दिलीप घोष के बयान पर छलका बाबुल सुप्रियो का दर्द, बंगाल बीजेपी अध्यक्ष ने कही ये बात

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कोलकाता: पूर्व केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो के राजनीति संन्यास लेने और सांसद पद छोड़ने की फेसबुक पर घोषणा के बाद ही इस संबंध में बंगाल बीजेपी के अध्यक्ष के बयान पर आसनसोल के सांसद ने एक और पोस्ट किया. श्री सुप्रियो की सांसद पद छोड़ने की घोषणा के बाद अन्य पार्टियों के नेताओं के साथ-साथ भाजपा के भीतर भी कमेंट का दौर शुरू हो गया था. बाबुल सुप्रियो ने बीजेपी नेता दिलीप घोष और तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता कुणाल घोष के बयानों को अपने पोस्ट में जगह दी है. हालांकि, रविवार को दिलीप घोष ने स्पष्ट किया कि बाबुल सुप्रियो भाजपा में ही रहेंगे. शनिवार को भी दिलीप ने कहा था कि बाबुल ने अभी इस्तीफा नहीं दिया है. अगर वे इस्तीफा देंगे, तो उनको (दिलीप घोष को) जरूर बतायेंगे.
बाबुल सुप्रियो ने अपने पोस्ट में लिखा, सभी अपनी तरह मेरी बात को समझ रहे हैं और समर्थन या फिर विरोध कर रहे हैं. जो मेरे साथ थे, वह रहेंगे लेकिन अब मैं सबके समान रहूंगा. उन लोगों की कोई सुरक्षा नहीं रहती, मेरी भी सुरक्षा नहीं रहेगी. चुनावी राजनीति में न रहने पर किसी के हित पर चोट नहीं पहुंचेगी. मेरा काम भी राजनीतिक कारणों की वजह से नहीं रुकेगा.
बाबुल ने आगे कहा है कि आसनसोल की विभिन्न परियोजनाओं के लिए करीब 200 करोड़ रुपये लाया हूं. उन परियोजनाओं को बीच-बीच में देखने जाऊंगा. कुमारपुर में रेल ओवरब्रिज(70 करोड़), इएसआइ अस्पताल (60 करोड़) है. कौन रोकेगा मुझे? ईस्ट-वेस्ट मेट्रो देखने जाऊंगा. बालीघाट स्टेशन में लिफ्ट का कार्य है. आम व्यक्ति की तरह देखने जाऊंगा. मेरा नाम या फिर किसी दूसरे मंत्री के नाम का फलक वहां लगेगा, तो उससे क्या फर्क पड़ता है?
बाबुल ने कहा कि एक ट्रॉमा सेंटर बनाने की इच्छा है. कुछ दोस्त डॉक्टरों के साथ काफी दिन पहले से बात हो चुकी है. सक्रिय राजनीति में रहने की वजह से कुछ लोग हिचकिचाते थे. आशा है कि अब काम आसान हो जायेगा. हो सकता है कि इसमें कुछ समय लगे. इमरान खान अगर अपनी मां के नाम पर करोड़ों रुपये का अस्पताल बना सकता है, तो मैं 5-10 वर्षों में क्यों नहीं बना सकता?
उन्होंने अपने पोस्ट में कहा है कि पीड़ित भाई बहनों के साथ रहकर मानवाधिकार आयोग के साथ मिलकर लड़ाई करूंगा. कम से कम ऐसे ‘व्यक्तित्व’ या टिप्पणियों के साथ रोजाना तो सामना नहीं करना पड़ेगा. कितनी सकारात्मक ऊर्जा बचेगी जो अन्य अच्छे कार्यों में लग सकेगी. दो ताजा उदाहरण पेश है. पहली टिपप्णी श्री कुणाल घोष की और दूसरी श्री दिलीप घोष की है.
अपने ताजा पोस्ट में बाबुल सुप्रियो ने मीडिया में आये कुणाल घोष और दिलीप घोष की टिप्पणी को भी शामिल किया है. दिलीप घोष ने उक्त टिप्पणी में तथाकथित तौर पर बाबुल के इस्तीफा देने पर संदेह व्यक्त किया था. हालांकि, रविवार को दिलीप घोष ने कहा कि बाबुल सुप्रियो अलग-अलग पोस्ट करते रहते हैं.
दिलीप घोष ने कहा कि पार्टी के भीतर बात करने पर समाधान निकल जायेगा. पार्टी ने उनकी भूमिका को परिवर्तित किया है. अब उन्हें संगठन के कार्य में लगाया जायेगा. उनमें अनुभव व जोश है. भाजपा की सरकार जब बंगाल में बनेगी, तो यह अनुभव काम आयेगा. बाबुल सुप्रियो भाजपा में थे और रहेंगे.