पत्रकारिता का अंदाज ए कमाल, कमाल खान

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कुछ लोग हैं जो वक्त के सांचे में ढल गए
कुछ लोग हैं जो वक्त के सांचे बदल गए ।

हिंदी क्षेत्र में पत्रकारिता के वरिष्ठ हस्ताक्षर और बहुमुखी प्रतिभा के धनी कमाल खान हमारे बीच नहीं रहे । टी वी पत्रकारिता के आज के दौर में चिल्ला कर सनसनी फैलाने वाले और ध्रुवीकरण फैलाने वाले पत्रकारों की भीड़ के बीच शांत, सौम्य, संतुलित और भाषाई मिठास के साथ पत्रकारिता की अलग पहचान बनाने वाले कमाल खान का जाना हिंदी बेल्ट विशेषकर उत्तर प्रदेश में एक ऐसी कमी हुई है, जो भरी ना जा सकेगी। आज के खासतौर से चुनावी माहौल में उनका यूं चले जाना एक बड़ा शून्य छोड़ गया। उनकी आवाज उनके बोलने का अंदाज हर गंभीर मुद्दों पर बेबाकी से कभी चौपाई के द्वारा, कभी शायराना तरीके से अपनी बात रखना कमाल खान को कमाल खान बनाती थी। उनके चेहरे पर हमेशा सहज, सरल भाव रहता था। उनके जाने से हिंदी-उर्दू बेल्ट की पत्रकारिता को बहुत बड़ा नुकसान हुआ है। उत्तर प्रदेश के अयोध्या जैसे संवेदनशील मुद्दे पर उनकी स्पष्टता उनकी बैलेंस रिपोर्टिंग बेहद सराहनीय रही है। हर विषय पर उनकी पकड़ ,उत्तर प्रदेश की गंगा जमुनी तहजीब, प्रदेश की सांझी विरासत हमेशा उनकी पत्रकारिता में झलकती रही है।
उन्होंने अंग्रेजी साहित्य से एमए किया, मास्को विश्वविद्यालय से दर्शन शास्त्र और रशियन भाषा की पढ़ाई की। बीए में उर्दू सीखी, पंजाबी पढ़ी, गुरमुखी से अमृता प्रीतम की किताब नबिया कलमा का अनुवाद किया। कमाल खान उर्दू कैलीग्राफी के भी जानकार थे। उन्हें क्ले मॉडलिंग, ज्वैलरी डिजाइनिंग, लैंड स्कैपिंग, आर्किटेक्चर का शौक था। वह बहुत अध्धयन शील थे।
जब वह बोलते थे तो ऐसा लगता था जैसे शब्द मोती की तरह स्क्रीन पर बिखरते जा रहे हैं उनका रिपोर्टिंग का अंदाज और प्रेजेंटेशन दोनों अपने आप में अद्भुत है। खासतौर से जब वह रिपोर्टिंग के आखिर में कोई शेर या कविता की कुछ पंक्तियां पढ़ते थे जो स्वाभाविक रूप से विषय को ज्यादा असरदार बनाती थी।

इन्होंने अपनी कैरियर की शुरआत रूसी दुभाषिया के रूप में की उसके बाद नवभारत टाइम्स से जुड़े रहे। सन् 1995 से एनडीटीवी के साथ जुड़े और अपने आखिरी वक्त तक जुड़े रहे। उन्हें कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार भी मिले जिनमें प्रतिष्ठित रामनाथ गोयनका अवॉर्ड भी उन्हें मिला तथा पत्रकारिता के क्षेत्र में देश का सर्वोच्च पुरस्कार गणेश शंकर विद्यार्थी पुरस्कार राष्ट्रपति के हाथों उन्होंने प्राप्त किया।

हिंदी टीवी पत्रकारिता में योगदान के लिए उन्हें द फैडरेशन ऑफ सार्क राइटर्स एंड लिटरेचर की ओर से सम्मानित किया गया।

वो पिछले 30 सालों से एनडीटीवी से जुड़े हुए थे वे एनडीटीवी चैनल लखनऊ ब्यूरो हेड थे। उनके परिवार में उनकी पत्नी रुचि, बेटा अमन है। उनके परिवार के प्रति हार्दिक संवेदना व्यक्त करते हुए उन्हें इस दुख को सहन करने की क्षमता देने की कामना करते हैं।

लखनऊ से अरुणिमा प्रियदर्शिनी