मित्र बनना है तो सुदामा जैसे बनोः षास्त्री

– कृष्ण सुदामा की मनोहर झांकी सजाई

बारां के निकटवर्ती गांव में श्री हनुमान जी महाराज के मंदिर परिसर में चल रही संगीत में श्रीमद् भागवत कथा का समापन भवन व प्रसाद के साथ हुआ। सातवें दिन श्री कृष्ण सुदामा मनोहर झांकी सजाई गई। अरे द्वारपालो कन्हैया से कह दो की दर पर सुदामा करीब आ गया है भजन पर परशुराम श्रोता झूम के नाचे। कथावाचक ने कहा कि मित्रता में कोई छोटा बड़ा नहीं होता। मित्रता धन पद जाति से नहीं होती मित्रता सच्चा मन का समर्पण भाव सच्चे प्रेम की परिभाषा होती है। उन्होंने कहा कि लोगों के पास निंदा करने का टीवी देखने का समय है, लेकिन ईश्वर को देने के लिए 5 मिनट का समय भी नहीं निकाल सकते। ऐसी सोच लोगों के बीच बन चुकी है कि दान नहीं करेंगे। श्री कृश्ण ने मित्रता के कारण अपनी ठुकराए का त्याग कर दौड़ कर गरीब सुदामा को अपने गले से लगाया और अपने बराबर बिठा कर सच्ची मित्रता का संदेश दिया।