डेरा सच्चा सौदा के संस्थापक बेपरवाह साई शाह मस्ताना जी महाराज का पावन अवतार दिवस श्रद्धा भाव और उल्लास के साथ मनाया गया

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डेरा सच्चा सौदा के संस्थापक बेपरवाह सार्इं शाह मस्ताना जी महाराज का पावन अवतार दिवस श्रद्धा भाव और उल्लास के साथ मनाया गया
आशियाना मुहिम : पाँच परिवारों को मिले मकान, 330 जरूरतमंद परिवारों को राशन और 140 जरूरतमंदों को गर्म वस्त्र वितरित किए गए।

सिरसा, 20 नवंबर।। डेरा सच्चा सौदा के संस्थापक बेपरवाह सार्इं शाह मस्ताना जी महाराज का 130वां पावन अवतार दिवस शुक्रवार को शाह सतनाम जी धाम में श्रद्धा भाव और उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर संत गुरमीत राम रहीम सिंह इन्सां की ओर से अपनी नेक कमाई में 330 जरूरतमंद परिवारों को राशन और 140 जरूरतमंदों को गर्म वस्त्र वितरित किए गए। वहीं छठा रूहानी पत्र पढ़कर भी सुनाया गया। इसके साथ ही साध-संगत की ओर से 4 जरूरतमंदों को ‘आशियाना’ मुहिम के तहत बनाए गए मकानों की चाबियां सौंपी गई। वहीं चार जरूरतमंद दिव्यांगजनों को ट्राइसाइकिलें सौंपी गई। इस शुभ अवसर पर बेटी से वंश चलाने के लिए शुरू की गई मुहिम ‘कुल का क्राउन’ मुहिम के तहत एक शादी भी हुई व 11 शादियां डेरा सच्चा सौदा की मर्यादानुसार दिलजोड़ माला पहनाकर हुई।
शाह सतनाम जी धाम में आयोजित कार्तिक पूर्णिमा के पावन भंडारे की नामचर्चा में हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, दिल्ली व अन्य राज्यों से भारी संख्या में साध-संगत ने शिरकत की। साध-संगत के उत्साह का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दरबार के चारों ओर के मार्गों पर वाहनों की कई-कई किलोमीटर लंबी लाइनें लगी रहीं। सड़क पर जहां तक नजर जाती थी श्रद्धालु ही श्रद्धालु नजर आ रहे थे।
पावन भंडारे की नामचर्चा का आगाज सुबह 11 बजे गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां को ‘‘धन-धन सतगुरु तेरा ही आसरा’’ के पवित्र नारे के रूप में बधाई के साथ हुआ। इस शुभ अवसर पर बड़ी-बड़ी स्क्रीनों के माध्यम से अनमोल वचन चलाए गए। साथ ही बेपरवाह सार्इं शाह मस्ताना जी महाराज के मानवता पर उपकारों को दर्शाती एक डॉक्यूमेंट्री भी दिखाई गई।
इस पावन अवसर पर ब्लॉक बठोई डकाला (पटियाला) की ओर से भूपेन्द्र सिंह पुत्र गुरनाम सिंह गाँव शेर माजरा, ब्लॉक नाभा (पटियाला) की ओर से बलतेज कौर पत्नी कर्मजीत सिंह निवासी कांडा बस्ती, ब्लॉक महलकलां (बरनाला) की ओर से बलविन्द्र कौर पत्नी चमकौर सिंह, ब्लॉक कल्याण नगर (सरसा) की ओर से सुकान्ति पत्नी प्रदीप निवासी प्रीत सागर और ब्लॉक श्री मुक्तसर साहिब की ओर से कश्मीरी लाल पुत्र सौदागर मल निवासी गोनिया रोड को पूरा मकान बनाकर दिया। इन ब्लॉकों के जिम्मेवारों ने ये चाबियां इन लोगों को सौंपी। पावन भंडारे की नामचर्चा में ‘साथी’ मुहिम के तहत 6 दिव्यांगों को ट्राइसाईकिल दी गई। जिसमें परमजीत कौर पत्नी सुगदेव सिंह शाह सतनाम जी पुरा (सरसा), लेखराज पुत्र रांजाराम गांव अलिकां, रतिया (फतेहाबाद), तेजकौर पत्नी गुरमीत सिंह इन्द्रा विकास कॉलानी, कल्याण नगर सरसा, मनोज पुत्र दास राम ब्लॉक अमरजीतपुरा, सरसा, वर्षा रानी पुत्री रघुवीर सिंह ब्लॉक सरसा व राजबाला पत्नी राम गोपाल ब्लॉक सरसा को ट्राइसाईकिल दी गई। बता दें कि इन ट्राइसाईकिलों का परमार्थ अंशुल इन्सां (सरसा), मास्टर दर्शन कुमार ब्लॉक टोहाना (फतेहाबाद), राजदीप इन्सां पुत्री दर्शन सिंह इन्सां, कमलेश इन्सां सेक्टर-21 (दिल्ली) व ब्लॉक शाह सतनाम जी नगर की समस्त साध-संगत द्वारा ये इस परमार्थी कार्य में सहयोग किया है।

