125वीं नेता जी बर्थ कमेटी और नेतजी मूवमेंट

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नेता जी सुभाष चंद्र बोस की 126वीं जयंती पर विशेष
न्यू दिल्ली
23 जनवरी 22

वर्ष पर्यन्त चलने वाले जयंती समारोह का समापन दिवस आ गया। कार्यक्रम आयोजित होते रहे और औपचारिक क्रियाकलापों में लोगों की दिलचप्सी देखी गई। वास्तव में नेता जी को उनके मूल सिद्धांतों के रुप में देखना या समझने की जरूरत है। वे साम्राज्यवाद विरोधी सिद्धांत के अडिग महानायक थे। इस संदर्भ में रामगढ़ समेलन अविस्मरणीय है जिसे गैर समझौतावादी साम्राज्यवाद विरोधी समेलान के रूप में जाना जाता है। सत्ता हस्तानांतरण समझौतापरस्त नेताओं के नेतृत्व में हुआ और भीषण रक्तपात हुआ और तत्कालीन ब्रिटिश साम्राज्यवाद का हित साधन हुआ। सच्ची आजादी दिवास्वप्न बन गई। क्रांतरियों के बलिदान को व्यर्थ में गंवाने पर मजबूर होना पड़ा। चलते चलते आज उस मुकाम पर पहुंच गए हैं जहां शिक्षा, स्वास्थ, कृषि, बैंकिंग, बीमा, रेलवे हवाई अड्डे, बंदरगाह, सार्वजनिक उपक्रम आदि सब कुछ निजी हाथों में सौंपा जा रहा है। इस परिस्थिति में नेता जी को वास्तविक रूप में याद करना चुनौती है क्योंकि हम और हमारी मानसिकता को कुंद कर दिया गया है कि जिस देश में लोकतंत्र के ज़रिए लोकतंत्र को कुंद किया जाए, बेरोजगारों की भारी संख्या को भ्रमित कर देश के संसाधनों का जम कर कॉरपोरेट घरानों द्वारा शोषण हो तब सिवाए समझौता परस्त नीतियों के विरुद्ध उठ खड़े होने के आलावा कौन सा विकल्प बचता है?
संयोजक प्रभा शंकर मिश्र