें मरा समझकर अधिकारियों व जवानों ने मुठभेड़स्थल की तलाशी शुरू कर दी। इसी दौरान पांच जवान तलाशी लेते हुए मकान में घुसे। बताया जा रहा है कि तभी आतंकियों ने फिर से फायरिंग शुरू कर दी। इससे मुठभेड़ दोबारा शुरू हो गई और मकान में घुसे पांचों जवानों से भी संपर्क टूट गया।
पुलवामा के डांगरपोरा में सुरक्षाबलों ने सुबह छह बजे आतंकियों के छिपे होने की सूचना पर तलाशी अभियान चलाया। खुद को घिरा देख आतंकी घेराबंदी तोड़ सुरक्षाबलों पर फायड्क्षरग करते हुए भागने लगे। जवानों ने भी जवाबी कार्रवाई की। इसके साथ ही मुठभेड़ शुरू हो गई। इस दौरान शरारती तत्वों ने सुरक्षाबलों पर पथराव शुरू कर दिया।
बताया जाता है कि आतंकियों को आत्मसमर्पण करने के लिए भी कई बार मौके दिए। दोपहर सवा बजे तक जारी रही मुठभेड़ में दो आतंकी मारे गए। उनका ठिकाना बना मकान पूरी तरह तबाह हो गया। तीन अन्य मकानों को आंशिक क्षति पहुंची। मारे गए आतंकियों की पहचान नहीं हो पाई, लेकिन सूत्रों के अनुसार, ये जैश-ए-मुहम्मद के तारिक अहमद शेख व हिजबुल मुजाहिद्दीन के साहिल अब्दुल्ला हो सकते हैं।
पुलवामा के टहाब चौक पर शाम सात बजे आतंकियों ने सीआरपीएफ की 183वीं वाहिनी के जवानों की जिप्सी पर ग्रेनेड फेंका। ग्रेनेड जिप्सी से कुछ दूरी पर जोरदार धमाके साथ फटा। इसमें सीआरपीएफ का कांस्टेबल सुमन प्रधान घायल हो गया। आतंकियों को पकड़ने के लिए पूरे इलाके की घेराबंदी कर तलाशी अभियान चला रखा है। गौरतलब है कि पिछले 12 दिन में कश्मीर में 20 आतंकी मारे जा चुके हैं।