पटना, । कभी केंद्र की अटल बिहारी वाजपेयी (Atal Bihari Vajpayee) सरकार में मंत्री रहे शाहनवाज हुसैन (Shahnawaz Hussain) को भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने बिहार में विधान पार्षद (MLC) बनाकर कई कयासों को जन्म दे दिया है। बड़ा सवाल यह है कि आगामी मंत्रिमंडल विस्तार (Cabinet Expansion) में उन्हें कौन सी कुर्सी दी जाएगी? माना जा रहा है कि शाहनवाज को कोई मंत्रिमंडल में कोई बड़ा विभाग दिया जा सकता है। उन्‍हें बिहार में मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) के समकक्ष बीजेपी का चेहरा माना जा रहा है। एनडीए में नीतीश के समकक्ष बीजेपी के चेहरा राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की नीतीश कुमार सरकार (Nitish Kumar Government) में बीजेपी का सबसे बड़ा चेहरा शाहनवाज ही होंगे। इसे देखते हुए कहा जा रहा है कि संभव है कि उन्हें आगे कोई और बड़ी जिम्मेदारी भी दी जाए। शाहनवाज केंद्र की अटल बिहारी सरकार में वर्तमान मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार के साथ केंद्रीय मंत्री रह चुके हैं। बीजेपी उनमें बिहार एनडीए में मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार के समकक्ष मजबूत चेहरा देख रही है। वे बीते बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान मुसलमानों की अनदेखी का आरोप झलती रही बीजेपी के मुस्लिम चेहरा भी बन गए हैं। लेकिन सवाल यह है कि उन्‍हें नीतीश मंत्रिमंडल में कौन सी कुर्सी दी जाएगी। पार्टी को मिलेगी मजबती, चर्चा में कई विभाग बीजेपी ने अपने केंद्रीय स्‍तर के बड़े नेता को बिहार की राजनीति में उतारा है तो उसके मायने तो तलाशे ही जाएंगे। माना जा रहा है कि शाहनवाज को मंत्रिमंडल में कोई महत्‍वपूर्ण विभाग दिया जा सकता है। उन्‍हें बीजेपी के पास रहे किसी बड़े विभाग को दिए जाने के कयास लगाए जा रहे हैं। चर्चा में वित्त, वाणिज्यकर, सड़क और स्वास्थ्य आदि कई विभाग हैं। वित्त व वाणिज्यकर अभी तक बीजेपी कोटे के उपमुख्‍यमंत्री के पास रहे हैं तो सड़क और स्वास्थ्य विभाग भी बीजेपी के बड़े नेताओं के पास रहते आए हैं। हालांकि, इन राजनीतिक कयासों की पुष्टि करने के लिए बीजेपी से कोई समाने नहीं आया है। बीजेपी का संयमित बयान केवल यह है कि शाहनवाज के आने से बिहार में बीजेपी मजबूत होगी। शाहनवाज को बिहार लाने के पीछे दूरगामी रणनीति माना जा रहा है कि शाहनवाज हुसैन को बिहार लाने के पीछे बीजेपी की दूरगामी रणनीति है। उन्‍हें बिहार में कोई और बड़ी जिम्‍मेदारी भी दी जा सकती है। बीजेपी कैसे और कितना करती है उपयाग, देखना शेष बिहार बीजेपी की बात करें तो उनके कद की तुलना में कोई भी चेहरा नहीं है। बीजेपी कोटे के दोनों उपमुख्यमंत्रियों की प्रोफाइल भी शाहनवाज के सामने कमजोर है। खास बात यह भी है कि बिहार में बीजेपी व जेडीयू से जीतकर एक भी मुस्लिम विधायक सदन में नहीं पहुंच सका। हाल में जेडीयू ने दल-बदल करने वाले एक मुस्लिम विधायक को अपने पाले में किया है। ऐसे में शाहनवाज सदन में बीजेपी का मुस्लिम चेहरा बनकर उभरेंगे, यह तय है। वे विपक्षी महागठबंधन की अल्‍पसंख्‍यक राजनीति की धार कुंद करने में भी मददगार हो सकते हैं। अब देखना यह है कि बीजेपी उनका कितना और किस रूप में उपयोग करती है। शाहनवाज के सियासी कॅरियर, एक नजर शाहनवाज के सियासी कॅरियर को देखें तो उन्‍होंने 1998 में शाहनवाज किशनगंज से चुनाव लड़ा और हारे। आगे 1999 में दोबारा चुनाव हुआ तो शाहनवाज सांसद व केंद्र सरकार में राज्यमंत्री बने। सितंबर 2001 में वे नागरिक उड्डयन विभाग के कैबिनेट मंत्री बनाए गए। 2003 से 2004 तक वे कपड़ा मंत्रालय के कैबिनेट मंत्री बने। शाहनवाज को देश का सबसे कम उम्र का केंद्रीय मंत्री बनने का श्रेय है। शाहनवाज 2004 के आम चुनाव में हार गए, फिर 2006 में उपचुनाव में भागलपुर सीट से विजयी रहे। साल 2009 के संसदीय चुनाव में वे भागलपुर से दोबारा जीते। शाहनवाज मोदी लहर के दौरान 2014 के लोकसभा चुनाव में हार गए। इसके बाद वे संसदीय राजनीति की मुख्‍यधारा से दूर हो गए थे। बीजेपी ने उन्हें राष्ट्रीय प्रवक्ता बनाया।

