पेट्रोल-डीजल के दाम में कटौती क्यों? चिदंबरम ने दी यह थ्योरी तो आया धर्मेंद्र प्रधान का जवाब

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नई दिल्ली: केंद्र सरकार के पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कटौती के फैसले पर कांग्रेस सांसद पी चिदंबरम ने निशाना साधा है. चिदंबरम ने केंद्र के इस फैसले को 30 विधानसभा सीटों के लिए हुए उपचुनावों में सत्तारूढ़ भाजपा की हार से जोड़ा है. चिदंबरम ने ईंधन की कीमतों में कटौती को “उप-चुनावों का उप-उत्पाद” कहा और साथ ही कहा कि यह उनकी पार्टी की स्थिति की पुष्टि करता है कि पेट्रोल और डीजल की आसमान छूती कीमतें उच्च करों का परिणाम थीं, और उच्च कर केंद्र सरकार की “लालच” का परिणाम थे.चिदंबरम ने आज ट्वीट किया, “30 विधानसभा और 3 लोकसभा उपचुनावों के नतीजों ने उप-उत्पाद का उत्पादन किया है… केंद्र ने पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में कटौती की है!”उन्होंने कहा, “यह हमारे आरोप की पुष्टि है कि ईंधन की कीमतें मुख्य रूप से उच्च करों के कारण हैं… और हमारा आरोप है कि उच्च ईंधन कर केंद्र सरकार के लालच के कारण है.”केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान (जो एनडीए I में पेट्रोलियम मंत्री थे) ने जवाब दिया, मोदी सरकार “लोगों की खुशी के साथ-साथ दुख में भी उनके साथ रहने के लिए खड़ी है”.मंगलवार को भाजपा को हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस से (एक लोकसभा और तीन विधानसभा सीटों पर हार) और बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल (चार विधानसभा सीटों) से हार का सामना करना पड़ा. पार्टी कर्नाटक और हरियाणा में भी प्रतिष्ठा की लड़ाई हार गई.
कल रात सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क क्रमशः ₹ 5 और ₹ 10 कम किया है. सरकार ने तेल के दामों में कटौती की घोषणा करते हुए कहा कि यह किसानों को “बढ़ावा” प्रदान करेगा. जिनमें से हजारों लोग एक साल से अधिक समय से नए कृषि कानूनों का जमकर विरोध कर रहे हैं.
इस कदम का केंद्रीय मंत्रियों और भाजपा के मुख्यमंत्रियों ने स्वागत किया, जिन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को “धन्यवाद” ट्वीट किया. इसके अलावा, 10 भाजपा शासित राज्यों ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों में अतिरिक्त कटौती की घोषणा की है. इनमें से पांच राज्यों- गोवा, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और गुजरात में अगले साल मतदान होगा.
इस हफ्ते (कटौती की घोषणा से पहले) कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने सरकार को “पिकपॉकेट” कहा और कहा कि उसने 2018/19 में ₹ 2.3 लाख करोड़ और 2017/18 में ₹ 2.58 लाख करोड़ का संग्रह किया. अकेले इस वित्तीय वर्ष के अप्रैल-जुलाई में संग्रह 48 प्रतिशत बढ़कर ₹ 1 लाख करोड़ हो गया.