दिल्ली के संगम विहार की बेटी के साथ हुई बर्बरता और हत्या का मामला और पेंचीदा रूप अख़्तियार कर रहा-पुलिस की थ्योरी और सच्चाई के बीच बड़ी खाई

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दिल्ली; संगम विहार (दिल्ली) की बेटी “खुशबू” ( बदला हुआ नाम) के साथ एक हफ्ते पूर्व हुए पैशाचिक बलात्कार , अमानवीय यातना और जघन्य हत्या के बाद जिस तरह पुलिस और प्रशासन कछुआ चाल और खामोशी अपनाए हुए है, उसने जनआक्रोश और जनांदोलन मे पलीता लगाने का काम किया है ! “खुश्बू” ( काल्पनिक नाम ) का केस हरियाणा और दिल्ली में जिस तरह से उलझाया गया है , उससे साफ लगता है कि बलात्कारी हत्यारों की संख्या एक से कहीं ज्यादा है ! केस के बाद जिस तरह से कथित हत्यारे ( निजामुद्दीन ) ने खुद आत्मसमर्पण करने के बाद खुशबू को अपनी पत्नी और खुद को पति बताया है उसने हत्यारों की संख्या की आशंका को पक्का कर दिया है !
कई सवाल दिमाग़ की सांकल खटखटा रहे हैं , जैसे
1- खुशबू की कलीग ज्योति ने घटना की रात खुशबू की मां से फोन पर बताया था कि – ‘परेशान न हों, खुशबू मेहरा सर के साथ है , आ जाएगी -‘ कौन हैं ये मेहरा सर और कत्ल की रात खुशबू को लेकर कहां गए थे ?
2- उस रात (२६ अगस्त 2021) क्या ज्योति भी मेहरा और खुशबू के साथ थी ? अगर ‘ हां ‘ तो पुलिस ने अब तक इनको पकड़ा क्यों नहीं ?
3- पुलिस प्रवक्ता के मुताबिक निज़ामुद्दीन (कथित हत्यारा) ने खुशबू को अपनी बीबी बताया था ! चार महीने पहले सिविल डिफेंस में भर्ती खुशबू ने शादी कब कर ली ? खुशबू के मां बाप के मुताबिक उनकी बेटी अभी तीन चार साल तक शादी करने के पक्ष में नहीं थी ! तो फिर पुलिस आसमान से टपके इस “दूल्हे राजा” के बयान पर यकीन कैसे कर बैठी ?
4- सिविल डिफेंस में कार्यरत खुशबू को एक युवक इतनी आसानी से कत्ल नही कर सकता ! तो उस रात निज़ामुद्दीन के साथ और कौन था ? निजामुद्दीन के आत्मसमर्पण और शादी का बयान कहीं बड़े मगरमच्छों को बचाने की साजिश का हिस्सा तो नही ?
5– हफ़्ते भर बाद भी पुलिस निज़ाम को रिमांड पर लेकर पूंछ तांछ क्यों नहीं कर पाई ? किसके इशारे पर इस जघन्य हत्याकांड की जांच के आगे स्पीड ब्रेकर रख दिया है ? हत्यारे के बाकी चेहरे कब बेनकाब होंगे?
सुल्तान भारती कहते हैं कि “दर्द, यातना , जुल्म और अमानवीयता के पटल पर खुशबू कांड के सामने ” निर्भया कांड” भी फीका पड़ जाता है ! मीडिया मुगल और सत्ताधीशो ने आंखों पर गांधारी पट्टी बांध ली है और सोशल मीडिया ने इस आन्दोलन को दिल्ली की सीमा से बाहर पहुंचा दिया है ! देश की जनता “खुशबू” को न्याय दिला कर रहेगी ! लगता है – “धृष्टराज” की खामोशी बताती है कि दिल्ली की सत्ता एक और ” परिवर्तन” का इंतज़ार कर रही है !”