13
261

पटना, । कभी केंद्र की अटल बिहारी वाजपेयी (Atal Bihari Vajpayee) सरकार में मंत्री रहे शाहनवाज हुसैन (Shahnawaz Hussain) को भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने बिहार में विधान पार्षद (MLC) बनाकर कई कयासों को जन्म दे दिया है। बड़ा सवाल यह है कि आगामी मंत्रिमंडल विस्तार (Cabinet Expansion) में उन्हें कौन सी कुर्सी दी जाएगी? माना जा रहा है कि शाहनवाज को कोई मंत्रिमंडल में कोई बड़ा विभाग दिया जा सकता है। उन्‍हें बिहार में मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) के समकक्ष बीजेपी का चेहरा माना जा रहा है। एनडीए में नीतीश के समकक्ष बीजेपी के चेहरा

राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की नीतीश कुमार सरकार (Nitish Kumar Government) में बीजेपी का सबसे बड़ा चेहरा शाहनवाज ही होंगे। इसे देखते हुए कहा जा रहा है कि संभव है कि उन्हें आगे कोई और बड़ी जिम्मेदारी भी दी जाए। शाहनवाज केंद्र की अटल बिहारी सरकार में वर्तमान मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार के साथ केंद्रीय मंत्री रह चुके हैं। बीजेपी उनमें बिहार एनडीए में मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार के समकक्ष मजबूत चेहरा देख रही है। वे बीते बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान मुसलमानों की अनदेखी का आरोप झलती रही बीजेपी के मुस्लिम चेहरा भी बन गए हैं। लेकिन सवाल यह है कि उन्‍हें नीतीश मंत्रिमंडल में कौन सी कुर्सी दी जाएगी।
पार्टी को मिलेगी मजबती, चर्चा में कई विभाग

बीजेपी ने अपने केंद्रीय स्‍तर के बड़े नेता को बिहार की राजनीति में उतारा है तो उसके मायने तो तलाशे ही जाएंगे। माना जा रहा है कि शाहनवाज को मंत्रिमंडल में कोई महत्‍वपूर्ण विभाग दिया जा सकता है। उन्‍हें बीजेपी के पास रहे किसी बड़े विभाग को दिए जाने के कयास लगाए जा रहे हैं। चर्चा में वित्त, वाणिज्यकर, सड़क और स्वास्थ्य आदि कई विभाग हैं। वित्त व वाणिज्यकर अभी तक बीजेपी कोटे के उपमुख्‍यमंत्री के पास रहे हैं तो सड़क और स्वास्थ्य विभाग भी बीजेपी के बड़े नेताओं के पास रहते आए हैं। हालांकि, इन राजनीतिक कयासों की पुष्टि करने के लिए बीजेपी से कोई समाने नहीं आया है। बीजेपी का संयमित बयान केवल यह है कि शाहनवाज के आने से बिहार में बीजेपी मजबूत होगी। शाहनवाज को बिहार लाने के पीछे दूरगामी रणनीति

माना जा रहा है कि शाहनवाज हुसैन को बिहार लाने के पीछे बीजेपी की दूरगामी रणनीति है। उन्‍हें बिहार में कोई और बड़ी जिम्‍मेदारी भी दी जा सकती है।
बीजेपी कैसे और कितना करती है उपयाग, देखना शेष बिहार बीजेपी की बात करें तो उनके कद की तुलना में कोई भी चेहरा नहीं है। बीजेपी कोटे के दोनों उपमुख्यमंत्रियों की प्रोफाइल भी शाहनवाज के सामने कमजोर है। खास बात यह भी है कि बिहार में बीजेपी व जेडीयू से जीतकर एक भी मुस्लिम विधायक सदन में नहीं पहुंच सका। हाल में जेडीयू ने दल-बदल करने वाले एक मुस्लिम विधायक को अपने पाले में किया है। ऐसे में शाहनवाज सदन में बीजेपी का मुस्लिम चेहरा बनकर उभरेंगे, यह तय है। वे विपक्षी महागठबंधन की अल्‍पसंख्‍यक राजनीति की धार कुंद करने में भी मददगार हो सकते हैं। अब देखना यह है कि बीजेपी उनका कितना और किस रूप में उपयोग करती है। शाहनवाज के सियासी कॅरियर, एक नजर

शाहनवाज के सियासी कॅरियर को देखें तो उन्‍होंने 1998 में शाहनवाज किशनगंज से चुनाव लड़ा और हारे। आगे 1999 में दोबारा चुनाव हुआ तो शाहनवाज सांसद व केंद्र सरकार में राज्यमंत्री बने। सितंबर 2001 में वे नागरिक उड्डयन विभाग के कैबिनेट मंत्री बनाए गए। 2003 से 2004 तक वे कपड़ा मंत्रालय के कैबिनेट मंत्री बने। शाहनवाज को देश का सबसे कम उम्र का केंद्रीय मंत्री बनने का श्रेय है। शाहनवाज 2004 के आम चुनाव में हार गए, फिर 2006 में उपचुनाव में भागलपुर सीट से विजयी रहे। साल 2009 के संसदीय चुनाव में वे भागलपुर से दोबारा जीते। शाहनवाज मोदी लहर के दौरान 2014 के लोकसभा चुनाव में हार गए। इसके बाद वे संसदीय राजनीति की मुख्‍यधारा से दूर हो गए थे। बीजेपी ने उन्हें राष्ट्रीय प्रवक्ता बनाया।

13 COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here