जहां बिहार देश का कोरोना हॉटस्पॉट बनने की ओर अग्रसर है वहीं विधानसभा चुनाव कराने के पक्ष में उठा सवाल

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वाल: अभी कोरोना की जो स्थिति है उसे देखते हुए राज्य में विधानसभा चुनाव कराने के पक्ष में हैं या नहीं?
जवाब: देखिए, यह इतना डरावना दौर है, जिसमें कार्यरत मां-बाप अपने बच्चों को गोद में लेने से डर रहे हैं। सेवारत कोरोना योद्धा अपने बुजुर्ग मां-बाप के पास जाने में सावधानी बरत रहे हैं कि कहीं उन्हें कोरोना ना हो जाए। ख़ुद 134 दिन से घर से बाहर नहीं निकलने वाले लोग चुनाव चाहते हैं। जुलाई महीने में संक्रमण का फैलाव जिस रफ़्तार से हुआ है, नए मरीज़ों और केस पाजिटिविटी रेट में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है ये सब आने वाले महीनों में तबाही के मंजर की और अगाह कर रही है। संक्रमितों की जांच नहीं हो रही, अस्पतालों में किसी को बेड नहीं मिल रहें, लोग दर-बदर ठोकर खा रहे हैं। बिहार देश का कोरोना हॉटस्पॉट बनने की ओर अग्रसर है। इन सब चीजों को देखते हुए मैं क्या कोई भी मानवता में विश्वास रखने वाला व्यक्ति चुनाव के पक्ष में नहीं होगा।
इसके साथ ही बाढ़ का कहर कोसी, सारण, चंपारण, मिथिलांचल, सीमांचल और अन्य तटवर्ती इलाकों में लोगों की जान-माल को भयंकर क्षति पहुंचा रहा है। अभी सरकार की प्राथमिकता लोगों का इलाज, उनकी जान बचाना होना चाहिए ना की चुनाव कराना। लाशों के ढेर पर चुनाव कराना और मतदान केंद्र से मतदाताओं को सीधे शमशान भेजने का पक्षधर मैं कभी नहीं हूं। जनतंत्र में जब जन ही नहीं रहेगा तो तंत्र का क्या फ़ायदा?

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