न चिट्ठी न संदेश न जाने किस देश- परदेश चली गयीं बेर्नाडेक्त फ्रांसिस

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आज धर्मपरायण महिला बेर्नाडेक्त फ्रांसिस का निधन हो गया। मंगलवार को 3 बजे से मिस्सा प्रेरितों की रानी गिरजाघर में और उसके बाद कुर्जी कब्रिस्तान में ईसाई धर्मरीति के अनुसार दफन।

पटना,16 दिसम्बर। ईसाई धर्म से जुड़ी धर्मपरायण महिला बेर्नाडेक्त फ्रांसिस उर्फ शैली की मृत्यु की खबर सुनकर परिजन व ईसई समुदाय सन्न हो गए। अभी-अभी ईसाई धार्मिक स्थल वेलनकन्नी में जाकर
‘बासिलिका ऑफ़ आवर लेडी ऑफ़ गुड हेल्थ’के दर्शन करके आयी थीं।धार्मिक स्वभाव की ‘शैली’ नियमित प्रार्थना घर पर वेलनकन्नी की लेडी ऑफ गुड हेल्थ की प्रतिमा समक्ष प्रार्थना कर रही थीं। इस दौरान  मोमबत्ती की आग साड़ी में लग गयी। अपने ही चिराग से जल गयी। आज सुबह पौने दस बजे दम तोड़ दी।  वह 81साल की थीं।

बताया जाता है कि दीघा स्थित फेयर फील्ड कॉलोनी से विवाह के बाद वेलंकन्नी चर्च, जिसे ‘बासिलिका ऑफ़ आवर लेडी ऑफ़ गुड हेल्थ’ के नाम से जाना जाता है, पवित्र शहर वेलंकन्नी का एक प्रमुख पर्यटक स्थल है। सोलहवीं शताब्दी के मध्य में इस चर्च का निर्माण एक झोपड़ी की तरह किया गया था पर बाद में वर्ष 1771 में यह एक पैरिश चर्च बन गई। यहां पर शिखा सुशील, शैली,किरण, ज्योति, संध्या व अशोक गए थे।  अभी-अभी धार्मिक स्थल वेलनकन्नी के दर्शन करके आयी थीं।

बताया जाता है कि ईसाई धार्मिक स्थल वेलनकन्नी में जाकर ‘बासिलिका ऑफ़ आवर लेडी ऑफ़ गुड हेल्थ’के दर्शन करके आयी थीं।धार्मिक स्वभाव की ‘शैली’ नियमित प्रार्थना घर पर वेलनकन्नी की लेडी ऑफ गुड हेल्थ की प्रतिमा समक्ष प्रार्थना कर रही थीं। इस दौरान शनिवार को मोमबत्ती की आग साड़ी में लग गयी। वह चालीस प्रतिशत से अधिक ही जल गयी थी। घर में सयाने परिजन नहीं थे। परिजन आने के बाद उसे ले जाकर पीएमसीएच में भर्ती किया गया। यहां से किसी निजी हॉस्पिटल में लिया गया जहां आज
इलाज के दौरान सुबह पौने दस बजे दम तोड़ दी।  वह 81साल की थीं।

बताया जाता है धर्मपरायण महिला बेर्नाडेक्त फ्रांसिस उर्फ शैली का निधन की खबर फैलते ही परिजन व ईसाई समुदाय सन्न हो गये। पार्थिव शरीर घर फेयर फील्ड कॉलोनी में पहुंचने के साथ ही परिजन व अन्य लोग अंतिम दर्शन करने पहुंचने लगे। संत माइकल हाई स्कूल के प्राचार्य एडिशन आम्रस्टॉग, संत माइकल के जेसुइट सुपेरियर फादर सेराफिम, प्रभात प्रशासन के प्रबंधक ब्रदर लूकस,संत जेवियर कॉलेज बीएड के व्याख्याता दीपू,राजन क्लेमेंट साह समेत भारी संख्या में लोग आए।

बताया जाता है कि पहली बार कुर्जी पल्ली में बेतिया से पास्कल मास्टर आए थे। उसके बाद पल्ली में ईसाई समुदाय का विस्तार हुआ। स्व.पास्कल मास्टर के पुत्र स्व.फ्रांसिस पास्कल की विधवा बेर्नाडेक्त फ्रांसिस हैं।दोनों 4 पुत्र 4 लड़की हैं।न चिट्ठी न संदेश न जाने किस परदेश चली गयी..किसी की मां,किसी की दादी, नानी, मामी, भाभी,ननद, गोतनी, बड़ी मां हैं।