पटना। उन चूल्हों को चुनावी मौसम में फिर से आंच मिल गई है, जो कोरोना संक्रमण के खतरे के कारण लॉकडाउन के दौरान ठंडे पड़ चुके थे। पकौड़े फिर तले जा रहे हैं, लिट्टी-चोखा की छोटी-छोटी दुकानें और चाट के ठेले सज गए हैं।

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पटना। उन चूल्हों को चुनावी मौसम में फिर से आंच मिल गई है, जो कोरोना संक्रमण के खतरे के कारण लॉकडाउन के दौरान ठंडे पड़ चुके थे। पकौड़े फिर तले जा रहे हैं, लिट्टी-चोखा की छोटी-छोटी दुकानें और चाट के ठेले सज गए हैं।

खरीदारों में अधिसंख्य वे नेता-कार्यकर्ता हैं, जो पटना में टिकट की दौड़ में जमे हुए हैं। बाहर से आने वालों की काफी भीड़ है, सो दुकानदारी अच्छी चल रही है। लॉकडाउन समाप्त होने के बाद कुछ शर्तो के साथ छूट मिली, पर अभी भी लोग बाहर खाने से परहेज कर रहे हैं। लेकिन जो लोग बाहर से आ रहे हैं, उनके लिए मजबूरी है। हर दिन नेता और उनके समर्थक बड़ी संख्या में आ रहे हैं। रेस्टोरेंट में या ठेलों पर लिट्टी-चोखा, चाट-पकौड़े खाने वालों की संख्या तीस फीसद पर सिमटी थी। वह तेजी से बढ़ गई है। पटना नगर फुटपाथ दुकानदार हॉकर यूनियन के अध्यक्ष अश्फाक खान ने बताया कि स्थानीय लोग रेस्टोरेंट से ऑनलाइन ही खाना घर पर मंगा रहे हैं। वे अभी भी वहां जाकर खाने से बहुत हद तक परहेज कर रहे हैं। छोटे होटल बाहर से आने वाली भीड़ पर निर्भर हैं। पैसेंजर ट्रेनों के नहीं चलने से यह भीड़ भी सीमित है। स्थानीय लोग घर से खाकर निकलते हैं। ऐसे में खान-पान का तीस फीसद ही कारोबार हो रहा था, लेकिन चुनाव की घोषणा के बाद इसमें दस फीसद की तत्काल वृद्धि हो गई है। यूनियन के महासचिव शहजादे ने कहा कि टिकट की दौड़ में शामिल नेताओं के साथ उनके कार्यकर्ता भी होते हैं। इससे खान-पान व्यवसाय को बल मिल रहा है। रेस्टोरेंट व्यवसायी हेमंत ने कहा कि टिकट देने में विलंब हुआ तो यह भीड़ शहर में टिकी रहेगी और 60 फीसद तक कारोबार कवर हो जाएगा। सभा-संगोष्ठी, रैली का सिलसिला शुरू हुआ तो कारोबार के पूरी तरह से पटरी पर लौटने की भी उम्मीद है।