पटना-बिहार में उत्पन्न हो सकती है सूखे की स्थिति : CM नीतीश

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मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि दोनों सदनों के सदस्यगण यह जान लें कि पर्यावरण में बहुत तरह का परिवर्तन आ गया है। 1966 में सूखे की भयंकर स्थिति उत्पन्न हुई थी और उस समय राहत के लिए सरकारी तंत्र भी नहीं के बराबर था। इस बार जिस प्रकार से जेठ माह में 20 से 25 दिनों तक पुरवइया हवा चली है, उससे यह साफ हो गया है कि सावन के महीने में धूल उड़ेगी। इसलिए हमें अंदेशा है कि इस बार भी बिहार में सूखे की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। हालांकि कुदरत की कृपा हो जाय तो कुछ राहत मिल सकती है।

सीएम ने कहा कि मिथिला क्षेत्र में भूजल स्तर इतना नीचे चला जाएगा इसकी परिकल्पना किसी ने नहीं की थी। इससे स्पष्ट है कि भयंकर स्थिति आने वाली है। कुछ राज्यों में वर्षा हो रही है जहां से नदियों के माध्यम से बिहार में भी बाढ़ के हालात पैदा हो सकते हैं,  लेकिन जहां वर्षा होती थी वहां न के बराबर वर्षा हो रही है। इसलिए सूखे का खतरा ज्यादा है। ऐसी स्थिति में नई-नई बीमारियां भी पनपती हैं।

उन्होंने कहा कि इस बार लू और वज्रपात का कहर भी काफी लोगों को झेलना पड़ा है। इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए हम सभी को प्रकृति के प्रति सजग होना पड़ेगा। दोनों सदनों के सदस्यों को प्राकृतिक चीजों के बारे में जागरूक होना पड़ेगा। विधानमंडल सत्र के अलावा हर क्षेत्र से जुड़े विषयों पर भी यहां अलग से विचार-विमर्श होना चाहिए, जिसमें अनुभव के आधार पर सदस्यगण अपनी बातें रख सकें। विधानसभा के अध्यक्ष और विधान परिषद के कार्यकारी सभापति से आग्रह किया कि विधानमंडल सत्र से अलग एक्सपर्ट और अधिकारियों की उपस्थिति में सूखे का खतरा, बाढ़ की आशंका, पर्यावरण के प्रति सजगता के साथ ही स्वच्छता जैसे विषयों पर बिना देर किये इंटरेकशन का कार्यक्रम निर्धारित करिये। इस इंटरेकशन में सभी सदस्यगण अपने-अपने क्षेत्र के बारे में अपनी बातें रखेंगे जो रिकार्डेड होगा। कार्यक्रम के माध्यम से जो भी समस्याएं सामने आएंगी, उसके निराकरण के लिए पूरी गंभीरता के साथ अविलम्ब कार्रवाई की जाएगी, ताकि लोगों को राहत मिल सके। इसमें जो भी अधिकारी लापरवाह पाए जाएंगे, उनके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।