दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि इस हफ्ते दिल्ली में क्या खुला रहेगा और क्या बंद रहेगा

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दिल्ली; केजरीवाल ने जानकारी दी है कि अगर आगे भी केस कम होते चले गए तो लॉकडाउन में और ढील दी जाएगी। लेकिन यदि केस बढ़े तो फिर से लॉकडाउन में सख्ती आ सकती है…
केजरीवाल के मुख्य एलान
अब 400 के करीब केस आ रहे हैं और 0.5 प्रतिशत ही संक्रमण दर बची है।
आगे भी लॉकडाउन जारी रहेगा लेकिन काफी रियायतें दी जा रही हैं।
सभी बाजार और मॉल ऑड-ईवन के आधार पर खुलेंगी। सुबह 10 बजे से शाम 8.00 बजे तक दुकानें अपने नंबरों के हिसाब से खुलेंगी।
दिल्ली मेट्रो 50 प्रतिशत सीट क्षमता के साथ चलेगी।
दिल्ली के सरकारी दफ्तरों में ग्रुप ए के अफसर 100 प्रतिशत और उसके नीचे वाले 50 प्रतिशत ही काम करेंगे।
निजी दफ्तर 50 प्रतिशत कर्मचारियों के साथ खुलेंगे।
स्टैंड अलोन शॉप और इसेंशियल सर्विस की दुकानें रोजाना खुलेंगी।
आने वाले हफ्तों में यदि स्थिति काबू में रही तो और रियायत दी जाएगी
हमारी जिम्मेदारी है कि हम थर्ड वेव की पूरी तैयारी करें।
कल मैंने दो बैठकें तीसरी लहर को लेकर की जो लगभग 6 घंटे तक चलीं। इनमें अधिकारी, विशेषज्ञ आदि सब रहे।
हमें अब एक्सपर्ट की राय के अनुसार 37000 की पीक के लिए तैयारी करनी है। ऐसा नहीं है कि अब पीक नहीं आएगी लेकिन अगर हम इस बेस के साथ तैयार हो गए तो मामले बढ़ने पर हम और तैयारी कर सकेंगे।
दिल्ली में एक पीडिएट्रिक टास्क फोर्स अलग से बनाई गई है जो तय करेगी कि कितने आईसीयू बेड होने चाहिए, उसमें से कितने बच्चों के होने चाहिए और बच्चों के लिए भी किस तरह के बेड होने चाहिए। इसके साथ ही उनके लिए सबकुछ अलग होगा।
ऑक्सीजन की कमी को लेकर इस बार लोगों को काफी संघर्ष करना पड़ा था लेकिन जब तक हमें ऑक्सीजन मिली तब तक दिल्ली में त्राहि-त्राहि मच गई।
हम नहीं चाहते कि अगली वेव में ऐसा हो। हम दिल्ली में 420 टन ऑक्सीजन स्टोरेज की क्षमता तैयार कर रहे हैं। इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड से बात कर 150 टन ऑक्सीजन प्रोडक्शन के लिए कहा गया है।
इस बार दिल्ली में ऑक्सीजन टैंकर नहीं थे इसके लिए अब 25 ऑक्सीजन टैंकर खरीदे जा रहे हैं।
दिल्ली में 64 छोटे ऑक्सीजन प्लांट एक-दो महीने में लगकर तैयार हो जाएंगे।
बेड की जरूरत के हिसाब से ऑक्सीजन सिलिंडर कितने चाहिए इस पर फैसला किया जाएगा। कुछ दिन पहले हमने चीन से 6000 ऑक्सीजन सिलिंडर आयात किए थे अब और कितने चाहिए होंगे यह भी तय होगा। कितने ऑक्सीजन कंसंट्रेटर चाहिए होंगे वो भी दिल्ली सरकार खरीदेगी।
बीते दिनों देखा गया कि व्हाट्सएप पर दवाई काफी प्रिस्क्राइब की गई जिसके बाद उसके शहर ही नहीं पूरे देश में डिमांड बढ़ गई। इसके लिए डॉक्टरों की एक टीम तैयार की जाएगी और वो बताएंगे कि इस दवा का कोरोना के इलाज में फायदा है कि नहीें। डॉक्टर अगर कहते हैं कि इस दवा का कोई फायदा नहीं है तो उसके बारे में जनता को बताया जाएगा ताकि लोग पैनिक न हों।
इसके साथ ही जिन दवाओं की जरूरत है इलाज में उनका एक बफर तैयार किया जा रहा है। एक्सपायरी डेट को ध्यान में रखते हुए ये बफर स्टॉक तैयार किया जाएगा। निजी अस्पतालों को भी ऐसा स्टॉक तैयार करने को कहा गया है ताकि अगली वेव में कोई परेशानी न हो।
साथ ही दिल्ली में दो जीनोम सीक्वेसिंग लैब एलएनजेपी और आईएलबीएस अस्पताल में बनाई जा रही है। ताकि हमें भी पता रहे कि दिल्ली में कौन सा वेरिएंट आ रहा है और उससे कैसे निपटना है।