नागपुर, वायदा बाजार के नाम पर लोगों को करोड़ों रुपये का चूना लगाने वाले मेट्रो विजन बिल्डकॉन कंपनी के संचालक महाजनवाड़ी, हिंगना रोड निवासी विजय रामदास गुरनुले (39) को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया

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नागपुर, वायदा बाजार के नाम पर लोगों को करोड़ों रुपये का चूना लगाने वाले मेट्रो विजन बिल्डकॉन कंपनी के संचालक महाजनवाड़ी, हिंगना रोड निवासी विजय रामदास गुरनुले (39) को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. पिछले 5 दिनों से राणाप्रतापनगर थाने की टीम उसकी तलाश में जुटी थी. गुरुवार की रात उसे शेगांव से गिरफ्तार कर लिया गया. इस प्रकरण में पुलिस गुरनुले सहित 10 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है. पकड़े गए अन्य आरोपियों में ज्ञानेश्वर बावने, आनंदनगर निवासी जीवनदास आनंदराव दंडारे (52), नीलडोह निवासी रमेश सूरजलाल बिसेन (38), अमरनगर निवास अतुल युवराज मेश्राम (29), महाजनवाड़ी, हिंगना रोड निवासी अविनाश महादेवराव महाडोले (38), सोमलवाड़ा चौक निवासी राजू नागोराव मोहुर्ले (48), वानाडोंगरी निवासी श्रीकांत केशव निकुरे (24) और ब्रम्हपुरी निवासी देवेंद्र भीमराव गजभिए (34) का समावेश है. सभी आरोपियों को न्यायालय ने पुलिस हिरासत में रखने के आदेश दिए है. पुलिस ने सुजाता लेआउट, साईनगर निवासी गणेश चाफले (39) की शिकायत पर मामला दर्ज किया है.
रियल इस्टेट से शुरु हुई धोखाधड़ी
गुरनुले ने वर्ष 2015 में मेट्रोविजन बिल्डकॉन नामक कंपनी की स्थापना की. लोगों को अपने व्यापार में पैसा निवेश कर भारी मुनाफा कमाने का लालच दिया. सुरक्षा के तौर पर वह निवेशकों को अपने लेआउट के प्लाट नोटरी करके देता था. सबसे पहले उसने वर्धा के कारंदा घाड़गे में 2.25 हेक्टेयर जमीन खरीदी. इसपर लेआउट डालकर प्लाट बेचे. इसके बाद रोशन कड़ू नामक व्यक्ति की वानाडोंगरी परिसर में स्थित जमीन को अपना बताकर लोगों को प्लाट बेच डाले. इससे वह निवेशकों को मुनाफे की रकम चुका देता था. इसी तरह लोगों का विश्वास बढ़ता गया. 10 हजार रुपये जमा करने वाला व्यक्ति 1 लाख रुपये जमा करने लगा और व्यापार बढ़ता गया.
इसके बाद गुरनुले ने नई योजनाएं शुरु की. उसने बताया कि कंपनी अब वायदा बाजार का व्यापार करने वाली है. वह निवेशकों की रकम स्टॉक एक्सचेंज में लगाएगा. साथ ही कंपनी द्वारा हीरे, सोना और दवाओं का व्यापार करने की भी जानकारी दी. अलग-अलग शहरों में स्विगी, जोमाटो, कैब सर्विस शुरु करने का झांसा देकर उसने निवेशकों को दोगुना मुनाफा देने का लालच दिया. 93,000 रुपये पर वह प्रतिमाह 12,500 रुपये का रिटर्न देता था. 20 महीनों में निवेश की रकम दुगनी होने के 7 पैकेज तैयार किए गए. अपना व्यापार बढ़ाने के लिए उसने शहर के नामी और पांच सितारा होटलों में सेमिनार आयोजित किए. अन्य आरोपी उसके लिए एडवाइजर एक्सपर्ट का काम करते थे. लेकिन यह व्यवसाय केवल नाम के लिए था. असल में लोगों को उनकी जमा राशि से ही रकम लौटाई जा रही थी.
क्रिप्टो करंसी का दिया झांसा
कुछ महीने तक उसने निवेशकों की रकम लौटाई, लेकिन इसके बाद हालत पतली हो गई. महीने का मुनाफा खाते में जमा नहीं होने पर निवेशकों ने गुरनुले पर दबाव डाला. उसने बताया कि वह रकम क्रिप्टो करंसी की स्कीम में ट्रांस्फर कर रहा है. इस तरह वह लोगों को बेवकूफ बनाता रहा. धीरे-धीरे उसकी धोखाधड़ी के राज खुलने लगे. गणेश चाफले ने मामले की शिकायत डीआईजी नविनचंद्र रेड्डी से की. उन्होंने डीसीपी नुरुल हसन को पूरे प्रकरण की खुद निगरानी करने को कहा. आमतौर पर धोखाधड़ी के मामलों में एफआईआर करने में देरी होती है और इसका फायदा आरोपी को मिलता है, लेकिन आला अधिकारियों के मार्गदर्शन में राणाप्रतापनगर के थानेदार भीमराव खणदाले, पीएसआई एस.जे. केंद्रे, वी.वाय. नांदगाये, एएसआई अनिल ब्राम्हणकर, हेड कांस्टेबल मनोज नागमोते, कांस्टेबल मनोज निमजे, स्वप्निल करंड, अतुल तलमले, मिलिंद मेश्राम और अश्विन चौधरी ने लगातार कई दिनों की मेहनत के बाद इस मामले के सभी मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया.(UNA)

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