पंजाब राज्य से एक अच्छी खबर है, सेहत को नुकसान पहुंचाने वाले कीटनाशक का फसलों में 18 प्रतिशत प्रयोग कम हुआ है

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पंजाब राज्य से एक अच्छी खबर है। सेहत को नुकसान पहुंचाने वाले कीटनाशक का फसलों में 18 प्रतिशत प्रयोग कम हुआ है। 2018 के मुकाबले 2019 में 675 मीट्रिक टन (टेक्निकल ग्रेड) कीटनाशक की कम बिक्री हुई है। इससे कीटनाशक दवाओं के कारोबार को 355 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है। पंजाब सरकार हर साल कीटनाशक दवाओं के खिलाफ मिशन तंदुरुस्त चला रही है। इसके तहत राज्य भर की दुकानों का निरीक्षण किया जा रहा है। सरकार की इस मुहिम के साथ कृषि विभाग द्वारा फसलों में कीटनाशक के प्रयोग से सेहत को होने वाले नुकसान को लेकर जागरूक भी किया जा रहा है। इसके परिणाम भी अब आने लगे हैं। दो वर्षों के आंकड़ों को यदि देखें तो राज्य में 18 प्रतिशत कीटनाशक दवाओं का प्रयोग कम हुआ है। वर्ष 2018 के मुकाबले खरीफ सीजन 2019 के दौरान राज्य में 355 करोड़ रुपये की कीमत वाले 675 मीट्रिक टन (टेक्निकल ग्रेड) कीटनाशकों का कम प्रयोग किया गया। खरीफ 2018 के दौरान कीटनाशकों का प्रयोग 3838 मीट्रिक टन था, खरीफ 2019 के दौरान यह प्रयोग घटकर 3163 मीट्रिक टन रह गया है।
फेल नमूनों की दर में आई कमी- मिशन के तहत कीटनाशकों की दुकानों के निरीक्षण के अच्छे परिणाम सामने आए हैं। कीटनाशक दवाइयों के फेल हुए नमूनों की दर घटकर साल 2017-18 में 4.51 फीसदी, साल 2018-19 में 2.89 फीसदी और साल 2019-20 में 2.44 फीसदी रह गई है। यह पिछले सालों के दौरान एग्रोकेमिकल की गुणवत्ता में सुधार का स्पष्ट संकेत है।
पीजीआईएमईआर भी कर चुका है अध्ययन- पीजीआईएमईआर चंडीगढ़ के 2005 में हुए अध्ययन ने साबित किया था कि बठिंडा के तलवंडी ब्लॉक में नलों और जमीन के अंदर के दोनों ही तरह के पानी में हेप्टाक्लोर की मात्रा मानक सीमा से अधिक थी। हेप्टाक्लोर एक ऐसा कीटनाशक है जो वातावरण में घुल जाता है और खाद्य श्रृंखला में भी जगह बना लेता है। ऐसे कई मामले अन्य जिलों में भी सामने आए थे, जिसमें हजारों लोग कीटनाशक के कारण कैंसर की चपेट में आए थे।
राज्य के लोगों की सेहत सर्वोपरि है। सरकार इसी उद्देश्य को लेकर मिशन तंदुरुस्त चला रही है। अब परिणाम इसके आने लगे हैं। इस साल और भी अच्छे परिणाम सामने आएंगे।(UNA)