पटना-वाहन का शीशा टूटा तो तेजप्रताप के बाउन्सरों ने पत्रकार को पीटा

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लालू प्रसाद के बडे़ पुत्र व विधायक तेज प्रताप यादव के बाउन्सरों ने वेटनरी कॉलेज बूथ से बाहर मीडियाकर्मियों की पिटाई कर दी। वह तेज प्रताप के वाहन का शीशा टूट जाने से नाराज हो गये।

इस बीच तेज प्रताप ने आरोप लगाया कि उनपर हमला किया गया और हमले में उनकी गाड़ी का शीशा टूट गया। साथ ही ड्राइवर की आंख में चेाट लग गई। सुरक्षकर्मियों ने उन्हें बचाया।

तेज प्रताप यादव बूथ पर ई रिक्शा से पहुंचे। उनके साथ उनके सुरक्षाकर्मी भी थे। सुरक्षाकर्मी वाहनों में थे। बूथ के पहले ही मीडियाकर्मियों की भीड़ ने उन्हें घेर लिया तो तेज प्रताप भी अपनी गाड़ी में चले गये। उन्होंने कहा कि रिक्शा आम आदमी की सवारी है, इसलिये वोट देने वह आम आदमी की तरह पहुंचे हैं। वह आम आदमी के साथ रहते हैं।इस बीच पत्रकारों से बात करने के क्रम में उनकी गाड़ी आगे बढ़ गई और एक पत्रकार के पैर में चोट लग गई। भीड़ अधिक हो जाने के कारण तेज प्रताप के वाहन का शीशा टूट गया। इसी घटना के बाद बाउन्सरों ने कुछ पत्रकारों की पिटाई कर दी।

पटना-बूथ पर लालू के अंदाज में दिखीं पूर्व सीएम राबड़ी

वेटनरी कॉलेज बूथ पर पहली बार राजद प्रमुख लालू प्रसाद नहीं दिखे। लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने उनकी कमी नहीं खलने दी। राबड़ी साढ़े दस बजे अपनी पुत्री व पाटलीपुत्र संसदीय क्षेत्र की उम्मीदवार मीसा भारती के साथ बूथ पर पहुंची। वोट देने के बाद मीडिया कर्मियों ने उन्हें घेर लिया। उन्होंने बूथ पर कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया, यही अंदाज लालू प्रसाद का होता था। लेकिन बार निकलते ही उसी अंदाज में विरोधियों पर फूट पड़ी।

राबड़ी देवी ने कहा कि नरेन्द्र मोदी चुनाव परिणाम के पहले ही संन्यास ले लिये। पांच साल की गलतियों की माफी तो ईश्वर से मांगनी थी लेकिन यह रिजल्ट के बाद भी हो सकता था। वह तो पहले ही गुफा में चले गये। हार की आशंका उन्हें पहले ही हो गई। ऐसा तो राजनीति में होता है। भाजपा की विदाई हो ही गई, बिहार में भी महागठबंधन के सभी 40 उम्मीदवार जीत रहे हैं।

प्रज्ञा ठाकुर के बयान पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की टिप्पणी के बारे में उन्होंने कहा कि पूरे चुनाव तो चुप रहे। अब बोल रहे हैं। उनको भी लग गया है कि भाजपा हार गई। फिर पलटी मारने की जुगाड़ में हैं।मीसा भारती ने कहा कि पूरे चुनाव में कहीं भी नरेन्द्र मोदी ने अपने काम पर चर्चा नहीं की। पांच साल में एकसी कोई उपलब्धि नहीं है जिस पर वह वोट मांग सकते थे। लिहाजा पूरे चुनाव जनता को ठगने की कोशिश करते रहे।

पटना-तेजस्वी वोट देने नहीं पहुंचे, वोटर लिस्ट में भी गड़बड़ी

नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव रविवार को अपनी बहन मीसा भारती के लिए वोट नहीं कर पाये। प्रचार खत्म होने के बाद शनिवार को ही वह दिल्ली चले गये और आज वोटिंग के दिन भी नहीं लौटे। उधर वोटर लिस्ट में भी उनके नाम के सामने तस्वीर किसी दूसरे की लगी हुई है।

