नयी दिल्ली: केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने झारखंड में प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति वितरण में हुई अनियमितता मामले में मंगलवार को जांच का आदेश दिया

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नयी दिल्ली: केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने झारखंड में प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति वितरण में हुई अनियमितता मामले में मंगलवार को जांच का आदेश दिया है. झारखंड में प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति में हुए घोटाले की रिपोर्ट मीडिया में आने के बाद राज्य के मुख्यमंत्री पहले ही मामले की जांच कराने की घोषणा कर चुके हैं.
उल्लेखनीय है कि केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय की ओर से अल्पसंख्यक छात्रों को प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति के लिए राशि प्रदान की जाती है. नकवी ने इस बारे में कहा कि इस मामले में जांच का आदेश दे दिया गया है. उनके मुताबिक, छात्रवृत्ति से संबंधित प्रक्रिया पारदर्शी है. लाभार्थियों को डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से पैसे भेजे जाते हैं. प्रक्रिया का सत्यापन राज्य सरकार द्वारा किया जाता है और इस मामले में झारखंड सरकार भी जांच कर रही है.
पिछले दिनों दुमका में मुख्यमंत्री ने कहा था कि यह छात्रवृत्ति घोटाला रघुवर सरकार के कार्यकाल में हुआ था. दिल्ली के अखबारों में इस घोटाले से संबंधित प्रकाशित खबरों का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा था कि डीबीटी में बड़े पैमाने पर बच्चों की छात्रवृत्ति मारी गयी है. बच्चों की छात्रवृत्ति का यह घोटाला बहुत लंबा-चौड़ा और करोड़ों का है.
फर्जीवाड़ा करनेवाला गिरोह है सक्रिय
अल्पसंख्यक विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति में फर्जीवाड़ा करनेवाला गिरोह राज्य में सक्रिय है. यह गिरोह पहले अल्पसंख्यक समुदाय के जरूरतमंद लोगों की तलाश करता है. फिर उन्हें सऊदी अरब से मदद दिलाने के नाम पर उनके आधार कार्ड और बैंक खाते की जानकारी लेता है.
मांडर की 47 वर्षीय गुलशन आरा व लोहरदगा की रहने वाली रजिया खातून को इसी तरह की जानकारी देकर बैंक खाता व आधार की जानकारी ली गयी. गिरोह के सदस्य ऐसे लोगों को भी छात्रवृत्ति दिलाते हैं, जो या तो विद्यार्थी नहीं या स्कूल ही नहीं जाते हैं. राशि उनके खाते में आने के बाद कुछ राशि उन्हें देखकर शेष राशि खुद रख लेते हैं.
कैसे हुआ खुलासा
मीडिया में आयी रिपोर्ट में बताया गया है कि राज्य के अल्पसंख्यक छात्रों को मिलनेवाली प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति वितरण में बड़ा घोटाला हुआ है. डीबीटी के तहत छात्रों के खाते में जानेवाली इस राशि का बड़ा हिस्सा सरकारी सिस्टम में बैठे लोगों ने बैंककर्मियों और बिचौलियों की मिलीभगत से हड़प लिया.
रिपोर्ट के अनुसार झारखंड में जब भाजपा की रघुवर सरकार थी, तब तत्कालीन मुख्य सचिव डीके तिवारी को केंद्रीय अल्पसंख्यक कल्याण सचिव ने पत्र लिखकर चेताया था कि छात्रवृत्ति वितरण में गड़बड़ियां हो रही है, इसे तत्काल रोकने के उपाय किये जाने चाहिए. लेकिन तब सरकार के उच्चाधिकारियों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया और छात्रवृत्ति की बंदरबांट जारी रही.(UNA)

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