बेंगलुरु कर्नाटक डेप्युटी स्पीकर और जेडीएस नेता एसएल धर्मेगौड़ा की आत्महत्या से उनके करीबी और प्रशंसक स्तब्ध है। धर्मेगौड़ा का शव चिकमगलुरु में कडूर तालुक स्थित एक रेलवे ट्रैक पर मिला।

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बेंगलुरु
कर्नाटक डेप्युटी स्पीकर और जेडीएस नेता एसएल धर्मेगौड़ा की आत्महत्या से उनके करीबी और प्रशंसक स्तब्ध है। धर्मेगौड़ा का शव चिकमगलुरु में कडूर तालुक स्थित एक रेलवे ट्रैक पर मिला। बताया जा रहा है कि उन्होंने ट्रेन के आगे कूदकर अपनी जान दे दी। पुलिस ने धर्मेगौड़ा के पास से एक सुइसाइड नोट भी बरामद किया है जिसमें उन्होंने हाल ही में कर्नाटक विधान परिषद के अंदर हुई घटना का जिक्र किया है।

बताया जा रहा है कि धर्मेगौड़ा सखरायपटना स्थित फार्महाउस से सोमवार शाम अपने ड्राइवर धर्मराज के साथ निकले थे। ड्राइवर के अनुसार, धर्मेगौड़ा किसी दोस्त से फोन पर बात कर रहे थे। शाम करीब सवा 6 बजे वे गुनसागर स्थित रेलवे ट्रैक के नजदीक वाली रोड पर पहुंचे। धर्मेगौड़ा ने अपने ड्राइवर को कार रोकने और उनके आने तक इंतजार करने को कहा। हालांकि वह कई घंटे बाद भी लौटकर नहीं आए। उनका मोबाइल फोन भी स्विच ऑफ हो चुका था।
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15 दिसंबर की घटना से आहत थे धर्मेगौड़ा
इसके बाद ड्राइवर ने धर्मेगौड़ा के पर्सनल स्टाफ को कॉल किया जिसने पुलिस को सूचित किया। पुलिस और स्थानीय लोगों ने देर रात शव बरामद किया। बताया जाता है कि इस घटना से धर्मेगौड़ा को गहरा सदमा पहुंचा था। उन्होंने अपने करीबियों से इस बारे में बताया था। हालांकि पुलिस ने अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है।
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सुइसाइड नोट में परिवार से मांगी माफी
घटनास्थल पर पहुंचे बीजेपी के महासचिव सीटी रवि ने बताया, ‘धर्मे गौड़ा ने एक नोट छोड़ा है जिसमें उन्होंने प्रॉपर्टी के बारे में जानकारी दी है। इसके अलावा उन्होंने 15 दिसंबर की घटना पर भी खेद जताया है।’ चिकमगलुरु से विधायक सीटी रवि ने मीडिया को बताया कि धर्मेगौड़ा ने नोट में अपनी प्रॉपर्टी का जिक्र करते हुए बताया है कि किसे क्या मिलेगा। उन्होंने अपने इस कदम के लिए परिवार से माफी भी मांगी है।

15 दिसंबर की वह घटना, क्या हुआ था?
बता दें कि 15 दिसंबर को ही कर्नाटक विधान परिषद के अंदर काफी हंगामा हुआ था। अविश्वास प्रस्ताव के मुद्दे पर उप सभापति एसएल धर्मेगौड़ा को सभापति के आसन से खींचकर उतार दिया था और सदस्यों ने धक्कामुक्की करते हुए एक-दूसरे को अपशब्द भी कहे थे। कई वरिष्ठ नेताओं ने सदन की सौ साल के इतिहास में यह अप्रत्याशित घटना काले धब्बे के समान बताया था।
दरअसल कर्नाटक में बीजेपी सरकार ने सभापति के. प्रताप चंद्र शेट्टी पर अप्रत्याशित रूप से सत्र को स्थगित करने का आरोप लगाते हुए 15 दिसंबर को एक दिन के लिए विधान परिषद का सत्र बुलाया था। बीजेपी की तरफ से शेट्टी के विरुद्ध लाया गया अविश्वास प्रस्ताव उस दिन के एजेंडे में शामिल नहीं था। इससे पहले सभापति ने इस प्रस्ताव को प्रक्रिया में त्रुटि के आधार पर खारिज कर दिया था और तभी से बीजेपी के सदस्य इसपर विचार करने की मांग कर रहे थे।

बीजेपी के सदस्यों ने जेडी (एस) के समर्थन से अविश्वास प्रस्ताव लाकर शेट्टी को सभापति के पद से हटाने की योजना बनाई थी। विधान परिषद की कार्यवाही शुरू होते ही शेट्टी के आने से पहले ही गौड़ा सभापति के आसन पर बैठ गए और कोरम की घंटी बज रही थी जिससे कांग्रेस के सदस्य नाराज हो गए और उन्होंने आसन के पास जाकर गौड़ा से आसन से हटने को कहा क्योंकि वह अविश्वास प्रस्ताव की अनुमति दे देते।
इसके बाद बीजेपी और जेडी (एस) के सदस्य गौड़ा की सुरक्षा में आकर खड़े हो गए। इससे दोनों पक्षों के सदस्यों के बीच कहासुनी शुरू हो गई और हंगामा होने लगा। नसीर अहमद समेत कांग्रेस के कुछ सदस्यों ने आरोप लगाया कि सरकार ने सभापति के आने से पहले ही गौड़ा की मदद से कार्यवाही शुरू कर दी है ताकि शेट्टी के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया जा सके जिसे पहले खारिज कर दिया गया था।

बीजेपी और जेडी (एस) के सदस्यों ने कहा कि चूंकि अविश्वास प्रस्ताव सभापति के विरुद्ध है इसलिए उप सभापति को कार्यवाही संचालित करने का अधिकार है। इसके बाद एम नारायणस्वामी और नसीर अहमद समेत कुछ कांग्रेस सदस्यों ने उप सभापति को आसन से जबरदस्ती खींचकर हटा दिया। इस दौरान विधान परिषद के कई सदस्य और मार्शल भी धक्कामुक्की के शिकार हुए और कांग्रेस के एक सदस्य सभापति के आसन पर बैठने में कामयाब हो गए थे।