राजद सूत्रों ने रविवार की सुबह तक यह सूचना दी कि दो बजे तक नेता प्रतिपक्ष पटना आ जाएंगे और वोट देंगे। लेकिन शाम छह बजे तक वह वेटनरी कॉलेज बूथ पर नहीं पहुंचे।

इसी बीच यह चर्चा भी होने लगी कि वोटर लिस्ट में उनके नाम के साथ दूसरे की तस्वीर होने के कारण भी वह नहीं आये। हालांकि पूर्व सीएम राबड़ी देवी ने इस बावत पूछने पर बूथ के बाहर बताया कि यह चुनाव आयोग की गड़बड़ी है।

पटना-मतदान समाप्त होते ही जीत-हार के गुना-भाग में जुटीं पार्टियां

रविवार को आखिरी चरण का मतदान समाप्त होते ही बिहार की राजनीतिक पार्टियां गुना-भाग में जुट गई हैं। किस दल और गठबंधन को कितनी सीटें मिलेंगी, इसका आकलन सभी दलों के नेताओं ने शुरू कर दिया। वैसे मतगणना होने तक सभी दलों के नेता सभी सीटों पर जीत-हार का दावा करते रहेंगे, लेकिन कार्यकर्ता व समर्थकों से फीडबैक लेकर कुछ निश्चिंत दिखे तो कुछ की बेचैनी बढ़ गई है।

दरअसल, इस बार पिछले चुनाव की तुलना में दल व समीकरण सब कुछ अलग-अलग थे। पिछली बार जो साथ थे, इस बार विरोध में हो गए जबकि जो विरोध में थे, वे साथ हो गए। पिछले चुनाव में एनडीए में भाजपा, लोजपा, रालोसपा व हम एक साथ थी। जबकि 2014 में जदयू की राहें जुदा थी। वहीं  राजद व कांग्रेस एक गठबंधन में था। इस कारण पिछला चुनाव बिहार में त्रिकोणीय संघर्ष वाला रहा। हालांकि इस त्रिकोणीय संघर्ष का लाभ एनडीए को मिला। एनडीए को 31 सीटें मिलीं। इसमें भाजपा को 22, लोजपा को छह और रालोसपा को तीन सीटें मिलीं। वहीं विपक्षी खेमे में राजद को चार, कांग्रेस व जदयू को दो-दो तो एनसीपी के हिस्से में एक सीट आई थी।

वहीं, इस बार के लोकसभा चुनाव का समीकरण ऐसा बना कि कुछेक सीटों पर बागियों को छोड़ दें तो प्राय: सभी सीटों पर सीधा मुकाबला एनडीए व गठबंधन के बीच ही रहा। एनडीए में जदयू, भाजपा व लोजपा हैं। जदयू व भाजपा 17-17 तो लोजपा छह सीटों पर चुनाव लड़ी। दूसरी ओर महागठबंधन में राजद के अलावा कांग्रेस, रालोसपा, हम , वीआईपी व माले शामिल हैं। राजद 19, कांग्रेस नौ, रालोसपा पांच, वीआईपी व हम तीन-तीन तो माले ने एक सीट पर चुनाव लड़ा है। मतदान समाप्त होते ही सभी दलों के नेता अपने-अपने इलाकों से जमीनी फीडबैक लेने में जुट गए। खासकर अंतिम चरण में आठ संसदीय क्षेत्रों में हुए मतदान पर पार्टी नेता क्षेत्र से फीडबैक लेते रहे। पार्टी मुख्यालयों में बैठे नेता इन क्षेत्रों से मिले फीडबैक को समेकित करते रहे। अंतिम चरण का चुनाव होने के कारण सभी क्षेत्रों को मिलाकर पार्टी नेता उसे अपने-अपने दल के खाते में जोड़ते रहे। फीडबैक का असर भी देखा गया। जो नेता चुनाव संपन्न होने तक सभी 40 सीटों पर जीत का  दावा कर रहे थे, मतदान समाप्त होने के बाद आंकड़ों में कुछ कमी कर दी। हालांकि दावों में अधिक कमी नहीं आई। एनडीए और गठबंधन के नेता 30 से 35 सीटों पर जीत का दावा करते देखे गए। वैसे यह तो 23 मई को ही पता चल सकेगा कि किस दल और गठबंधन के दावों की हकीकत क्या है।