जेएनयू के छात्रों ने किया ऐतिहासिक मार्च, जगह-जगह पुलिस से झड़प और लाठी चार्ज

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UNA/Delhi Bureau/19 Nov.2019.

पिछले तीन हफ्तों से से जेएनयू लगातार प्रतिरोध और संघर्षों का केंद्र बिंदु बना हुआ है. वजह है, तमाम मदों में बेतहासा फीस में बढ़ोत्तरी. जेएनयू के सभी छात्र इस फीस वृद्धि के खिलाफ आंदोलित चल रहे हैं. पिछले हफ्ते स्थिति तब ज्यादा नाज़ुक हो गयी जब केंद्र सरकार के मंत्री एक कार्यक्रम में पधारे और छात्रों ने चारों ओर से घेराबंदी की और पूरा जेएनयू छावनी में तब्दील हो गया था और कई बटालियन दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बल को वहाँ उतारा गया. 

बहुत दबाव के बाद फीस वृद्धि में कुछ कमी तो की गयी थी लेकिन वह भी मामूली. इसके बाद घटनाक्रम ने तेज़ी से करवट ली और जेएनयू छात्र संघ के आह्वान पर 18 नवम्बर को संसद कूच करने का आह्वान कर दिया गया. अमूमन यही होता है कि छात्र कैंपस तक ही सीमित रहते हैं. 18 नवम्बर के इस मार्च के चलते जबरदस्त बरिकैडिंग और चप्पे चप्पे पर पुलिस बल तैनात थी. जब छात्रों का सैलाब साबरमती हॉस्टल से निकला तो हर बाधा को तोड़ते हुए निकल पड़ा संसद की ओर. जेएनयू गेट से भीषण संघर्ष शुरू हो गया. सैकड़ों छात्रों को गिरफ्तार किया गया. छात्रों ने बाहर के सारे अवरोधों को तोड़ते हुए करीब 15 किलोमीटर का सफ़र तय करते हुए सफदरजंग मकबरा के करीब पहुंचे तो पुलिस बल ने लाठी चार्ज कर दिया जिसमें दर्जनों छात्र घायल हुए. 

छात्र उसी जगह पर रात करीब 9 बजे तक वहीँ डंटे रहे. रात में छात्रों को बसों में भर कर वापस जेएनयू में भेजा गया. 

छात्रों का यह ऐतिहासिक मार्च पर दिल्ली के प्रशासन के हाथ-पाँव फूल गए हैं. उम्मीद है सरकार इन छात्रों की जायज मांगों पर सकारात्मक रूप से विचार करेगी और फीस बढ़ोत्तरी वापस लेगी. जेएनयू ने छात्र नौजवानों की आवाज को तथा समाज के तमाम उत्पीडित समुदायों की आवाज नया आयाम दिया है. इससे दूसरे विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों के छात्र जुड़ेंगे और फिर से भारत के नए मुस्तकबिल का आगाज़ करेंगे.

हिम्मत सिंह