पटना: राष्ट्रीय राजनीति के दिग्गज नेता और बिहार में दलितों के ‘राम’ रामविलास पासवान के निधन के बाद सियासी गलियारों में शोक की लहर

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पटना, राष्ट्रीय राजनीति के दिग्गज नेता और बिहार में दलितों के ‘राम’ रामविलास पासवान (Ram Vilas Paswan Death) के निधन के बाद सियासी गलियारों में शोक की लहर है। बिहार विधानसभा चुनाव की वोटिंग से पहले पासवान के निधन से लोकजनशक्ति पार्टी (LJP) को बड़ा झटका लगा है। हालांकि विश्लेषकों का कहना है कि पार्टी को सहानुभूति वोट मिल सकते हैं। बिहार चुनाव में LJP एनडीए से अलग होकर चुनाव लड़ रही है। इस बीच, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने पासवान को श्रद्धांजलि देते हुए एक ऐसा बयान दिया है जिसके कई सियासी मायने निकाले जा रहे हैं।
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LJP को मिलेंगे सहानुभूति वोट?
बिहार की राजनीति में पासवान सभी वर्गों ने नेता माने जाते थे। अगड़े, पिछड़े और दलितों के बीच उनकी समान पैठ थी। पासवान ने बेटे चिराग को पार्टी की जिम्मेदारी दी थी। चिराग ने बिहार चुनाव की घोषणा से पहले ही जेडीयू और नीतीश कुमार पर जमकर हमला बोला और एनडीए से अलग होकर चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया। माना जा रहा है कि त्रिकोणीय संघर्ष में सबसे ज्यादा नुकसान जेडीयू को होगा। विश्लेषकों के अनुसार, एलजेपी एनडीए के वोट बैंक में सेंध लगा सकती है।
शाह का बयान नीतीश के लिए संदेश?
पासवान के निधन के बाद शाह ने श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि भारतीय राजनीति में एक शून्य पैदा हो गया है और उनकी कमी भारतीय राजनीति में सदैव खलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि मोदी सरकार उनके बिहार के विकास के सपने को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध रहेगी। शाह के इस बयान के कई मायने निकाले जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि शाह के बयान सीएम नीतीश कुमार के लिए एक संदेश भी है।
बीजेपी को याद है 2013 और 2015!
दरअसल, 2010 के विधानसभा चुनाव में एनडीए का हिस्सा होते हुए भी नीतीश ने नरेंद्र मोदी को प्रचार में शामिल करने से मना कर दिया था। इसके बाद 2013 में नीतीश कुमार ने एडनीए से अलग होने का फैसला किया। 2015 के विधानसभा चुनाव में नीतीश लालू यादव की आरजेडी के साथ गठबंधन करके चुनाव लड़े थे और बीजेपी को धूल चटा दी थी। 2017 में नीतीश ने आरजेडी से रिश्ता तोड़ भगवा दल संग फिर आ आ गए लेकिन बीजेपी नीतीश के दिए पुराने घावों को भूली नहीं है।
LJP-BJP को होगा सियासी लाभ?
पासवान के निधन के बाद पीएम नरेंद्र मोदी और शाह के बयान को सीएम नीतीश के लिए संदेश को तौर देखा जा रहा है। चिराग ने पहले ही घोषणा कर दी थी कि उनका गठबंधन बीजेपी के साथ है और वह भगवा दल के खिलाफ अपना उम्मीदवार नहीं उतारेगी। ऐसे में जेडीयू को LJP के कैंडिडेट कड़े त्रिकोणीय मुकाबले में पहुंचा सकते हैं। इन सीटों पर LJP अगर एनडीए के वोटबैंक में सेंध लगाने में सफल हुई तो निश्चित तौर पर जेडीयू की सीटें घटेंगी। वहीं, 110 सीटों पर चुनाव लड़ रही बीजेपी के लिए हालात उतने मुश्किल नहीं होंगे क्योंकि इन सीटों पर एनडीए के वोटबैंक के साथ-साथ LJP का वोट भी उसे मिल सकता है। ऐसे में चुनाव परिणाम में बीजेपी को बढ़त मिल सकती है।(UNA)

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