पटना- उत्तर बिहार की लाइफलाइन महात्मा गांधी सेतु के पूर्वी लेन पर वाहनों का परिचालन जल्द ही बंद होगा, इसकी तैयारी शुरू हो चुकी है

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पटना- उत्तर बिहार की लाइफलाइन महात्मा गांधी सेतु के पूर्वी लेन पर वाहनों का परिचालन जल्द ही बंद होगा। इसकी तैयारी शुरू हो चुकी है। वैशाली के डीएम ने परिचालन बंद करने की कार्रवाई पूरी करने के लिए एसपी और हाजीपुर एसडीओ को पत्र लिखा है। इसके साथ ही इस लेन के नीचे अतिक्रमण हटाने के लिए भी डीएम ने अधिकारियों को पत्र लिखा है। महात्मा गांधी सेतु प्रमंडल के राष्ट्रीय उच्च पथ के कार्यपालक अभियंता ने सात अगस्त को डीएम को पत्र लिखा था। इस पत्र में इन्होंने बताया कि महात्मा गांधी सेतु के नव निर्मित पश्चिमी लेन पर वाहन चलने लगी हैं। ऐसे में पूर्वी लेन को तोडकर इसका पुर्ननिर्माण कराना है। इसके लिए पथ निर्माण विभाग के अपर सचिव की ओर से पश्चिमी लेन में दोनों तरफ से वाहनों के परिचालन के पायलट टेस्ट का निर्देश मिला है। इसके बाद डीएम ने हाजीपुर से पटना और पटना से हाजीपुर की तरफ से वाहनों का परिचालन पश्चिमी लेन से करते हुए पूर्वी लेन पर वाहनों का परिचालन बंद करने का आदेश मांगा था।

गडकरी ने गांधी सेतु में पुनर्निर्मित लेन का किया था उद्घाटन- पुनर्निर्मित महात्मा गांधी सेतु को जनता के लिये एक इंजीनियरिंग चमत्कार और लाइफलाइन करार देते हुए केंद्रीय सड़क मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि सरकार राज्य में बुनियादी संरचना को बेहतर बनाने के लिये पुलों और राजमार्गों का जाल बिछा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि बिहार में आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देने और रोजगार के अवसर पैदा करने के लिये कई कदम उठाये जा रहे हैं। वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से 1,742 करोड़ रुपये की लागत से 4-लेन पुल के दो पुनर्निर्मित लेन का उद्घाटन करते हुए, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री ने कहा कि इसके अलावा, गंगा नदी पर 10,338 करोड़ रुपये की लागत वाली अन्य पुल परियोजनाएं हैं, जो राज्य की अर्थव्यवस्था को बदल देंगी। उन्होंने कहा कि हाजीपुर को पटना से जोड़ने वाला पुनर्निर्मित गांधी सेतु देश में अपनी तरह का अकेला है और इस जटिल संरचना में 66 हजार टन इस्पात का उपयोग किया गया है। पुनर्निर्माण परियोजना के तहत मौजूदा कंक्रीट संरचना को नये स्टील डेक सुपरस्ट्रक्चर से बदल दिया गया है। उन्होंने कहा कि पुल की डिजाइनिंग आईआईटी रुड़की द्वारा की गयी है और अंतरराष्ट्रीय सलाहकारों से इसके लिए सलाह ली गयी है। उन्होंने कहा कि पांच किलोमीटर लंबे महात्मा गांधी सेतु के शेष दो लेन उत्तर बिहार और दक्षिण बिहार को जोड़ते हैं। इनसे रोजाना करीब एक लाख यात्री वाहन गुजरते हैं। ये दिसंबर 2021 तक तैयार हो जायेंगे। मंत्री ने कहा कि इस पुल से उत्तरी दिशा में हाजीपुर, छपरा, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, दरभंगा, मधुबनी, सीतामढ़ी, सीवान और पूर्वी उत्तर प्रदेश और दक्षिणी दिशा में पटना, आरा, अरवल, जहानाबाद, नालंदा, गया, औरंगाबाद और झारखंड को लाभ मिलता है। उन्होंने कहा कि मौजूदा पुल के नवीकरण में कई बाधाओं का सामना करना पड़ रहा था लेकिन अंततः इसके नवीकरण के लिए तकनीकी अनुसंधान ने मार्ग प्रशस्त किया। उन्होंने कहा कि मौजूदा पुराने महात्मा गांधी सेतु के अलावा, 2,926 करोड़ रुपये की लागत से गंगा पर समानांतर 5 किलोमीटर लंबा और 4-लेन पुल का निर्माण किया जायेगा। उन्होंने कहा कि परियोजना पर काम अक्टूबर में शुरू होगा और मार्च 2024 तक पूरा होगा। उन्होंने कहा, ‘नया पुल देश का पहला पुल होगा, जो 242 मीटर ऊंचा होगा और उसके नीचे से जहाज गुजर सकेंगे।’ आगामी पुलों का विवरण प्रदान करते हुए, मंत्री ने कहा कि कोशी नदी पर 1,478 करोड़ रुपये के पुल का निर्माण शुरू होगा, जो नेपाल, पश्चिम बंगाल और उत्तर पूर्वी राज्यों को जोड़ने के अलावा भागलपुर और मधेपुरा के बीच कनेक्टिविटी लिंक के रूप में काम करेगा। अन्य पुलों में भागलपुर और नौगछिया और गंगा पर भोजपुर-बक्सर पुल को जोड़ने के लिए 1,100 करोड़ रुपये का विक्रमशिला पुल शामिल है, जो उत्तर प्रदेश को कनेक्टिविटी प्रदान करेगा और 2021 से पहले पूरा हो जाएगा।(UNA)