बिहार-छपरा में एक पुल की अप्रोच रोड उसके उद्घाटन से पहले ही टूट गई

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बिहार में सिस्टम पर चोट करने वाली एक और घटना सामने आई है। छपरा में एक पुल की अप्रोच रोड उसके उद्घाटन से पहले ही टूट गई है। आज ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस पुल का उद्घाटन करने वाले थे। इससे पहले 15 जुलाई को गोपालगंज में सत्तरघाट ब्रिज की अप्रोच रोड टूट गई थी। फर्क बस इतना है कि उस पुल की अप्रोच रोड नीतीश कुमार द्वारा उद्घाटन करने के बाद टूटी थी। यूं तो बिहार बारिश, बाढ़ और कोरोना की मार झेल रहा है। लेकिन विधानसभा चुनाव सिर पर है। लिहाजा, उद्घाटन समारोह की प्रक्रिया भी विधिवत चालू है। इसी कड़ी में आज (12 अगस्त) मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को छपरा में बंगरा घाट मेगा ब्रिज का उद्घाटन करना था, लेकिन इस पुल की अप्रोच रोड उद्घाटन से पहली ही बह गई। बताया जा रहा है कि बैकुंठपुर में सारण बांध टूटने की वजह से बंगरा घाट मेगा ब्रिज की अप्रोच रोड टूटी है। इस पुल की लागत 509 करोड़ रुपये है। वहीं, एक महीना पहले गोपालगंज के जिस सत्तरघाट पुल की अप्रोच रोड टूटी थी उसकी कीमत 264 करोड़ थी। यानी इस बार लगभग डबल कीमत के पुल की अप्रोच रोड भी पानी का बहाव नहीं सहन कर पाई और धारा के साथ बह गई। वो नेता और अधिकारी जिन पर रही गोपालगंज पुल निर्माण की जिम्मेदारी, पढ़ें- इनसाइड स्टोरी सत्तरघाट पुल का उद्घाटन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने लॉकडाउन के दौरान ही बीते 16 जून को किया था। उद्घाटन के एक महीना बाद 15 जुलाई को पुल की अप्रोच रोड गिर गई। इस प्रोजेक्ट में पुल की लंबाई 1.44 किलोमीटर और ब्रिज के दोनों तरफ 10.15 किलोमीटर की अप्रोच रोड शामिल थी। गोपालगंज का सत्तरघाट ब्रिज 2012 से बनना शुरू हुआ था और तय समय से ज्यादा वक्त लेते हुए 2020 में जाकर तैयार हुआ। हादसे के बाद सरकार ने जांच के लिए एक टीम गठित की थी। सत्तरघाट पुल का निर्माण हैदराबाद की वशिष्टा कंस्ट्रक्शन कंपनी ने किया था। घटना के बाद कंपनी की लापरवाही की बात सामने आई थी। बताया गया था कि अप्रोच रोड के दोनों किनारों को पिचिंग कर मजबूत नहीं किया गया था। जिसके चलते गंडक नदी में 3 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया तो अप्रोच रोड पानी का प्रेशर नहीं झेल सकी और टूट गई। बता दें कि हर साल गंडक नदी में करीब 8 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा जाता है, लेकिन इस बार 3 लाख क्यूसेक पानी ही छोड़ा गया। इसके बावजूद गोपालगंज के पुल की अप्रोच रोड पानी की टक्कर नहीं झेल सकी और जमीन में समा गई।(UNA)

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