दिल्ली में केजरीवाल की हैट्रिक

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नफ़रत के खिलाफ दिल्ली ! चाहिए अमन और बेहतर काम !!

11 फरवरी 2020 , UNA  ब्यूरो

दिल्ली विधान सभा चुनाव में फिर से चुनाव जीतकर साबित कर दिया कि आम सा दिखने वाला चेहरा दिल्ली के लिए कितना ख़ास है. 70 में से 62 सीटें जीतकर आम आदमी पार्टी ने इतिहास रच दिया है. इसबार का चुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि ठीक चुनाव से पहले नागरिकता संशोधन कानून ने पूरे देश में विरोध-प्रदर्शनों की लहर खड़ी कर दिया था. मुसलामानों के अलावा वंचित जातियों ने इस क़ानून का खुलकर विरोध करना शुरू कर दिया था. इतने पोलिटिकली चार्ज्ड माहौल में आम आदमी पार्टी ने अपने काम को आधार बना कर चुनाव प्रचार शुरू किया. दिल्ली में लगातार गंभीर किस्म के हमले भी छात्रों ने झेला चाहे वह मामला जामिया मिल्लिया इस्लामिया के छात्रों पर बर्बर हमला, जेनयू के छात्रों पर बेतहासा फीस वृद्धि के खिलाफ आंदोलन को कुचलने के लिए ना केवल पुलिस द्वारा बल्कि नकाबपोश गुंडों द्वारा हमला, जामिया में और शाहीन बाग़ में गुंडों द्वारा फायरिंग करना भी मुख्य विरोधी पार्टी भाजपा के खिलाफ जनमत बनाया.

ज्ञातव्य हो कि इसबार के चुनाव में जिस तरह की भाषा और भाव-भंगिमा का परिचय भाजपा ने दिया, वह दिल्ली के इनके आधार के एक बड़े हिस्से के लिए पचा पाना मुश्किल हो गया था. भाजपा ने बहुत आक्रामक चुनाव प्रचार अभियान शुरू किया और चेहरा वही, केवल और केवल नरेंद्र मोदी. एक सूबे के चुनाव में भी भाजपा को कोई नेता नहीं मिल रहा है, जो इनके एकतरफा या यों कहा जाय कि केवल एक ही शीर्ष नेतृत्व मोदी, जहां सेकंड जनरेशन नेतृत्व की कमी साफ़ साफ़ दिख रही है.

केजरीवाल के नेतृत्व में पूरी पार्टी ने बिना किसी उकसावे के अपने काम पर फोकस किया। जिसमे, 200 यूनिट बिजली मुफ्त, मुफ्त पानी, शिक्षा व्यवस्था में सुधार, स्वस्थ्य सेवाओं में बेहतरीन काम तथा कच्ची कॉलोनियों में सड़क, नाली, पानी पहुंचाने आदि का काम भी प्रमुखता से प्रभावी रहा. इसके खिलाफ CAA के खिलाफ आंदोलन को बदनाम करने, भाजपा के खिलाफ वोट का मतलब पकिस्तान को वोट, गोली मारने की बात करने वाले केन्द्रीय मंत्री का शर्मनाक बयान, केजरीवाल को आतंकवादी कहना, शाहीनबाग़ की महिलाओं को पाकिस्तानी कहना आदि ने इनसे सहानुभूति रखने वालों को भी विचलित कर दिया. धरा 370 हटाने का हश्र जम्मू कश्मीर को टुकड़े टुकड़े करने और पूरे कश्मीर को बंधक बना देने को कामयाबी के बतौर पेश करने, तीन तलाक क़ानून और नागरिकता संशोधन क़ानून को भी महिमामंडित करने के मुद्दों ने दिल्ली की जनता ने नकार दिया. दिल्ली में भाजपा द्वारा चलाया गया  प्रचार अभियान भारत के किसी भी चुनावी प्रचार में सबसे शर्मनाक प्रचार अभियान है.

CAA के खिलाफ चल रहे आंदोलनकारी महिलाओं से बात करने, कानून पर पुनर्विचार करने आदि की बात तो दूर शाहीन बाग़ को करंट का झटका देने वाले शीर्ष भाजपा नेता अमित शाह को ही दिल्ली की जनता ने वज्रपात कर दिया है. यह भाजपा के नेतृत्व को सोचना है कि जिस तरह की तानाशाही लेकर आने के लिए आप आतुर हैं, उसे अब भारत की जनता ने नकार दिया है. हरियाणा, महाराष्ट्र, झारखण्ड और अब दिल्ली की जनता ने साफ़ कर दिया है कि भाजपा की पोल जनता के सामने खुलती जा रही है. अब लोग ज्यादा सचेत हो गए हैं. दलित, आदिवासी, अतिपिछड़े, धार्मिक अल्पसंख्यकों सहित क्षेत्रीय अल्पसंख्यकों के प्रति जिस तरह की नफ़रत की राजनीति आप खेल रहे हैं, वह ज्यादा देर तक नहीं चलने वाला है.

अरविन्द केजरीवाल के सामने चुनौती भी बड़ी है. जय श्रीराम के नारे के जवाब में जय बजरंगबली का नारा आखिर किसको संतुष्ट करेगा। राजनीति से धर्म को अलग करने की जगह उसका घालमेल कहीं पूरी गति को धीमा ना कर दे या भटका ना दे. सीवर में हो रही मौतों को रोकने के लिए तथा सीवर और सफाई कर्मचारियों को स्थाई नौकरी देने, ठेकेदारी प्रथा को ख़त्म करने, सीवर कर्मियों के पुनर्वास आदि सहित सार्वजनिक परिवहन को दुरुस्त करने का बड़ा टास्क है. शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं को और सुगम बनाने तथा वंचित समुदायों तक पहुँच बनाने की ओर बढ़ना होगा. इसके साथ ही एनपीआर और NRC  को दिल्ली में तत्काल प्रभाव से रद्द करना होगा.

उम्मीद है आने वाले पांच साल केजरीवाल सरकार के लिए बिना बाधा के हो.