पुनर्वसु नक्षत्र के पहले ही दिन आसमान से पानी की बूंदों के रूप में सोना बरसा। इससे खेतों में मर रहे बिचड़ों को संजीवनी मिल गई।  निराश किसानों के चेहरे खिल गए और वे मन मिजाज बनाकर खेतों में उतर गए। वैज्ञानिक भी रविवार की वर्षा को सूखे की स्थिति को नियंत्रित करने में सहायक मान रहे हैं।

सूखे की चपेट में पड़े किसानों को रविवार की वर्षा ने बड़ी राहत दी है। बीज डालने का अंतिम नक्षत्र आद्रा बीते अभी 24 घंटे भी नहीं हुआ कि पुनर्वसु नक्षत्र ने किसानों को निहाल कर दिया। राज्य के जो 35 प्रतिशत किसान अब तक बिचड़ा नहीं गिरा पाए थे वह इस काम में जुट गए। शेष 65 प्रतिशत किसानों को बिचड़ा पटाने की समस्या दूर हो गई। इस वर्षा से खेतों में पीला पड़ा रहा बिचड़ा एक-दो दिन में अपने रंग में आ जाएगा।

राज्य में रविवार को दिनभर रुक-रुककर वर्षा होती रही। राज्य में औसत 13.8 मिलीमीटर वर्षा हुई। शनिवार  तक राज्य में 50 प्रतिशत वर्षा की कमी थी। बिचड़ा मात्र 65 प्रतिशत ही गिराया गया था। उस कमी को यह वर्षा पाट देगी। बिचड़ा गिराने का काम भी तेज होगा। खास बात यह है कि सबसे अधिक बारिश वहीं हुई जहां इसकी ज्यादा जरूरत थी। हालांकि पटना जिला इसका अपवाद रहा।