पटना, लोक जनशक्ति पार्टी के संस्‍थापक व पूर्व केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान के निधन से खाली हुई राज्‍यसभा सीट के लिए नामांकन की अंतिम तारीख तीन दिसंबर है

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पटना, लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) के संस्‍थापक व पूर्व केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान (Ram Vilas Paswan) के निधन से खाली हुई राज्‍यसभा सीट (Rajya Sabha Seat) के लिए नामांकन (Nomination) की अंतिम तारीख तीन दिसंबर है। राष्‍ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने इसके लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता व पूर्व उपमुख्‍यमंत्री सुशील मोदी (Ex Dy.CM Sushil Modi) का नाम फाइनल कर दिया है। महागठबंधन (Mahagathbandhan) ने भी किसी दलित नेता को मैदान में उतारने का फैसला किया है। बताया जा रहा है कि इसके लिए राष्‍ट्रीय जनता दल (RJD) ने राम विलास पासवान की पत्‍नी रीना पासवान (Rina Paswan) को मैदान में उतारने का ऑफर दिया है, जिसपर एलजेपी अध्‍यक्ष चिराग पासवान (Chirag Paswan) को अगले बुधवार तक फैसला लेना है। उन्‍होंने अपने पत्‍ते नहीं खोल कर सस्‍पेंस को बरकरार रखा है। ऐसे में सवाल यह है कि क्‍या खुद को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) का हुनमान (Hanuman) कहते रहे चिराग पासवान बीजेपी के खिलाफ जंग लड़ेंगे? लेकिन इससे भी बड़ा सवाल यह है कि आरजेडी क्‍या फैसला लेता है?
एनडीए से सुशील मोदी बने राज्‍यसभा सीट के उम्‍मीदवार
विदित हो कि एनडीए ने वैश्य समाज से आने वाले सुशील मोदी को राज्‍यसभा सीट के लिए उम्‍मीदवार बनाया है, जो बुधवार को नामांकन दाखिल करेंगे। उधर, आरजेडी चाहता है कि दलित नेता के निधन से खाली हुई इस सीट के लिए किसी दलित को ही मौका दिया जाए। लिस्‍ट में कई नाम हैं, लेकिन आरजेडी ने राम विलास पासवान की पत्‍नी के नाम का ऑफर देकर एक तीर से कई शिकार करने की कोशिश की है। इसपर फैसला चिराग पासवान को करना है। उनके फैसले के बाद आरजेडी नेतृत्व भी अपना अंतिम फैसला करेगा। हालांकि, आरजेडी को उम्‍मीद है कि चिराग पासवान इस ऑफर को स्वीकार कर लेंगे।
विधानसभा चुनाव में विरोध के कारण चिराग से खफा जेडीयू
रामविलास पासवान बतौर एनडीए उम्‍मीदवार पिछले वर्ष राज्‍यसभा के लिए निर्विरोध निर्वाचित हुए थे। उन्‍हें बीजेपी के अलावा जनता दल यूनाइटेड (JDU) का भी समर्थन मिला था। लेकिन  बार हालात बदले हुए हैं। एलजेपी अध्‍यक्ष चिराग पासवान ने बिहार विधान सभा चुनाव में मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) के नेतृत्‍व में चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया। उन्‍होंने चुनाव के दौरान बीजेपी को वॉक ओवर दे दिया, लेकिन जेडीयू उम्‍मीदवारों के खिलाफ अपने उम्‍मीदवार खड़े कर उनके वोट काटने में भी कोई कसर नहीं छोड़ी। इससे एनडीए को नुकसान हुआ। लेकिन गठबंधन में जेडीयू की सीटें कम करने के अपने मकसद में चिराग कामयाब रहे। विधानसभा चुनाव के दौरान एनडीए में जेडीयू के खिलाफ मोर्चा खोले रहे चिराग पासवान ने खुद को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) का हनुमान बताते हुए बीजेपी का खुला समर्थन भी किया। खास बात यह भी है कि इस बगावत के लिए एनडीए में चिराग पासवान पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। उनकी पार्टी अभी भी केंद्र में एनडीए का हिस्‍सा है। इससे जेडीयू में नाराजगी दिखती रही है।(UNA)