एक और बेटी बनी ‘कुल का क्राऊन’

शाही आसरा आश्रम से लखप्रीत इन्सां बना भक्त मर्द गाजी

सिरसा, 20 नवंबर । पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां द्वारा बेटी से वंश चलाने के लिए शुरू की गई मुहिम ‘कुल का क्राऊन’ के तहत एक ओर बेटी ‘कुल का क्राउन’ बनी। यह मुहिम पूज्य गुरु जी ने उन परिवारों की व्यथा को समझते हुए शुरू की थी, जिनके परिवार में सिर्फ एक ही बेटी है। इसके तहत बेटी यानि कुल का क्राऊन, दूल्हे यानि भक्त मर्द गाजी को ब्याह कर अपने घर ले जाती हैं। और इस तरह बेटी से परिवार का वंश चलता है। पावन अवतार दिवस के अवसर पर इस मुहिम के तहत ‘कुल का क्राऊन’ स्लिकी इन्सां, माता कांता इन्सां व पिता उदयपाल इन्सां निवासी मंडी डबवाली जिला सरसा व भक्त मर्द गाजी लखप्रीत इन्सां पुत्र संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां डेरा सच्चा सौदा सरसा के संग विवाह बंधन में बंधी। बता दें कि भक्त मर्द गाजी लखप्रीत इन्सां शाही आसरा आश्रम से है। जिसकी परवरिश स्वयं संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने की है। यहां रहने वाले सभी बच्चों को पूज्य गुरु जी ने अपना नाम ही नहीं दिया बल्कि उनका पालन पोषण व शिक्षा सहित अन्य सभी जिम्मेवारियां भी पूज्य गुरु जी स्वयं उठाते हैं।

सार्इं जी ने सिखाया कर्तव्य निर्वाह और रूहानियत में तालमेल रखना
सिरसा, 20 नवंबर । पूज्य गुरु जी ने रिकॉर्डिड वचनों में फरमाया कि जब पूर्ण सतगुुरु से मिलाप होता है, तो आत्मा कहती है कि तू धन्य है, क्योंकि उसकी निगाह बहुत से पाप कर्मों को जलाकर राख कर देती है। तो पूजनीय सार्इं मस्ताना जी महाराज इस धरा पर आए, मालिक स्वरूप यहां पर खेल खेले। आपजी का शुरू से ही परहित परमार्थ में ध्यान रहता। एक बार माता जी ने सार्इं जी को बाल्यकाल में भेजा कि खोवा बनाया है, ये आप दुकान पर ले जाकर रख दीजिए। सार्इं जी ने रास्ते में कुछ गरीब, फक्कड़ लोगों को देखा तो उन्होंने सार्इं जी से कहा कि हम भूखे हैं। तभी सार्इं जी ने वो खोवा उनको खाने के लिए दे दिया। अब सार्इं जी ने देखा कि उनके पास खोये के पैसे नहीं है तो उन्होंने पूरा दिन मजदूरी की और उससे जो पैसा मिला वो माता जी को जाकर दिया। साथ ही वो जमींदार आ गया, जहां मजदूरी की थी। उसने माता जी को बताया इस नन्हें से बच्चे ने एक बड़े आदमी से भी ज्यादा काम किया है। इस पर माता जी वैराग्य में आ गई और सार्इं जी को छाती से लगा लिया व पूछा कि आपने ऐसा क्यों कि तो आपजी ने पूरा बात बताई। सार्इं जी ने बचपन से ही दिखाया कि कर्तव्य निर्वाह कैसे होता है और रूहानियत में तालमेल कैसे बैठाया जा सकता है, ये एक बेमिसाल मिसाल है।

पूज्य गुरु जी ने आगे फरमाया कि इश्क हकीकी जिसको लग जाता है, वो जाता है या फिर उसका मालिक सतगुरु जानता है, दूसरा नहीं पहचान पाता। इश्क हकीकी जो अपने अल्लाह, वाहेगुरु, राम से किया जाता है, वो कभी टूटता नहीं है। आप अपनी बांह लाख अपने सच्चे मुर्शिद से छुड़वाने की कोशिश करो, वो कभी नहीं छोड़ेगा। एक बार आपने अपनी बांह उसे पकड़ा दी, गुरुमंत्र नाम ले लिया तो ये जहान तो क्या, मौत के बाद भी आपके आगे खड़ा हो जाएगा और कहेगा कि आ भई तुझको ले चलूं। ऐसा होता है इश्क हकीकी और उसके इश्क में जो कोई उसका होकर इश्क में नाचता है, इश्क में खुशी मनाता है, उसकी खुशियां कर्इं गुणा बढ़ती चली जाती हैं।

सतीश बांसल